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चीन की स्मार्ट कारों से अमेरिका चिंतित, बिक्री रोकने की तैयारी

by admin@bebak24.com on | 2026-09-03 12:16:22

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चीन की स्मार्ट कारों से अमेरिका चिंतित, बिक्री रोकने की तैयारी

वाशिंगटन | बेबाक24 न्यूज़

चीन में तेजी से विकसित हो रही स्मार्ट कारों ने अमेरिकी सुरक्षा और वाहन उद्योग से जुड़े क्षेत्रों की चिंता बढ़ा दी है। अत्याधुनिक तकनीक, कम कीमत और कई सुविधाओं से लैस चीनी वाहनों को लेकर अमेरिका में आंकड़ों की सुरक्षा और संभावित जासूसी का खतरा उठाया जा रहा है।

चीन की वाहन कंपनी गीली की गैलेक्सी एम9 इसका उदाहरण है। 3 कतार वाली इस संकर वाहन में आधुनिक मनोरंजन और स्वचालित पार्किंग जैसी सुविधाएं दी गई हैं। चीन में इसकी कीमत करीब 35000 डॉलर यानी लगभग 33 लाख रुपये बताई गई है, जबकि समान सुविधाओं वाली कई अमेरिकी और यूरोपीय लग्जरी गाड़ियां इससे काफी महंगी हैं।

एक कार में कई अत्याधुनिक सुविधाएं

गैलेक्सी एम9 में गर्म और मालिश सुविधा वाली चमड़े की सीटें, करीब 30 इंच की बड़ी प्रदर्शन स्क्रीन, 27 स्पीकर वाला ध्वनि तंत्र, अंदर ही रखा शीतलन यंत्र और बिना तार के गायन जैसी सुविधाएं दी गई हैं।

इस वाहन की एक खास सुविधा स्वचालित पार्किंग भी है। चालक प्रदर्शन स्क्रीन पर खाली स्थान का चयन करता है और वाहन स्वयं पार्किंग की प्रक्रिया पूरी कर सकता है। संकर तकनीक से लैस यह वाहन एक बार में करीब 1060 किलोमीटर तक चलने में सक्षम बताया गया है।

अमेरिका में सुरक्षा को लेकर चिंता

अमेरिका में चिंता केवल इन वाहनों की कीमत या तकनीक तक सीमित नहीं है। मुख्य सवाल उन वाहनों में लगे कैमरों, संचार उपकरणों और अन्य जुड़ी हुई प्रणालियों से एकत्र होने वाले आंकड़ों को लेकर है।

अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों और कुछ सांसदों का मानना है कि ऐसी कारें अपने आसपास की तस्वीरें और स्थान से जुड़ी जानकारी लगातार एकत्र कर सकती हैं। आशंका यह जताई जा रही है कि संवेदनशील सैन्य ठिकानों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और प्रभावशाली लोगों की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी विदेश भेजी जा सकती है।

इन आशंकाओं की पुष्टि किसी विशेष मामले से हुई है, ऐसा उपलब्ध सामग्री में नहीं बताया गया है। फिलहाल यह मुख्य रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संभावित चिंता के रूप में उठाया जा रहा है।

चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध का प्रस्ताव

चीनी कंपनियों से जुड़े वाहनों पर कड़ी पाबंदी लगाने की दिशा में अमेरिका में विधायी प्रयास भी सामने आया है। अमेरिकी सांसद बर्नी मोरेनो और एलिसा स्लॉटकिन ने 2026 के जुड़ी हुई वाहन सुरक्षा कानून को पेश किया है।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत जिन वाहन कंपनियों में चीनी कंपनियों की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत से अधिक होगी, उनके वाहनों की अमेरिका में बिक्री पर रोक लगाई जा सकती है। रिपोर्ट के अनुसार संबंधित प्रस्ताव को संसदीय समिति की मंजूरी भी मिल चुकी है।

मर्सिडीज-बेंज पर भी पड़ सकता है असर

प्रस्तावित नियमों का असर केवल चीनी वाहन निर्माताओं तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। जर्मनी की मर्सिडीज-बेंज में चीनी कंपनियों की करीब 20 प्रतिशत हिस्सेदारी बताई गई है। ऐसे में नियम लागू होने पर कंपनी को अमेरिकी बाजार में अपनी हिस्सेदारी संरचना पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।

प्रस्तावित व्यवस्था का असर कनाडा और मैक्सिको से अमेरिका में आने वाले चीनी वाहनों पर भी पड़ सकता है। यानी पड़ोसी देशों से खरीदकर ऐसे वाहनों को अमेरिका में चलाने का विकल्प भी सीमित किया जा सकता है।

अमेरिका के सामने प्रतिबंध या कड़े नियम का विकल्प

विशेषज्ञों के बीच इस बात पर भी चर्चा है कि अमेरिका के लिए पूर्ण प्रतिबंध ही एकमात्र रास्ता नहीं है। सरकार वाहनों से एकत्र आंकड़ों के भंडारण और उनके स्थानांतरण को नियंत्रित करने के लिए कड़े नियम बना सकती है।

संभावित व्यवस्था के तहत कंपनियों को अमेरिकी उपभोक्ताओं का आंकड़ा देश के भीतर ही सुरक्षित रखने और अमेरिकी सर्वर का इस्तेमाल करने के लिए बाध्य किया जा सकता है। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं को कम करने के साथ उपभोक्ताओं को आधुनिक तकनीक से पूरी तरह वंचित होने से बचाया जा सकता है।

चीन की चुनौती केवल सस्ती कारों तक सीमित नहीं

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की वाहन उद्योग में बढ़त का कारण केवल कम कीमत नहीं है। चीन ने वाहन निर्माण से जुड़ी पूरी आपूर्ति व्यवस्था, उत्पादन क्षमता और तकनीकी ढांचा तेजी से विकसित किया है। इसी वजह से वहां की कंपनियां कम लागत में नए मॉडल और नई तकनीक बाजार तक पहुंचाने में सक्षम हो रही हैं।

अमेरिकी वाहन उद्योग के भीतर भी यह राय सामने आई है कि चीन की कंपनियों को हमेशा अपने बाजार से बाहर रखना संभव नहीं होगा। इसके बजाय अमेरिकी कंपनियों को तकनीक, लागत और उत्पादन क्षमता के स्तर पर प्रतिस्पर्धा मजबूत करनी होगी।

अब अमेरिका के सामने बड़ा सवाल यही है कि वह चीनी स्मार्ट वाहनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए या आंकड़ा सुरक्षा और तकनीकी नियंत्रण के लिए कड़े नियम बनाकर उन्हें सीमित रूप से बाजार में प्रवेश दे।



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