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धान के ढेर पर किसान, भ्रष्टाचार की 'मिलर' से मिलीभगत! सपाईयों ने कलेक्ट्रेट घेरा

by on | 2026-01-16 18:05:30

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धान के ढेर पर किसान, भ्रष्टाचार की 'मिलर' से मिलीभगत! सपाईयों ने कलेक्ट्रेट घेरा

सोनभद्र। अन्नदाता सड़क पर है और सरकारी तंत्र फाइलों में 'टारगेट' पूरा कर जश्न मना रहा है! जिले में धान खरीद बंद होने से गुस्साए किसानों और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने आज कलेक्ट्रेट का घेराव कर सिस्टम की चूलें हिला दीं। ट्रैक्टर-ट्रालियों पर लदा धान और सपाईयों की नारेबाजी ने साफ कर दिया कि जिले में 'सब चंगा' नहीं है।

किसानों का हक मारकर मिलरों की चांदी?

​समाजवादी पार्टी के नेताओं ने जिला प्रशासन पर सीधा और गंभीर आरोप लगाया है। सपा का कहना है कि प्रशासन ने असली किसानों से धान खरीदने के बजाय मिलर संचालकों के साथ सांठगांठ कर ली है। आरोप है कि मिलरों के जरिए फर्जी कागजों पर खरीद दिखाकर सरकारी टारगेट तो पूरा कर लिया गया, लेकिन जो किसान कड़ाके की ठंड में हफ्तों से ट्रैक्टर लेकर केंद्रों पर खड़ा है, उसकी सुनने वाला कोई नहीं।

'दो आंखों' वाली सरकार पर बरसे सपाई

​सपा लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव विवेक सिंह पटेल और जिला सचिव प्रमोद यादव के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पर जमकर प्रदर्शन किया। नेताओं ने दो टूक कहा:

​"सरकार 'दो आंखों' से काम कर रही है। एक आंख मिलरों पर इनायत बरसा रही है और दूसरी आंख किसानों की बदहाली से मूंद ली गई है। धान खरीद बंद करना किसानों के पेट पर लात मारने जैसा है।"


प्रमुख मांगें और प्रदर्शन का सार:

  • तत्काल खरीद शुरू हो: बंद पड़े क्रय केंद्रों को फौरन खोलकर किसानों का एक-एक दाना खरीदा जाए।
  • भ्रष्टाचार की जांच: वर्ष 2025/26 की धान खरीद में मिलर संचालकों के साथ हुए कथित खेल की उच्च स्तरीय जांच हो।
  • आंदोलन की चेतावनी: सपा कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी है कि अगर अन्याय बंद नहीं हुआ, तो समाजवादी पार्टी सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगी।

बेबाक राय:

जब किसान का पसीना मिट्टी में मिलकर सोना उगाता है, तब बिचौलिए और भ्रष्ट तंत्र उस पर कुंडली मारकर बैठ जाते हैं। सोनभद्र का यह मंजर बता रहा है कि दावों और हकीकत के बीच की खाई बहुत गहरी है। क्या प्रशासन अपनी नींद तोड़ेगा या किसान यूं ही ट्रैक्टरों पर अपनी किस्मत लिए खड़ा रहेगा?



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