by admin@bebak24.com on | 2026-09-30 13:31:11
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लखनऊ | बेबाक24 न्यूज़
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी अपने सामाजिक आधार को विस्तार देने की रणनीति पर काम करती दिख रही है। पार्टी की रणनीति में गैरयादव पिछड़ा वर्ग, गैर-जाटव दलित और ब्राह्मण मतदाताओं को अधिक प्रतिनिधित्व देने की चर्चा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में टिकट वितरण के प्रयोग के बाद अब इसी दिशा को विधानसभा चुनाव में आगे बढ़ाने की बात सामने आई है।
स्रोत के मुताबिक, सपा इस बार यादव और मुस्लिम उम्मीदवारों की संख्या को करीब 80-85 सीटों तक सीमित रखने की योजना पर विचार कर रही है। इसके साथ सामान्य सीटों पर भी दलित उम्मीदवार उतारने की रणनीति बताई गई है, ताकि मुस्लिम-यादव-दलित मतदाताओं का समीकरण बनाया जा सके।
ओबीसी वर्ग में कुर्मी और निषाद को अधिक टिकट देने के साथ सैनी, गुर्जर, राजभर, पाल और प्रजापति बिरादरी को भी प्रतिनिधित्व देने की योजना बताई गई है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और अवध क्षेत्र में ब्राह्मणों को भी अधिक हिस्सेदारी देने की चर्चा है।
स्रोत के अनुसार, पिछले चुनाव में सपा गठबंधन ने करीब 128 यादव-मुस्लिम, इतने ही गैरयादव ओबीसी, 86 दलित और करीब 60 अगड़ी जातियों के उम्मीदवार मैदान में उतारे थे।
वहीं, राजग ने करीब 135 गैरयादव ओबीसी, 15 यादव, करीब 140 अगड़ी जातियों, 85 दलित और 30-35 वैश्य उम्मीदवारों को टिकट दिया था।
लोकसभा चुनाव में सपा ने यादव बिरादरी से 5 और मुस्लिम बिरादरी से 4 उम्मीदवार उतारे थे। इसके बाद पार्टी के नए सामाजिक समीकरण को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हुई।
स्रोत में भाजपा के एक वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के हवाले से कहा गया है कि पार्टी के सामने गैरयादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित वर्ग को फिर से अपने साथ जोड़ने की चुनौती है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव तथा पिछले 2 विधानसभा चुनावों में भाजपा के साथ रहे इन वर्गों के एक हिस्से ने 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा का समर्थन किया।
ऐसे में सपा के नए सामाजिक समीकरण को देखते हुए भाजपा को अपने पारंपरिक सामाजिक आधार को बनाए रखने के साथ चुनावी रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है।
स्रोत के अनुसार, भाजपा के भीतर एक वर्ग का मानना है कि चुनाव नजदीक आने पर मुकाबला योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के बीच केंद्रित हो सकता है। पार्टी के लिए कानून-व्यवस्था और हिंदुत्व प्रमुख मुद्दे रह सकते हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भाजपा को इन मुद्दों के साथ सपा के प्रस्तावित सामाजिक समीकरण के जवाब में अपनी चुनावी रणनीति तैयार करनी होगी।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सपा की संभावित टिकट रणनीति में गैरयादव ओबीसी, गैर-जाटव दलित और ब्राह्मणों को अधिक प्रतिनिधित्व देने की चर्चा महत्वपूर्ण है। हालांकि, अंतिम तस्वीर उम्मीदवारों के चयन और गठबंधन की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही सामने आएगी।
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