by admin@bebak24.com on | 2025-12-03 09:33:03
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वाराणसी, उत्तर प्रदेश: विचार, परम्परा, अध्यात्म और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बन चुके काशी तमिल संगमम् के चौथे संस्करण का मंगलवार को वाराणसी के नमो घाट पर भव्य शुभारंभ हुआ। उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक, शैक्षिक और आर्थिक एकता को नई दिशा देने वाले इस आयोजन का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बटन दबाकर किया। इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान, तमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री एल. मुरुगन, पुडुचेरी के उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक सहित कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ: 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' का जीवंत उदाहरण
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में इस संगमम् को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” के मंत्र का जीवंत उदाहरण बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं है, बल्कि उत्तर और दक्षिण भारत की शाश्वत सांस्कृतिक कड़ियों को फिर से मजबूत करने का एक माध्यम है।
मुख्यमंत्री ने कहा, "काशी और तमिलनाडु दोनों ही भारत की प्राचीनतम संस्कृतियों के केंद्र हैं, जिनके बीच सदियों पुराना संबंध रहा है। पिछले चार वर्षों में इस आयोजन के प्रभाव और लोकप्रियता को इसी बात से समझा जा सकता है कि इस अवधि में 26 लाख से अधिक श्रद्धालु काशी पहुंचे हैं। यह संगमम दोनों क्षेत्रों के लोगों में परस्पर प्रेम और समझ को बढ़ाता है।"
भाषा समन्वय की नई थीम
इस वर्ष की थीम “तमिल सीखिए—तमिल करकलम” का उल्लेख करते हुए सीएम योगी ने इसे भाषाई एकता की दिशा में एक नई और निर्णायक पहल बताया। उन्होंने कहा कि यह थीम भारत की शास्त्रीय भाषाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सांस्कृतिक समझ को गहरा करने में सहायक होगी। यह प्रयास भाषाई सीमाओं को तोड़कर ज्ञान और संस्कृति के आदान-प्रदान को बढ़ावा देगा।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान: ऐतिहासिक जनांदोलन
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने अपने संबोधन की शुरुआत पारंपरिक तमिल अभिवादन ‘वणक्कम काशी’ से की। उन्होंने कहा कि काशी तमिल संगमम् अब मात्र एक सरकारी आयोजन न रहकर, दो महान संस्कृतियों को जोड़ने वाला एक ऐतिहासिक जनांदोलन बन चुका है।
उन्होंने इस संस्करण के शैक्षिक और सांस्कृतिक विनिमय पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस बार तमिलनाडु के शिक्षक काशी आकर छात्रों को तमिल सिखाएंगे, जिससे बच्चों को भारत की सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक को जानने का मौका मिलेगा। वहीं, काशी के छात्र तमिलनाडु जाकर वहां की भाषा और संस्कृति से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ेंगे। उन्होंने तेनकाशी से शुरू हुई लगभग दो हज़ार किलोमीटर लंबी कार रैली का विशेष उल्लेख किया, जिसे उन्होंने काशी–तमिल सांस्कृतिक रिश्तों की गहराई और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बताया।
राज्यपाल आर.एन. रवि: पीएम मोदी की दूरदर्शिता
तमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने तमिल भाषा और संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिसके परिणामस्वरूप काशी तमिल संगमम् जैसी अनोखी पहल ने जन्म लिया है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन भारत की सांस्कृतिक चेतना को पुनर्जीवित करने का प्रयास है।
इस अवसर पर भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन का एक वीडियो संदेश भी प्रसारित किया गया, जिसमें उन्होंने इस आयोजन को भारत की सांस्कृतिक पुनर्जागरण यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया।
अनुभव यात्राएँ और ज्ञान भागीदार
एक महीने तक चलने वाले इस संगम में तमिलनाडु से 1,400 से अधिक प्रतिनिधि अलग-अलग जत्थों में काशी पहुंचेंगे। इन प्रतिनिधियों के लिए विशेष रूप से अनुभवात्मक यात्राएँ (Experiential Tours) आयोजित की जा रही हैं। इनमें काशी के साथ-साथ प्रयागराज और अयोध्या के महत्वपूर्ण स्थलों को भी शामिल किया गया है।
प्रतिनिधिमंडल, विश्वविद्यालयों, प्राचीन मंदिरों, विरासत स्थलों, कारीगर समूहों और ज्ञान संस्थानों का भ्रमण कर उत्तर भारत की सभ्यता और जीवन शैली को करीब से जानेंगे। यह सीधा संवाद और भ्रमण दोनों क्षेत्रों के लोगों के बीच भावनात्मक सेतु का निर्माण करेगा।
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार और रेलवे, संस्कृति, पर्यटन, कपड़ा तथा युवा मामले एवं खेल मंत्रालय सहित दस केंद्रीय मंत्रालयों का सहयोग शामिल है। आईआईटी मद्रास और बीएचयू इस संगम के नॉलेज पार्टनर की भूमिका निभा रहे हैं।
उद्घाटन समारोह में काशी और तमिलनाडु के कलाकारों ने अपनी मनमोहक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक प्रस्तुतियाँ दीं, जिसने पूरे वातावरण को राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया। उद्घाटन कार्यक्रम के समापन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर और बाबा कालभैरव मंदिर में दर्शन–पूजन कर आशीर्वाद लिया।
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