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12 अगस्त को साल का पहला सूर्य ग्रहण, भारत में नहीं देगा दिखाई; जानिए किन देशों में दिखेगा अद्भुत नजारा

by admin@bebak24.com on | 2026-08-11 15:18:13

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12 अगस्त को साल का पहला सूर्य ग्रहण, भारत में नहीं देगा दिखाई; जानिए किन देशों में दिखेगा अद्भुत नजारा

नई दिल्ली। वर्ष 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को होने जा रहा है। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, जिसका पूर्ण चरण उत्तरी रूस, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन और पुर्तगाल के एक छोटे से हिस्से में दिखाई देगा। वहीं यूरोप, उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका के कई क्षेत्रों में लोग इसे आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में देख सकेंगे। भारत में यह सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, 12 अगस्त का यह सूर्य ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा।

कब होगा सूर्य ग्रहण?

यह खगोलीय घटना बुधवार, 12 अगस्त 2026 को होगी। सूर्य ग्रहण उस समय बनता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है और सूर्य के प्रकाश का कुछ या पूरा हिस्सा पृथ्वी तक पहुंचने से रोक देता है।

इस बार चंद्रमा की छाया पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध के बड़े हिस्से से होकर गुजरेगी। पूर्ण ग्रहण का मार्ग उत्तरी रूस से शुरू होकर आर्कटिक क्षेत्र, उत्तरी अटलांटिक महासागर और आइसलैंड से गुजरते हुए स्पेन तक पहुंचेगा। पुर्तगाल के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में भी पूर्ण ग्रहण दिखाई देगा।

किन देशों में दिखेगा पूर्ण सूर्य ग्रहण?

पूर्ण सूर्य ग्रहण का अर्थ है कि चंद्रमा कुछ समय के लिए सूर्य की पूरी दृश्यमान सतह को ढक लेता है। 12 अगस्त को इसका पूर्ण चरण मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में दिखाई देगा—

  • उत्तरी रूस
  • ग्रीनलैंड
  • आइसलैंड
  • स्पेन
  • पुर्तगाल का छोटा उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र

नासा के अनुसार, उत्तरी रूस के एक दूरदराज क्षेत्र में पूर्ण ग्रहण दोपहर के समय दिखाई देगा। ग्रीनलैंड और आइसलैंड में यह देर दोपहर या शाम के आसपास दिखाई दे सकता है। स्पेन और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में सूर्यास्त से कुछ समय पहले पूर्ण ग्रहण देखने का अवसर मिलेगा।

कई देशों में दिखाई देगा आंशिक ग्रहण

पूर्ण ग्रहण के मार्ग से बाहर रहने वाले कई क्षेत्रों में चंद्रमा सूर्य को केवल आंशिक रूप से ढकेगा। इसके कारण वहां आंशिक सूर्य ग्रहण दिखाई देगा।

नासा के अनुसार, उत्तरी अमेरिका के कुछ हिस्सों, कनाडा के बड़े क्षेत्र, यूरोप के अधिकांश हिस्सों और उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका में आंशिक सूर्य ग्रहण देखा जा सकेगा। कुछ स्थानों पर सूर्य का बड़ा हिस्सा चंद्रमा की छाया में आ जाएगा।

यूरोप और अफ्रीका के पश्चिमी हिस्सों में इस घटना का एक विशेष दृश्य देखने को मिल सकता है। कुछ क्षेत्रों में सूर्यास्त के समय भी सूर्य ग्रहण की स्थिति बनी रहेगी, जिससे क्षितिज के पास ग्रहण लगा सूर्य दिखाई दे सकता है।

भारत में क्यों नहीं दिखेगा ग्रहण?

भारत के लिए इस खगोलीय घटना की खास बात यह है कि 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण यहां से दिखाई नहीं देगा। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 2026 के सूर्य ग्रहण संबंधी विवरण में स्पष्ट किया है कि यह ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा।

इसलिए भारत में रहने वाले लोग इसे प्रत्यक्ष रूप से देखने के बजाय अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्थाओं की ओर से किए जाने वाले सीधे प्रसारण के माध्यम से देख सकते हैं। नासा ने भी ग्रहण का सीधा प्रसारण करने की जानकारी दी है।

कितनी देर रहेगा पूर्ण ग्रहण?

पूर्ण सूर्य ग्रहण का सबसे महत्वपूर्ण चरण बहुत कम समय तक रहता है। नासा के अनुसार, ग्रहण के पूर्ण चरण की अधिकतम अवधि 2 मिनट 30 सेकंड से कम रहेगी। ग्रहण के मार्ग के अधिकांश हिस्सों में पूर्णता की अवधि इससे भी कम होगी।

हालांकि, सूर्य का आंशिक रूप से ढका हुआ दिखाई देना इससे कहीं अधिक समय तक जारी रह सकता है। इसकी अवधि स्थान के अनुसार अलग-अलग होगी।

सूर्य ग्रहण के दौरान आंखों की सुरक्षा जरूरी

सूर्य ग्रहण को सीधे आंखों से देखना सुरक्षित नहीं है। सामान्य धूप का चश्मा सूर्य की तीव्र किरणों से आंखों को पर्याप्त सुरक्षा नहीं देता। सूर्य को देखने के लिए प्रमाणित ग्रहण-दर्शी चश्मे या उपयुक्त सौर फिल्टर का इस्तेमाल करना चाहिए।

सूर्य को कैमरे, दूरबीन या अन्य प्रकाशीय उपकरण से सीधे देखने से भी बचना चाहिए, जब तक उनमें सूर्य के अवलोकन के लिए उचित सौर फिल्टर न लगा हो।

सूर्य ग्रहण को अप्रत्यक्ष रूप से देखने के लिए छिद्र प्रक्षेपक जैसी सरल विधियों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे सूर्य की छवि को किसी सतह पर प्रक्षेपित करके ग्रहण का सुरक्षित अवलोकन किया जा सकता है।

क्या है इस सूर्य ग्रहण की खासियत?

12 अगस्त का सूर्य ग्रहण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका पूर्ण चरण पृथ्वी के कई अलग-अलग और भौगोलिक रूप से विशिष्ट क्षेत्रों से होकर गुजरेगा। उत्तरी रूस से लेकर ग्रीनलैंड, आइसलैंड और स्पेन तक इसकी पूर्णता का मार्ग बनेगा, जबकि इससे कहीं व्यापक क्षेत्र में आंशिक ग्रहण दिखाई देगा।

भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा, लेकिन दुनिया के दूसरे हिस्सों में होने वाला यह खगोलीय दृश्य वैज्ञानिकों और आकाश-दर्शन में रुचि रखने वाले लोगों के लिए वर्ष 2026 की प्रमुख खगोलीय घटनाओं में से एक रहेगा।



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