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झारखंड छात्र आंदोलन पर सियासत तेज, राहुल गांधी के रुख पर उठे सवाल; कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने

by admin@bebak24.com on | 2026-08-12 12:42:59

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झारखंड छात्र आंदोलन पर सियासत तेज, राहुल गांधी के रुख पर उठे सवाल; कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने

रांची: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन अब राजनीतिक रूप लेता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के रुख पर सवाल उठाए हैं, जबकि कांग्रेस का कहना है कि उसने छात्रों की मांगों का समर्थन किया है और सरकार से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।

झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व वाली सरकार में कांग्रेस भी सहयोगी दल है। ऐसे में विपक्ष राहुल गांधी से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग कर रहा है।

राहुल गांधी ने क्या कहा?

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है और राज्य सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द समाधान निकालना चाहिए।

बीजेपी ने क्यों उठाए सवाल?

बीजेपी का आरोप है कि झारखंड सरकार प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं पर छात्रों की चिंताओं का समाधान करने में विफल रही है। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस सरकार का हिस्सा होने के बावजूद राहुल गांधी इस मुद्दे पर मुखर नहीं हैं।

बीजेपी ने मांग की है कि कांग्रेस झारखंड सरकार से अपना समर्थन वापस ले और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए दबाव बनाए।

विशेषज्ञों की क्या राय है?

रांची विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के प्रोफेसर कंजीव लोचन का मानना है कि राहुल गांधी को इस आंदोलन से सीधे बैकफुट पर नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, राहुल गांधी ने छात्रों की मांगों का समर्थन किया है और सरकार से संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील भी की है।

वहीं, रांची विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के प्रोफेसर रिजवान अली का कहना है कि विपक्ष के तौर पर बीजेपी आंदोलन को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है, जबकि कांग्रेस के लिए अपनी सहयोगी सरकार से समर्थन वापस लेना व्यावहारिक विकल्प नहीं है।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में लंबे समय से गड़बड़ियां होती रही हैं, जिससे योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है।

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने रांची में विधानसभा की ओर मार्च किया, जहां पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए जल तोप का भी इस्तेमाल किया।

जेपीएससी पर पहले भी लगे हैं आरोप

झारखंड लोक सेवा आयोग से जुड़े विवाद नए नहीं हैं। वर्ष 2005 की संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मामला लंबे समय से जांच और न्यायिक प्रक्रिया में है। इस मामले में आयोग के तत्कालीन पदाधिकारियों सहित कई लोगों पर भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए थे।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता का मुद्दा किसी एक सरकार तक सीमित नहीं है और राज्य में विभिन्न सरकारों के दौरान भी इस तरह के विवाद सामने आते रहे हैं।

आगे क्या?

छात्र संगठनों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर, राजनीतिक दल इस मुद्दे को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति में यह मुद्दा और अधिक गर्मा सकता है।



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