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फर्जी अधिवक्ताओं पर शिकंजा: जमानियां तहसील में जांच के लिए 10 सदस्यीय समिति गठित

by admin@bebak24.com on | 2025-12-03 20:23:34

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फर्जी अधिवक्ताओं पर शिकंजा: जमानियां तहसील में जांच के लिए 10 सदस्यीय समिति गठित


बार एसोसिएशन की बैठक में लिया गया ऐतिहासिक निर्णय; अभियान चलाकर होगी पहचान पत्र और पंजीयन की सघन जाँच

जमानियां (गाजीपुर) | तहसील न्यायालय परिसर में लंबे समय से व्याप्त अनियमितताओं और बिना वैध पंजीयन के अधिवक्ता की वेशभूषा धारण कर कार्य करने वाले अनाधिकृत व्यक्तियों पर अब बार एसोसिएशन ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को आयोजित बार एसोसिएशन की महत्वपूर्ण बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि ऐसे 'फर्जी' अधिवक्ताओं की पहचान कर उन्हें तत्काल परिसर से बाहर करने के लिए एक विशेष और सशक्त जांच अभियान चलाया जाएगा। इस निर्णय के तत्काल बाद, अभियान की निगरानी और संचालन के लिए 10 सदस्यीय अधिवक्ताओं की एक टीम का गठन किया गया है, जिसने तत्काल प्रभाव से अपना कार्यभार संभाल लिया है।

न्याय व्यवस्था की गरिमा पर खतरा

​बार एसोसिएशन के अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई इसलिए आवश्यक हो गई थी क्योंकि कई व्यक्तियों ने खुद को अधिवक्ता बताकर न केवल परिसर के नियमों का उल्लंघन किया, बल्कि आम जनता को गुमराह कर वकालत के पेशे की गरिमा को भी ठेस पहुंचाई। ये अनाधिकृत व्यक्ति बिना किसी विधिक शिक्षा या पंजीकरण के मुवक्किलों से सीधे संपर्क कर रहे थे, जिससे न केवल पंजीकृत अधिवक्ताओं के हितों का हनन हो रहा था, बल्कि कई मामलों में विधिक धोखाधड़ी की आशंका भी बढ़ रही थी। एसोसिएशन ने इन गंभीर शिकायतों का संज्ञान लेते हुए, परिसर में शुचिता और पारदर्शिता बहाल करने के लिए यह निर्णायक कदम उठाया है।

जाँच समिति का हुआ गठन

​बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक सिंह ने बैठक के उपरांत बताया कि एसोसिएशन न्याय प्रणाली के साथ किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने घोषणा की कि बिना पंजीयन के कार्यरत लोगों की जाँच के लिए तत्काल प्रभाव से एक 10 सदस्यीय विशेष जाँच समिति का गठन किया गया है।

इस महत्वपूर्ण समिति में वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल कुमार राय को चेयरमैन नियुक्त किया गया है, जो इस पूरे अभियान का नेतृत्व करेंगे। उनके साथ, अवधेश प्रसाद, बृजेश सिंह, मुनेश सिंह, घनश्याम सिंह, मिथिलेश प्रसाद सिंह, संजय यादव, शमशाद राईन, अक्षय और आजाद खान को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। यह समिति तहसील परिसर के हर कोने में जाकर, अधिवक्ता के रूप में कार्यरत प्रत्येक व्यक्ति के विधिक पहचान पत्र (Legal Identity Card) और बार काउंसिल में उनके पंजीयन के प्रमाण पत्रों की गहन जाँच करेगी।

अध्यक्ष की अपील: सहयोग और पहचान पत्र अनिवार्य

​जाँच अभियान को सफल बनाने के लिए, अध्यक्ष अशोक सिंह ने बार एसोसिएशन के सभी पंजीकृत और वास्तविक सदस्यों से एक भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि यह अभियान सभी के भले के लिए है और सभी अधिवक्ताओं को इसमें भरपूर सहयोग करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया है कि समिति द्वारा जाँच किए जाने के समय किसी भी प्रकार की असुविधा से बचने के लिए, सभी अधिवक्ता अनिवार्य रूप से अपना विधिक पहचान पत्र हर समय अपने साथ रखें और मांगे जाने पर बिना किसी हिचकिचाहट के समिति को दिखाएं।

सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी

​एसोसिएशन ने स्पष्ट कर दिया है कि जाँच में जिन व्यक्तियों का पंजीयन फर्जी पाया जाएगा या जो बिना पंजीयन के कार्य करते हुए पकड़े जाएंगे, उनके खिलाफ न केवल एसोसिएशन स्तर पर कार्रवाई होगी, बल्कि उन्हें पुलिस के हवाले भी किया जा सकता है। अधिवक्ता के रूप में कार्य करने का ढोंग करना कानूनी रूप से पहचान की चोरी (Impersonation) और धोखाधड़ी जैसे गंभीर अपराधों की श्रेणी में आता है, जिसके तहत भारतीय दंड संहिता (IPC) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।

​बार एसोसिएशन के इस सख्त और ऐतिहासिक निर्णय से जमानियां तहसील परिसर में एक ओर जहाँ न्याय व्यवस्था से जुड़े वास्तविक लोगों में संतोष और विश्वास का माहौल है, वहीं फर्जी तरीके से काम करने वाले तत्वों में हड़कंप मच गया है। एसोसिएशन ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है कि वह इस अभियान को तब तक जारी रखेगा जब तक तहसील परिसर पूरी तरह से फर्जी तत्वों से मुक्त नहीं हो जाता।



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