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डीआर कांगो में इबोला का कहर, डब्ल्यूएचओ बोला- वायरस हमसे आगे निकल रहा है

by on | 2026-08-11 16:37:29

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डीआर कांगो में इबोला का कहर, डब्ल्यूएचओ बोला- वायरस हमसे आगे निकल रहा है

किन्शासा। लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो में इबोला का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, स्वास्थ्य अधिकारी संक्रमण को रोकने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वायरस के फैलने की रफ्तार नियंत्रण प्रयासों से तेज बनी हुई है। डब्ल्यूएचओ ने बताया कि मौजूदा प्रकोप की शुरुआत आधिकारिक घोषणा से करीब 3 महीने पहले ही हो गई थी।

डब्ल्यूएचओ के अफ्रीका क्षेत्रीय निदेशक डॉ. मोहम्मद जनाबी ने स्थिति की गंभीरता बताते हुए कहा, “हम वायरस का पीछा कर रहे हैं, जबकि वायरस हमसे आगे है।”

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस प्रकोप में अब तक 4,294 मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 1,960 लोगों की मौत हुई है। अधिकारियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती उन संक्रमित लोगों तक पहुंचना है जो स्वास्थ्य केंद्रों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।

आधिकारिक घोषणा से पहले ही फैल रहा था संक्रमण

डीआर कांगो में इबोला के मौजूदा प्रकोप की आधिकारिक घोषणा 15 मई को की गई थी। हालांकि, डब्ल्यूएचओ के एक अध्ययन के अनुसार संक्रमण का प्रसार इससे करीब 3 महीने पहले, यानी फरवरी में ही शुरू हो गया था।

शुरुआती चरण में कई मरीजों में बीमारी के लक्षणों को मलेरिया या टाइफाइड से जोड़कर देखा गया। इसके कारण इबोला की पहचान और उपचार शुरू करने में देरी हुई। संक्रमण के शुरुआती मामलों की सही पहचान नहीं हो पाने से वायरस को फैलने का अतिरिक्त अवसर मिला।

केवल 30 प्रतिशत मरीजों तक पहुंच पा रहे स्वास्थ्यकर्मी

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, स्वास्थ्यकर्मी वर्तमान में इबोला से प्रभावित करीब 30 प्रतिशत मरीजों तक ही पहुंच पा रहे हैं। बड़ी संख्या में संक्रमित लोग अपने घरों में ही रह रहे हैं और कई मरीजों की वहीं मौत हो रही है।

स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए यह स्थिति इसलिए भी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि संक्रमित लोगों की पहचान, उन्हें अलग रखना और समय पर उपचार देना इबोला के प्रसार को रोकने के प्रमुख उपाय हैं।

जिन मरीजों तक स्वास्थ्य सेवाएं नहीं पहुंच पा रही हैं, उनके संपर्क में आने वाले परिवार और समुदाय के अन्य लोगों में भी संक्रमण का खतरा बना रहता है।

अंतिम संस्कार की परंपराएं भी बढ़ा रही हैं खतरा

इबोला संक्रमण को रोकने में अंतिम संस्कार की पारंपरिक प्रथाएं भी बड़ी चुनौती बन रही हैं। प्रभावित क्षेत्रों में कुछ समुदायों में अंतिम संस्कार के दौरान मृत व्यक्ति के शरीर को छूने की परंपरा है।

इबोला संक्रमित व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके शरीर में वायरस मौजूद रह सकता है। ऐसे में शव के सीधे संपर्क में आने वाले लोगों के संक्रमित होने का जोखिम बढ़ जाता है।

इसी कारण स्वास्थ्य अधिकारी सुरक्षित अंतिम संस्कार की व्यवस्था को संक्रमण रोकने की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।

स्वास्थ्य अधिकारियों पर भरोसे की कमी बनी चुनौती

डब्ल्यूएचओ के सामने केवल चिकित्सा संबंधी चुनौतियां ही नहीं हैं। कुछ प्रभावित समुदायों में स्वास्थ्य अधिकारियों और सरकारी संस्थाओं के प्रति भरोसे की कमी भी बीमारी पर नियंत्रण की राह में बाधा बन रही है।

यदि संक्रमित या उनके संपर्क में आए लोग स्वास्थ्य अधिकारियों से बचते हैं, तो बीमारी की निगरानी और संपर्क में आए लोगों की पहचान मुश्किल हो जाती है। इससे संक्रमण की वास्तविक स्थिति का आकलन करना भी कठिन हो सकता है।

डब्ल्यूएचओ का कहना है कि इबोला को नियंत्रित करने के लिए केवल चिकित्सा संसाधन पर्याप्त नहीं हैं। स्थानीय समुदायों का विश्वास हासिल करना, समय पर बीमारी की पहचान करना और संक्रमित लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है।

क्या है इबोला?

इबोला एक गंभीर वायरल बीमारी है जो संक्रमित व्यक्ति के रक्त और शरीर के अन्य तरल पदार्थों के संपर्क से फैल सकती है। संक्रमित व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके शव के संपर्क में आने से भी संक्रमण का खतरा रहता है।

डीआर कांगो में मौजूदा प्रकोप के बीच डब्ल्यूएचओ और स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी संक्रमण की पहचान, मरीजों की देखभाल और संपर्क में आए लोगों की निगरानी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, संक्रमण की शुरुआती पहचान में देरी और प्रभावित समुदायों तक सीमित पहुंच के कारण चुनौती अभी भी बड़ी बनी हुई है।



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