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राम मंदिर में सीईओ की नई व्यवस्था, बड़े फैसलों का अधिकार ट्रस्ट के पास

by admin@bebak24.com on | 2026-09-03 12:06:35

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राम मंदिर में सीईओ की नई व्यवस्था, बड़े फैसलों का अधिकार ट्रस्ट के पास

अयोध्या | बेबाक24 न्यूज़

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में पहली बार मुख्य कार्यपालक अधिकारी की नियुक्ति के बाद मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था में नया ढांचा तैयार किया जा रहा है। नई व्यवस्था में सीईओ को मंदिर के दैनिक संचालन और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी दी जाएगी, लेकिन नीतिगत और बड़े वित्तीय फैसलों का अंतिम अधिकार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पास ही रहेगा।

प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार ट्रस्ट नीतियां तय करेगा और सीईओ उन फैसलों को प्रभावी तरीके से लागू कराने की जिम्मेदारी संभालेगा। सीईओ सीधे ट्रस्ट के महामंत्री को अपनी रिपोर्ट देगा। इसका उद्देश्य मंदिर की बढ़ती व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित और पेशेवर तरीके से संचालित करना है।

दर्शन से लेकर सुरक्षा तक सीईओ की जिम्मेदारी

सीईओ के जिम्मे श्रद्धालुओं से जुड़ी व्यवस्थाओं का बड़ा हिस्सा रहेगा। प्रवेश और दर्शन की व्यवस्था, कतार प्रबंधन, स्वच्छता, सुरक्षा से जुड़े समन्वय तथा श्रद्धालुओं को मिलने वाली सुविधाओं की निगरानी उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल होगी।

राम मंदिर में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए भीड़ प्रबंधन और विभिन्न विभागों के बीच तालमेल भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।

कर्मचारियों और विभागों का प्रबंधन

मंदिर की व्यवस्थाओं में तैनात कर्मचारियों की कार्यप्रणाली, ड्यूटी व्यवस्था और मानव संसाधन से जुड़े कार्यों को भी सीईओ व्यवस्थित करेंगे। अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी उनकी भूमिका का हिस्सा होगा।

चढ़ावे की गिनती में तकनीक का इस्तेमाल

राम मंदिर में नकद चढ़ावे की गणना प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए तकनीकी व्यवस्था विकसित करने पर भी काम चल रहा है। ट्रस्ट के अनुसार इस संबंध में 2 बैंकों और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान से प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

प्रस्तावों का मूल्यांकन किया जा रहा है। नई व्यवस्था लागू होने पर चढ़ावे की गणना में मानवीय हस्तक्षेप कम करने और प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

बड़े वित्तीय फैसलों पर ट्रस्ट की मुहर

सीईओ मंदिर की आर्थिक और प्रशासनिक गतिविधियों की निगरानी करेंगे, लेकिन बड़े वित्तीय निर्णयों पर अंतिम मंजूरी ट्रस्ट ही देगा। दान, चढ़ावे, खरीद, खर्च और विकास परियोजनाओं में निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करना सीईओ की जिम्मेदारी होगी।

ट्रस्ट के वित्तीय ब्योरे के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में उसे 237 करोड़ रुपये की आय हुई, जबकि 91 करोड़ रुपये खर्च हुए। मंदिर और अन्य निर्माण कार्यों पर 425 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय किया गया। 31 मार्च 2026 तक ट्रस्ट के पास 1882 करोड़ रुपये उपलब्ध थे।

बड़ी परियोजनाओं और आयोजनों की निगरानी

मंदिर परिसर और उससे जुड़ी सुविधाओं के विकास कार्यों की प्रगति पर नजर रखना भी सीईओ की जिम्मेदारी होगी। निर्माण से जुड़ी एजेंसियों के साथ तालमेल, समयबद्ध कार्य और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा।

रामनवमी, दीपोत्सव और जन्माष्टमी जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान उमड़ने वाली भीड़ के मद्देनजर पहले से व्यवस्थाएं तैयार करने में भी सीईओ की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

धार्मिक मामलों में संत समाज की केंद्रीय भूमिका

ट्रस्ट की नई व्यवस्था में प्रशासनिक कामकाज को पेशेवर बनाने के बावजूद मंदिर के धार्मिक स्वरूप और परंपराओं पर संत समाज की भूमिका बनी रहेगी। ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास और महामंत्री स्वामी गोविंद देव गिरि प्रमुख पदों पर हैं।

ट्रस्ट में विभिन्न धार्मिक पीठों के संतों और जगद्गुरुओं की मौजूदगी भी यह स्पष्ट करती है कि मंदिर से जुड़े धार्मिक और परंपरागत विषयों में अंतिम दिशा-निर्देशन ट्रस्ट और संत समाज की भूमिका के अनुरूप ही रहेगा।

इस व्यवस्था का मूल उद्देश्य स्पष्ट है—ट्रस्ट नीति और बड़े निर्णय तय करेगा, जबकि सीईओ मंदिर की विशाल प्रशासनिक व्यवस्था को जमीन पर प्रभावी ढंग से संचालित करेगा।



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