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काशी का मणिकर्णिका घाट बनेगा वर्ल्ड क्लास: न आस्था से समझौता, न विरासत पर आंच... देखिए भव्यता की 3D तस्वीरें!

by on | 2026-01-18 00:06:10

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काशी का मणिकर्णिका घाट बनेगा वर्ल्ड क्लास: न आस्था से समझौता, न विरासत पर आंच... देखिए भव्यता की 3D तस्वीरें!

वाराणसी। मोक्ष की नगरी काशी में अब विदाई का सफर भी गरिमापूर्ण और भव्य होगा। मणिकर्णिका घाट के कायाकल्प को लेकर प्रशासन ने जो 3D मास्टरप्लान जारी किया है, उसे देखकर विरोधियों के प्रोपेगेंडा की हवा निकल गई है। यह प्रोजेक्ट साबित करता है कि विकास का मतलब विनाश नहीं, बल्कि प्राचीनता को आधुनिकता के कवच के साथ सुरक्षित करना है।

रूपा फ़ाउंडेशन के हाथ में कमान, युद्धस्तर पर काम!

​उत्तर प्रदेश सरकार ने मणिकर्णिका घाट को संवारने का जिम्मा रूपा फ़ाउंडेशन को सौंपा है। प्रोजेक्ट के अलग-अलग चरणों (Phase-1, 2 और 4) में काम इतनी तेजी से चल रहा है कि आने वाले समय में यहाँ की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। प्रशासन का विजन साफ है—तय समय सीमा के अंदर काशी को एक ऐसा स्वरूप देना जो सदियों तक मिसाल बने।

38 चिता स्थल और 'इको-फ्रेंडली' विदाई

​धुएं और अव्यवस्था से अब मुक्ति मिलेगी। नए प्लान के तहत:

  • 38 आधुनिक चिता स्थलों का नवीनीकरण होगा।
  • ​प्रदूषण रोकने के लिए हाई-टेक चिमनियां लगाई जाएंगी।
  • ​दाह-संस्कार की प्रक्रिया को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाया जाएगा।

सिर्फ घाट नहीं, भावनाओं का भी सम्मान

​अक्सर देखा जाता है कि अंतिम संस्कार में आए बुजुर्गों और महिलाओं को बैठने की जगह नहीं मिलती। लेकिन अब:

  • व्यूइंग गैलरी और प्रतीक्षालय: शोकाकुल परिजनों के बैठने के लिए विशेष व्यवस्था।
  • एप्रोच रैम्प: बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए घाट तक पहुंचना होगा आसान।
  • महाकालेश्वर क्षेत्र का उद्धार: मंदिर के पास प्रार्थना और धार्मिक क्रियाओं के लिए एक शांत और पवित्र परिसर विकसित किया जाएगा।

अफवाहों पर 'विकास' का तमाचा

​सोशल मीडिया पर 'मूर्ति और मढ़ी' को लेकर जो भ्रम फैलाया जा रहा था, प्रशासन ने उसका जवाब काम से दिया है। साफ कर दिया गया है कि खुदाई में मिलने वाले हर प्राचीन अवशेष को नष्ट नहीं, बल्कि नए ढांचे में सम्मानपूर्वक पुनर्स्थापित किया जाएगा। लकड़ी ढुलाई के लिए अलग रास्ता और साफ पेयजल जैसी सुविधाएं इसे देश का सबसे आदर्श घाट बनाएंगी।

बेबाक टिप्पणी: विरासत को म्यूजियम में कैद करना आसान है, लेकिन उसे सजीव रखते हुए आधुनिक सुविधाओं से जोड़ना असली चुनौती है। मणिकर्णिका का यह 'कायाकल्प' उन लोगों के लिए जवाब है जो विकास और आस्था को एक-दूसरे का विरोधी मानते हैं।



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