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बंद खदानों को लेकर डाला व्यापार मंडल अध्यक्ष ने खनन निदेशक को सौंपा ज्ञापन

by admin@bebak24.com on | 2025-12-14 21:48:43

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बंद खदानों को लेकर डाला व्यापार मंडल अध्यक्ष ने खनन निदेशक को सौंपा ज्ञापन


​बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र की 37 खदानों पर लगा है प्रतिबंध; 10 हजार मजदूर हुए बेरोजगार, 300 क्रशर प्लांट ठप

डाला/ सोनभद्र। बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र में दुर्घटना के बाद बंद पड़ी खदानों को सुरक्षित रूप से तत्काल चालू करवाने की माँग को लेकर डाला उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के अध्यक्ष मुकेश जैन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने खनन निदेशक को ज्ञापन सौंपा है। अध्यक्ष मुकेश जैन, संतोष शर्मा, रामू सिंह गोंड, सुधीर सिंह और संजय मित्तल ने ज्ञापन की प्रति देते हुए क्षेत्र की भयावह स्थिति से अवगत कराया।

हादसे के बाद बिना जाँच 37 खदानें बंद

​व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों ने बताया कि बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र की एक खदान में हुए हादसे के बाद बिना उचित जाँच-पड़ताल किए ही डीजीएमएस (Directorate General of Mines Safety) द्वारा क्षेत्र की 37 खदानों के खनन और परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस प्रतिबंध के कारण खनन कार्य से सीधे तौर पर जुड़े 10 हजार मजदूर अचानक बेरोजगार हो गए हैं। इन मजदूरों पर आश्रित लगभग 30 हजार परिवारों के सामने अब रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

​"ये दैनिक मजदूरी करने वाले मजदूर जाड़ा, गर्मी और बरसात के दिनों में भी खदानों में काम कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। अब इनके सामने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है।"

— मुकेश जैन, अध्यक्ष, डाला उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल


उद्योग पर छा गया 'सियापा'

​खनन बंद होने से पूरे इलाके के उद्योग-धंधे ठप पड़ गए हैं। प्रतिनिधियों ने बताया कि:

  • परिवहन ठप: पत्थर ढोने के काम में लगे दो हजार से अधिक टीपर, पाँच सौ कम्प्रेशर मशीन, और सैकड़ों पोकलैन मशीनों का संचालन पूरी तरह से रुक गया है।
  • क्रशर प्लांट बंद: पत्थर खदानों पर पूरी तरह से निर्भर 300 क्रशर प्लांटों का संचालन ठप हो गया है।
  • उत्पादन प्रभावित: डाला स्टोन के नाम से दुनिया भर में मशहूर गिट्टी का उत्पादन पूरी तरह से ठप है।
  • लघु व्यापार प्रभावित: खनन उद्योग पर निर्भर डाला, ओबरा एवं चोपन में संचालित चाय-पान, ठेला-खोमचा, पंचर, सैलून आदि दुकानों पर भी 'सियापा छा गया है'

राजस्व का नुकसान और पलायन का खतरा

​व्यापार मंडल ने चेताया कि यदि हालात ऐसे ही रहे तो बेरोजगार मजदूरों और उन पर आश्रित परिवारों के सामने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो रही है। मजबूरन दैनिक मजदूरों को रोजी-रोटी की तलाश में गैर-प्रदेशों की ओर पलायन करना पड़ेगा।

​उन्होंने सरकार को प्रदेश की अर्थव्यवस्था का भी हवाला दिया। ज्ञापन में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश की एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में यह खनन उद्योग हर माह 13 करोड़ रुपये राजस्व के रूप में भागीदारी निभाता है।

​प्रतिनिधिमंडल ने खनन निदेशक से अपील की है कि पाँच दशकों से संचालित इस उद्योग को पुनः चालू किया जाए, ताकि दैनिक मजदूरों का जीवन सुखमय हो सके और गिट्टी उद्योग फिर से पटरी पर आ सके।



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