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एलपीयू हिंसा में 12 गिरफ्तार, 40 की पहचान; पीजी कमरों में लूट का सामान तलाशेगी पुलिस

by admin@bebak24.com on | 2026-10-02 14:10:38

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एलपीयू हिंसा में 12 गिरफ्तार, 40 की पहचान; पीजी कमरों में लूट का सामान तलाशेगी पुलिस

जालंधर | बेबाक24 न्यूज़

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में हिंसा, तोड़फोड़ और लूटपाट के मामले में पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस ने जम्मू-कश्मीर के 3 छात्रों समेत 40 लोगों की पहचान की है। इनमें आंध्र प्रदेश की एक छात्रा भी शामिल है। अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें जम्मू-कश्मीर का एक युवक और 2 ऐसे बाहरी युवक शामिल हैं, जिनका विश्वविद्यालय से कोई संबंध नहीं बताया गया है।

पुलिस सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल टावर की जानकारी और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों में वर्तमान छात्रों के अलावा कई पूर्व विद्यार्थी भी शामिल हैं।

3 और गिरफ्तार, 3 दिन की पुलिस हिरासत

पुलिस ने वीरवार को फगवाड़ा के टिब्बी मोहल्ले के रहने वाले गगन, जेम्स दहिया और अभि को गिरफ्तार किया। जेम्स दहिया एलपीयू का छात्र बताया गया है, जबकि गगन डोमिनोज में पिज्जा वितरण का काम करता था। अदालत ने तीनों को 3 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।

इससे पहले साहिल नाम के युवक को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के अनुसार, उसके हाथ में छड़ थी और वह दुकानों में तोड़फोड़ करने वालों के साथ घूम रहा था। जम्मू-कश्मीर से गिरफ्तार एक छात्र को फगवाड़ा लाया गया है, जबकि 2 अन्य छात्रों की तलाश के लिए पुलिस टीम भेजी गई है।

पीजी कमरों की तलाशी की तैयारी

पुलिस को आशंका है कि हिंसा और लूटपाट के दौरान दुकानों से उठाया गया सामान एलपीयू के लॉ गेट के आसपास स्थित पीजी कमरों में छिपाया गया हो सकता है। जांच में कुछ पूर्व विद्यार्थियों और अन्य युवकों द्वारा लूट का सामान कमरों में रखने के बाद फरार होने की बात भी सामने आई है।

बंद कमरों की तलाशी के लिए पुलिस ने अदालत से अनुमति मांगी है। पुलिस ने संबंधित कमरों के ताले खुलवाने और तलाशी लेने के लिए सर्च वारंट जारी करने का आवेदन किया है। अनुमति मिलने के बाद इन कमरों से कथित तौर पर लूटा गया सामान बरामद करने का प्रयास किया जाएगा।

कुछ लड़कियों की भी पहचान की जा रही

पुलिस ने पूछताछ के लिए कई युवकों को हिरासत में लिया है। इनमें एक युवक के नाबालिग होने की बात भी सामने आई है। पुलिस हिंसा और तोड़फोड़ में उनकी भूमिका की जांच कर रही है।

पुलिस को कुछ लड़कियों के फोटो भी मिले हैं, जिनमें वे लूटपाट का सामान ले जाती दिखाई दे रही हैं। पुलिस उनकी पहचान और पूरे मामले में भूमिका की जांच कर रही है।

वहीं, एलपीयू प्रबंधन की ओर से आरोपी बताए गए लुधियाना के एक विद्यार्थी की जांच में अलग तस्वीर सामने आई। पुलिस के अनुसार, घटना के समय वह अपने घर पर था। घर के सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल टावर की जानकारी से इसकी पुष्टि होने के बाद भी पुलिस उसकी भूमिका की जांच कर रही है।

अफवाह के बाद शुरू हुआ था बवाल

पुलिस के अनुसार, 26 सितंबर की रात एलपीयू छात्रावास में एक छात्रा से दुष्कर्म की सूचना सामाजिक माध्यमों पर फैल गई थी। इसी के बाद परिसर में बवाल शुरू हुआ। इसके बाद तोड़फोड़ और यूनि मॉल की दुकानों में लूटपाट की घटनाएं हुईं।

प्रदर्शनकारियों ने जालंधर-फगवाड़ा मार्ग पर राष्ट्रीय राजमार्ग-44 को भी जाम कर दिया था। यह जाम 18 घंटे से अधिक समय तक रहा।

गिरफ्तार गगन के परिजनों ने पुलिस पर उन्हें समय पर जानकारी नहीं देने का आरोप लगाया है। परिवार के अनुसार, गगन एक दिन से लापता था और अदालत में पेशी से पहले उसने फोन कर गिरफ्तारी की जानकारी दी। परिजनों ने बताया कि उसने करीब डेढ़ महीने पहले ही डोमिनोज में नौकरी शुरू की थी।

अशोक मित्तल ने जताई चिंता

एलपीयू के कुलाधिपति और राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल ने विश्वविद्यालय में हुई हिंसा पर चिंता जताई। उन्होंने पंजाब में नशाखोरी, गैंगस्टरवाद, छीना-झपटी और अपहरण जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए राज्य की स्थिति पर चिंता व्यक्त की।

मित्तल ने दावा किया कि चितकारा विश्वविद्यालय और एलपीयू में हुई हिंसा का स्वरूप एक जैसा है। उन्होंने कहा कि सामाजिक माध्यम के मंच रेडिट के जरिये अफवाहें फैलाकर छात्रों को भड़काया गया और कुछ बाहरी तत्वों ने इसका फायदा उठाकर तोड़फोड़ तथा चोरी की।

उन्होंने मामले की जांच की मांग करते हुए कहा कि हिंसा के पीछे जिम्मेदार लोगों को सामने लाया जाना चाहिए।

बेबाक24 टेक

एलपीयू हिंसा मामले में पुलिस की जांच अब पहचान, गिरफ्तारी और कथित लूट के सामान की बरामदगी पर केंद्रित है। 40 लोगों की पहचान और 12 गिरफ्तारियों के बाद पुलिस डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका तय करने में जुटी है। पीजी कमरों की तलाशी के लिए अदालत की अनुमति मिलने के बाद जांच में आगे की कार्रवाई की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।



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