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पंजाब की मतदाता सूची से राघव चड्ढा का नाम गायब, राजनीतिक विवाद तेज

by admin@bebak24.com on | 2026-09-03 12:05:15

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पंजाब की मतदाता सूची से राघव चड्ढा का नाम गायब, राजनीतिक विवाद तेज

चंडीगढ़ | बेबाक24 न्यूज़

पंजाब की मतदाता सूची के प्रारूप से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम हटाए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। चुनाव संबंधी अभिलेख में उनके नाम के सामने उन्हें दूसरी जगह स्थानांतरित बताया गया है। चड्ढा ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है।

उन्होंने कहा कि उनका मतदाता पहचान पत्र मोहाली में दर्ज है और उन्होंने अपना स्थायी निवास दूसरी जगह स्थानांतरित नहीं किया है। चड्ढा के मुताबिक, मतदाता सूची के प्रारूप में उनका नाम हटाना सामान्य लिपिकीय भूल नहीं मानी जा सकती।

चड्ढा ने पंजाब सरकार पर लगाया आरोप

राघव चड्ढा ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान उनका नाम जानबूझकर गलत श्रेणी में दर्ज किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि उन्हें दूसरी जगह स्थानांतरित बताने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया।

चड्ढा का कहना है कि मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में बूथ स्तर से लेकर जिला और राज्य स्तर तक संबंधित अधिकारी शामिल होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के अधीन काम करने वाले अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव डाला जा सकता है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

अंतिम सूची अभी नहीं हुई जारी

चड्ढा ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल यह मतदाता सूची का प्रारूप है और अंतिम सूची प्रकाशित नहीं हुई है। नामों को लेकर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है। इसी प्रक्रिया के तहत गलत प्रविष्टियों को सुधारने का अवसर भी उपलब्ध है।

अंतिम मतदाता सूची अक्तूबर 2026 में प्रकाशित की जानी है। चड्ढा ने कहा कि वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपने नाम को दोबारा दर्ज कराने और त्रुटि सुधारने के लिए उपलब्ध उपाय अपना रहे हैं।

अधिकारियों की भूमिका पर उठाए सवाल

राघव चड्ढा ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़ी पूरी प्रक्रिया में विभिन्न स्तरों पर पंजाब सरकार के अधिकारी तैनात हैं। उन्होंने कहा कि बूथ स्तर के कर्मचारी, सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी, निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी और जिला निर्वाचन अधिकारी राज्य प्रशासनिक तंत्र से जुड़े होते हैं।

उन्होंने यह भी दावा किया कि अधिकारियों के स्थानांतरण, नियुक्ति और सेवा संबंधी मामलों पर राज्य सरकार का प्रभाव रहता है। इसी आधार पर चड्ढा ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव के माध्यम से मतदाता सूची में उनके नाम के साथ ऐसी कार्रवाई की गई।

क्या है विशेष गहन पुनरीक्षण?

विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत मतदाता सूचियों की व्यापक जांच की जाती है। इसमें मतदाताओं के नाम, पते और अन्य विवरणों का सत्यापन किया जाता है। जिन मतदाताओं के बारे में स्थान परिवर्तन, मृत्यु या अन्य कारणों से संदेह होता है, उनके नाम की जांच की जाती है।

प्रारूप सूची जारी होने के बाद नागरिकों को अपने नाम और विवरण की जांच कर आपत्ति या सुधार दर्ज कराने का अवसर मिलता है। इसलिए फिलहाल राघव चड्ढा का नाम हटना अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता।

आगे क्या होगा?

अब यह मामला दावे और आपत्ति की प्रक्रिया में जाएगा। संबंधित निर्वाचन अधिकारियों के सामने दस्तावेज और आवश्यक प्रमाण प्रस्तुत किए जाने के बाद नाम को लेकर निर्णय लिया जाएगा।

राघव चड्ढा ने इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक प्रतिशोध बताया है, जबकि अंतिम स्थिति निर्वाचन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।



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