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पेपर लीक रोकने के लिए आज लोकसभा में पेश होगा नया संशोधन विधेयक; 10 साल की जेल, ₹10 करोड़ तक जुर्माना और 2 महीने में जांच पूरी करने का प्रावधान

by admin@bebak24.com on | 2026-07-27 11:28:56

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पेपर लीक रोकने के लिए आज लोकसभा में पेश होगा नया संशोधन विधेयक; 10 साल की जेल, ₹10 करोड़ तक जुर्माना और 2 महीने में जांच पूरी करने का प्रावधान

नई दिल्ली: नीट-यूजी पेपर लीक मामले को लेकर देश भर में हुए छात्र आंदोलनों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए बड़ा विधायी कदम उठाया है।

सरकार आज लोकसभा में 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पेश करने जा रही है। केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह इस विधेयक को सदन के पटल पर रखेंगे।

नए संशोधन विधेयक की 5 बड़ी और सख्त बातें

यह नया विधेयक लोक परीक्षा अधिनियम, 2024 में महत्वपूर्ण संशोधन करने के लिए लाया जा रहा है:

  • कड़ी सजा व भारी जुर्माना: संगठित पेपर लीक गिरोहों और दोषियों के लिए अधिकतम जेल की सजा को बढ़ाकर 10 साल तक और जुर्माने को 10 करोड़ रुपये तक करने का प्रावधान है।

  • 2 महीने में जांच पूरी: सीबीआई, एसआईटी या केंद्र सरकार द्वारा गठित विशेष टास्क को किसी भी पेपर लीक मामले की जांच अधिकतम 2 महीने के भीतर पूरी करनी होगी।

  • विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट: त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए राज्यों में स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित किए जाएंगे, जहां आरोप-पत्र दाखिल होने के 3 महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाना अनिवार्य होगा।

  • सर्विस प्रोवाइडर पर 8 साल का बैन: परीक्षा कराने वाली निजी एजेंसियों या सर्विस प्रोवाइडर्स की संलिप्तता पाए जाने पर जुर्माना बढ़ाकर ₹5 करोड़ तक और उन्हें सार्वजनिक परीक्षाओं से 8 साल के लिए प्रतिबंधित (Blacklist) करने का प्रस्ताव है। (पहले यह सीमा 4 साल थी)।

  • परीक्षा खर्च की वसूली व संपत्ति जब्ती: आरोपियों से परीक्षा में हुए नुकसान और दोबारा परीक्षा कराने का खर्च वसूला जाएगा तथा दोषियों की संपत्तियों को जब्त करने का कड़ा प्रावधान शामिल है।

क्यों लाया जा रहा है यह संशोधन?

हाल के दिनों में राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं  में सामने आई धांधली, ब्लूटूथ/डिजिटल साधनों के जरिए नकल और संगठित माफिया की गतिविधियों पर नकेल कसने के लिए यह बिल लाया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में देश के युवाओं और परीक्षार्थियों को आश्वस्त किया था कि परीक्षाओं में शुचिता से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और इसके लिए फास्ट-ट्रैक कानूनी ढांचा तैयार किया जा रहा है।

बेबाक24 टेक

2024 के मूल कानून के बावजूद जिस तरह से संगठित नकल माफिया ने तकनीक का फायदा उठाकर परीक्षाओं में सेंधमारी की, उसने अधिक दंडात्मक और समय-बद्ध व्यवस्था की जरूरत रेखांकित की थी। 2 महीने में जांच और 3 महीने में फास्ट-ट्रैक ट्रायल का कानूनी प्रावधान यदि सख्ती से लागू होता है, तो यह देश के करोड़ों युवा अभ्यर्थियों के विश्वास को बहाल करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।



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