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'अपने छात्रों से झूठ बोलने के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी को शर्म आनी चाहिए'— जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर डीयू के एडवाइजरी नोटिस पर भड़के कांग्रेस सांसद दीपेंदर हुड्डा

by on | 2026-07-24 21:42:38

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'अपने छात्रों से झूठ बोलने के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी को शर्म आनी चाहिए'— जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर डीयू के एडवाइजरी नोटिस पर भड़के कांग्रेस सांसद दीपेंदर हुड्डा

नई दिल्ली: नीट (NEET-UG) पेपर लीक मामले में दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले एक महीने से जारी छात्र आंदोलन के बीच दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) द्वारा जारी एक नए नोटिस पर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।

कांग्रेस नेता और रोहतक से राज्यसभा सांसद दीपेंदर हुड्डा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी द्वारा छात्रों को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल न होने की चेतावनी देने वाले बयान की तीखी आलोचना की है और डीयू प्रशासन पर झूठ बोलने का आरोप लगाया है।

'बेबाक24' की स्पेशल नेशनल रिपोर्ट:

1. दीपेंदर हुड्डा का हमला: "सुप्रीम कोर्ट के किस फैसले में ऐसा कहा गया?"

दीपेंदर हुड्डा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर डीयू के रुख को 'डराने वाला और भ्रामक' बताते हुए सवाल उठाया।

दीपेंदर हुड्डा (सांसद, कांग्रेस):

"दिल्ली विश्वविद्यालय का पूर्व छात्र और वर्तमान सांसद होने के नाते मैं दिल्ली यूनिवर्सिटी के इस भ्रामक और डराने वाले बयान की कड़ी निंदा करता हूं। सुप्रीम कोर्ट के किस फैसले में यह कहा गया है कि जंतर-मंतर पर होने वाले सभी प्रदर्शन और सभाएं पूरी तरह गैरकानूनी हैं, जैसा कि दिल्ली विश्वविद्यालय के बयान में दावा किया गया है? अपने स्टूडेंट्स से झूठ बोलने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय को शर्म आनी चाहिए।"

दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के नोटिस में क्या कहा गया था?

जंतर-मंतर पर जारी नीट-यूजी विरोध प्रदर्शनों के बीच दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों के लिए एक एडवाइजरी/निर्देश जारी किया था, जिसमें कहा गया:

  • प्रशासन का पक्ष: "आपकी सुरक्षा हमारे लिए सर्वोपरि है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाली कोई भी गैरकानूनी सभा या प्रदर्शन, जो भारत के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक सख्ती से रेगुलेटेड  है, कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकते हैं।"

  • भविष्य का हवाला: "ऐसी गतिविधियों में शामिल होने से छात्रों की व्यक्तिगत सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है। साथ ही, इससे उनकी पढ़ाई और भविष्य के पेशेवर अवसरों (करियर) पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसलिए सभी स्टूडेंट्स से आग्रह है कि वे जंतर-मंतर से दूर रहें।"

गरमाती राजनीति और छात्र आंदोलन

जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक, NTA में सुधार और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर छात्र और विभिन्न संगठन पिछले एक महीने से डटे हुए हैं। जहां हाल ही में सोनम वांगचुक का अनशन खत्म हुआ है, वहीं कॉकरोच जनता पार्टी और अन्य छात्र समूहों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। ऐसे में डीयू के इस रुख को विपक्ष छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने का प्रयास बता रहा है।

बेबाक24 टेक

विश्वविद्यालयों का काम छात्रों में लोकतांत्रिक चेतना और सवाल पूछने की संस्कृति को बढ़ावा देना होता है। सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार को विनियमित जरूर किया है, लेकिन उस पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया है। डीयू प्रशासन द्वारा "करियर और सुरक्षा के खतरे" का हवाला देकर छात्रों को प्रदर्शन से दूर रहने की हिदायत देना प्रशासनिक दबाव को दर्शाता है, जिससे आंदोलन थमने के बजाय और अधिक तूल पकड़ता नजर आ रहा है।



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