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16 साल पुराने उमेश चौधरी हत्याकांड: नक्सली संरक्षणकर्ता संत कुमार चेरो को उम्रकैद, 3 नक्सली बरी

by admin@bebak24.com on | 2025-12-10 22:30:20

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16 साल पुराने उमेश चौधरी हत्याकांड: नक्सली संरक्षणकर्ता संत कुमार चेरो को उम्रकैद, 3 नक्सली बरी


₹20 हजार का अर्थदंड; न देने पर 4 माह की अतिरिक्त जेल

सोनभद्र: करीब साढ़े 16 वर्ष पूर्व हुए उमेश चौधरी हत्याकांड मामले में बुधवार को अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम जितेंद्र कुमार द्विवेदी की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने नक्सली संरक्षणकर्ता संत कुमार चेरो को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है। कोर्ट ने उस पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड जमा न करने की स्थिति में दोषी को 4 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।

​वहीं, मामले में नामजद तीन अन्य नक्सली आरोपी अनिल ठाकुर, लालब्रत कोल और मुन्ना विश्वकर्मा को साक्ष्य के अभाव में अदालत ने दोषमुक्त करार दिया है।

क्या था मामला?

​अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 24 जनवरी 2009 की है। दीनानाथ चौधरी (निवासी कन्हौरा, थाना चोपन) ने 25 जनवरी 2009 को थाने में तहरीर दी थी। उन्होंने बताया था कि शाम करीब 7 बजे संत कुमार चेरो और उसका भाई बाबा चेरो उनकी परचून की दुकान पर आए थे। पत्नी चंचला को 50 रुपये बकाया देने के बाद, वे फिर से उधार सामान मांगने लगे। पत्नी के मना करने पर वे जबरन कुर्सी उठाकर ले जाने लगे।

​दीनानाथ के बेटे उमेश चौधरी ने जब उन्हें रोका और मारपीट कर कुर्सी छुड़ा ली, तो दोनों भाग गए।

​करीब एक घंटे बाद, रात 8 बजे दोनों आरोपी वापस आए और उमेश चौधरी को बुलाकर कुछ दूर ले गए। वहीं ले जाकर उमेश को गोली मार दी गई। गोली की आवाज़ सुनकर जब परिजन मौके पर जाने लगे, तो संत कुमार चेरो की मां ने उन्हें रोक दिया। बाद में जब लोग मौके पर पहुंचे, तो उमेश चौधरी का शव पड़ा था।

विवेचना और चार्जशीट

​पुलिस ने तहरीर के आधार पर एफआईआर दर्ज कर विवेचना शुरू की। विवेचना के दौरान विवेचक ने पर्याप्त सबूत मिलने पर नक्सली संरक्षणकर्ता संत कुमार चेरो, उसके भाई बाबा, नक्सली अनिल ठाकुर, लालब्रत कोल और मुन्ना विश्वकर्मा के विरुद्ध कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। आरोपी बाबा चेरो के गायब होने के चलते उसकी पत्रावली अलग कर दी गई थी।

कोर्ट ने 8 गवाहों के बयान सुने

​मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुना। इसके अतिरिक्त, अदालत ने 8 गवाहों के बयान और पत्रावली का अवलोकन किया। साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने संत कुमार चेरो को दोषी पाया और आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई। उसकी जेल में बिताई अवधि सजा में समाहित की जाएगी। अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील विनोद कुमार पाठक ने बहस की।



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