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‘प्रशासन मुर्दा है’—चीफ प्रॉक्टर को हटाने की मांग पर अड़े ABVP छात्र, BHU में शव बनकर सड़क पर लेटे

by on | 2026-10-02 20:45:36

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‘प्रशासन मुर्दा है’—चीफ प्रॉक्टर को हटाने की मांग पर अड़े ABVP छात्र, BHU में शव बनकर सड़क पर लेटे

​वाराणसी । ​काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) का माहौल एक बार फिर गर्म है। चीफ प्रॉक्टर को पद से हटाने की मुख्य मांग के साथ पिछले 10 दिनों से धरने पर बैठे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के छात्रों का सब्र अब जवाब दे चुका है। शुक्रवार को विश्वविद्यालय प्रशासन के रवैये से नाराज होकर प्रदर्शनकारियों ने विश्वनाथ मंदिर (VT) के बाहर सड़क पर प्रतीकात्मक शव बनकर लेटकर ऐसा विरोध जताया, जिसने पूरे कैंपस में हलचल मचा दी।

​सड़क पर लेटे छात्र, गूंजे प्रशासन विरोधी नारे

​"प्रशासन मुर्दा है" के नारों के साथ छात्रों ने सड़क पर लेटकर विश्वविद्यालय के शीर्ष अधिकारियों की चुप्पी और बेरुखी को घेरा। अनिश्चितकालीन आंदोलन के 10वें दिन हुए इस अनोखे प्रदर्शन ने साफ कर दिया कि छात्र संगठन अब किसी भी सूरत में पीछे हटने के मूड में नहीं है।

​BHU प्रशासन पर तानाशाही और भेदभाव का आरोप

​ABVP इकाई के अध्यक्ष पल्लव सुमन ने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि प्रशासन छात्रों की वास्तविक समस्याओं का समाधान करने के बजाय आवाज उठाने वालों का दमन कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों पर कार्रवाई की जा रही है और छात्र संगठनों के साथ खुला भेदभाव हो रहा है। प्रॉक्टोरियल बोर्ड की पूरी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता का दूर-दूर तक अता-पता नहीं है।

​कैंपस में महिला सुरक्षा बनी गंभीर चिंता

​प्रदर्शनकारी छात्रों ने कैंपस में छात्राओं और महिला कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। संगठन का कहना है कि विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा के दावे केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं, जबकि धरातल पर छात्राएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं।

​‘महामना की बगिया में यह नौबत क्यों?’

​आंदोलन की अगुवाई कर रहे ABVP इकाई मंत्री अनुराग तिवारी ने कहा कि पंडित मदन मोहन मालवीय जी ने इस महान संस्थान की नींव राष्ट्रनिर्माण, उच्च चरित्र और भारतीय मूल्यों के लिए रखी थी। लेकिन आज बेहद अफसोस का विषय है कि छात्रों को अपनी जायज और मूलभूत मांगों के लिए शव बनकर सड़कों पर लेटना पड़ रहा है।

​आर-पार के मूड में छात्र, प्रशासन पर टिकीं निगाहें

​10 दिनों से लगातार चल रहे इस अनिश्चितकालीन धरने ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली पर गहरे सवाल दाग दिए हैं। चीफ प्रॉक्टर को हटाने, प्रॉक्टोरियल बोर्ड में पारदर्शिता लाने और महिला सुरक्षा सुदृढ़ करने जैसी मांगों पर छात्र अड़े हुए हैं। अब देखना यह होगा कि इस अनूठे और उग्र प्रदर्शन के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन कब तक खामोशी साधे रहता है और क्या रुख अपनाता है।



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