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कानून को सीधी चुनौती या सियासी पैंतरा? अफजाल का 'धान' और बुलडोजर का 'इंतजार'

by on | 2026-08-04 00:03:35

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कानून को सीधी चुनौती या सियासी पैंतरा? अफजाल का 'धान' और बुलडोजर का 'इंतजार'

बेबाक कलम से:

​इलाहाबाद हाईकोर्ट से शस्त्र लाइसेंस केस में गिरफ्तारी पर रोक की अंतरिम राहत क्या मिली, गाजीपुर की राजनीति में मानों भूचाल आ गया!
भूमी मुक्त करने का कोर्ट आदेश स्याही से सूखा भी नहीं था कि सपा सांसद अफजाल अंसारी दल-बल के साथ सीधे मांचा और खरडिहा के उन खेतों में उतर आए, जिन्हें प्रशासन ने कभी अपराध से अर्जित मानकर कुर्क (सीज) किया था।

​पैंट मोड़कर, कीचड़ में उतरकर खुद धान की रोपाई करना—यह कोई एक सांसद का 'खेती प्रेम' नहीं है। यह सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र, पुलिस और प्रदेश सरकार की माफिया-विरोधी मुहिम को सीधी चुनौती देने का एक तीखा सियासी दांव है।

​लेकिन सवाल अब भी वही खड़ा है: क्या अंगद राय के बाद अगला नंबर अफजाल अंसारी की जमीनों का होगा?

कोर्ट की राहत 'स्टे' है, 'क्लीन चिट' नहीं!

​हाईकोर्ट की दो जजों की बेंच ने सिर्फ 10 अगस्त 2026 तक गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई है। यह राहत एक अस्थाई ढाल भर है, कोई अंतिम फैसला नहीं।

​गाजीपुर कलेक्ट्रेट से 145 हथियारों से जुड़ी फाइलों का रहस्यमयी ढंग से गायब होना।


​रायफल (संख्या 830405) और लाइसेंस (1188 पी-2) की मूल पत्रावली से छेड़छाड़।


​यह मामला महज एक मुकदमे का नहीं, बल्कि शासकीय दस्तावेजों की हेराफेरी और आपराधिक साजिश (Section 120-B) का बेहद संगीन मामला है। अगर 10 अगस्त को राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता (AAG) कोर्ट के सामने कड़े सबूत रख देते हैं, तो यह अंतरिम ढाल एक झटके में ढह सकती है।

अंगद राय पर 9.30 करोड़ की कुर्की: प्रशासन का रुख साफ

​गाजीपुर पुलिस ने सोमवार को ही मुख्तार गैंग के प्रमुख शूटर अंगद राय उर्फ झूलन राय की 9.30 करोड़ की अवैध संपत्ति पर ढोल-नगाड़ों की मुनादी कराकर कुर्की की लाल पट्टिका चस्पा कर दी है।

​योगी सरकार का संदेश बेहद साफ और क्रूरता की हद तक सीधा है—IS-191 गैंग के आर्थिक ढांचे को पूरी तरह नेस्तनाबूद करना। मांचा और खरडिहा की जिन जमीनों पर तीन दिन से अफजाल अंसारी हल और धान के पौधे लेकर खड़े हैं, वे प्रशासनिक रडार से बाहर नहीं हुई हैं। यदि राजस्व और पुलिस की संयुक्त जांच रिपोर्ट में इन संपत्तियों को गैंगस्टर एक्ट या बेनामी आय का हिस्सा दिखाया जाता है, तो कानून की लाठी फिर चलने में देर नहीं लगाएगी।

'खेतों में रोपाई'—कानून को मात या आफत को दावत?

​अफजाल अंसारी यह संदेश देना चाहते हैं कि कोर्ट का आदेश आते ही 'जमीनें मुक्त' हो गईं और वे उस पर काबिज हैं। लेकिन प्रशासनिक जानकारों की मानें तो विवादित या गैंगस्टर एक्ट के तहत चिन्हित जमीनों पर रोपाई करना मालिकाना हक की कानूनी मुहर नहीं बन जाता।

​यह कदम गाजीपुर प्रशासन और लखनऊ में बैठे आकाओं को चिढ़ाने जैसा है। प्रशासन इसे "न्यायिक राहत की आड़ में प्रशासनिक कार्रवाई पर हावी होने का प्रयास" मानकर अपनी कानूनी घेराबंदी और सख्त कर सकता है।

निष्कर्ष

​अफजाल अंसारी का खेतों में उतरकर धान रोपना यह जताता है कि वह सरकार से दो-दो हाथ करने के पूरे मूड में हैं। लेकिन अंगद राय की संपत्तियों पर पुलिस की जब्ती ने यह साफ कर दिया है कि गाजीपुर में खाकी और प्रशासन शांत बैठने वाले नहीं हैं।

10 अगस्त की तारीख तय करेगी कि मांचा और खरडिहा के खेतों में उगे धान के ये पौधे लहराएंगे, या फिर वहां एक बार फिर गाजीपुर पुलिस की मुनादी का ढोल बजेगा और कुर्की का बोर्ड गढ़ेगा!



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