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पत्थर खदान हादसा: डीएम ने घटना के बाद भी ठप पड़ी खदानों को चालू करने की दी हरी झंडी

by on | 2025-11-29 01:17:02

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पत्थर खदान हादसा: डीएम ने घटना के बाद भी ठप पड़ी खदानों को चालू करने की दी हरी झंडी

सोनभद्र : जिले के बिल्ली-मारकुंडी खनन क्षेत्र में हुए पत्थर खदान हादसे ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह त्रासदी न केवल लाखों के राजस्व का नुकसान कर रही है, बल्कि हजारों मजदूरों को आजीविका के लिए परेशान भी कर रही है। दुर्घटना के बाद जिले के खनन अधिकारियों ने सख्ती दिखाते हुए सभी खदानों को बंद कर दिया था, लेकिन जिला मजिस्ट्रेट (DM) ने इस फैसले को पलटते हुए कुछ ठप पड़ी खदानों को फिर से चालू करने की हरी झंडी दे दी है।

  दुर्घटना और डीएम का फैसला

 * हादसे का विवरण: खनन अधिकारी विजेंद्र सिंह ने पुष्टि की कि 15 नवंबर को बिल्ली-मारकुंडी क्षेत्र में एक खदान धंसने से हादसा हुआ, जिसके बाद सभी खदानों के लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश की गई थी। उन्होंने यह भी बताया कि इस क्षेत्र की 30 खदानें पहले से ही सीज हैं, जबकि अन्य खदानों में काम उप-पट्टे (Sub-Lease) पर चल रहा था।

 * अधिकारियों की सख्ती: हादसे के बाद सभी खनन अधिकारियों ने सुरक्षा का जायजा लेते हुए बाकी सभी खदानों को ठप करने और उप-पट्टे पर काम कर रही खदानों के लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया था।

 * डीएम का हस्तक्षेप: जिलाधिकारी ने इस फैसले को पलटते हुए कहा कि हादसे का असर पूरे खनन क्षेत्र पर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि जिस खदान में दुर्घटना हुई, उसे छोड़कर अन्य वैध खदानों को फिर से चालू कर दिया जाए। उन्होंने तर्क दिया कि हादसे का संबंध उप-पट्टे पर काम कर रहे पट्टेदारों से नहीं है।

 * परिणाम: इस आदेश के बाद, जहां एक तरफ लाखों के राजस्व नुकसान को रोकने का प्रयास किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ सुरक्षा मानकों की अनदेखी के बीच हजारों मजदूरों की आजीविका का संकट भी गहरा गया है।

  अवैध खनन और सुरक्षा चूक

 * पूर्व जिला खनन अधिकारी का बयान: पूर्व जिला खनन अधिकारी (गौतम बुद्ध नगर) ने ओबरा थाना के मारकुंडी खनन क्षेत्र में अवैध खनन की अनदेखी पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि 15 नवंबर को पत्थर की चट्टान गिरने के बाद ही मजदूर वहां काम करने को मजबूर थे। उनके अनुसार, सुरक्षा मानकों की पूरी तरह अनदेखी की गई, जिसके लिए खनन अधिकारी सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं।

 * खुलेआम उल्लंघन: खनन से जुड़े अवैध डंपिंग, लापरवाही और उच्चतम न्यायालय के निर्देशों की अनदेखी की शिकायतें सामने आई हैं। यहां तक कि कई बार मजदूरों को सुरक्षा उपकरण के बिना काम करने को मजबूर किया जाता है।

 * फरार अभियुक्त: इस हादसे के संबंध में फरार अभियुक्तों की जानकारी देने वाले को इनाम देने की घोषणा की गई है। पुलिस ने खनन संचालक सहित छह गैर-मजदूर नेताओं को भी गिरफ्तार किया है, जिन पर खदान हादसे के संबंध में कार्रवाई की गई है।

निष्कर्ष: आजीविका बनाम सुरक्षा

सोनभद्र का यह खदान हादसा एक जटिल समस्या को दर्शाता है, जहां राजस्व और मजदूरों की आजीविका एक तरफ है, और सुरक्षा तथा अवैध खनन दूसरी तरफ। डीएम का खदानों को फिर से चालू करने का निर्णय भले ही आर्थिक नुकसान को कम करने के लिए लिया गया हो, लेकिन यह निर्णय असुरक्षित परिस्थितियों में काम करने वाले मजदूरों के जीवन को खतरे में डाल सकता है।

स्थानीय प्रशासन और सरकार के लिए यह आवश्यक है कि वे कड़े सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करें, अवैध खनन पर पूर्ण रोक लगाएं, और केवल तभी खदानों को चालू करने की अनुमति दें जब मजदूरों की सुरक्षा पूरी तरह से सुनिश्चित हो।




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