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2,200 किमी की फरारी, 10 दिन पुलिस को देती रही चकमा; अजनबियों के इंटरनेट से पकड़ी गई श्रद्धा दुबे

by on | 2026-10-22 12:19:52

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2,200 किमी की फरारी, 10 दिन पुलिस को देती रही चकमा; अजनबियों के इंटरनेट से पकड़ी गई श्रद्धा दुबे

लखनऊ | बेबाक24 न्यूज़

शिवा शर्मा हत्याकांड की मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे ने गिरफ्तारी से बचने के लिए करीब 10 दिनों तक पुलिस को छकाया। अपनी बहन रश्मि और चालक दानिश के साथ उसने लगभग 2,200 किलोमीटर का सफर किया। इस दौरान वह कई शहरों में ठहरी, नेपाल तक पहुंची और पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए। मोबाइल से सिम निकालकर सामान्य कॉल बंद कर दी, लेकिन इंटरनेट इस्तेमाल करने की उसकी रणनीति आखिरकार पुलिस के लिए सुराग बन गई।

पुलिस के मुताबिक, श्रद्धा और उसके साथियों ने अपने मोबाइल पर सामान्य कॉल नहीं की। वे फेसटाइम और व्हाट्सएप के जरिए संपर्क करते थे और जहां मौका मिलता, वहां किसी दूसरे व्यक्ति के फोन या इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल कर लेते थे। लेकिन नागपुर जाते समय टैक्सी चालक के मोबाइल से इंटरनेट कनेक्शन जुड़ने के बाद पुलिस उनकी लोकेशन तक पहुंचने में सफल रही।

सिम निकाले, फिर भी इंटरनेट से मिला सुराग

फरार होने के बाद श्रद्धा, उसकी बहन रश्मि और चालक दानिश ने अपने मोबाइल से सिम कार्ड निकाल दिए थे। इससे पुलिस के लिए सामान्य मोबाइल लोकेशन के जरिए उनका पता लगाना मुश्किल हो गया।

हालांकि, कुछ समय के अंतराल पर उनके मोबाइल में इंटरनेट सक्रिय होने की जानकारी सामने आई। पुलिस ने आईपी एड्रेस और इंटरनेट कनेक्शन के आधार पर उनकी तलाश शुरू की, लेकिन शुरुआत में कामयाबी नहीं मिली।

श्रद्धा और उसके साथी रिक्शा, ई-रिक्शा, टैक्सी तथा कैब में सफर करते हुए अलग-अलग लोगों के इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल कर रहे थे। पुलिस जब किसी कनेक्शन के आधार पर संबंधित जगह पहुंचती, तब तक आरोपी वहां से निकल चुके होते थे।

नागपुर जाने वाली टैक्सी बनी गिरफ्तारी की वजह

पुलिस के अनुसार, श्रद्धा ने लखनऊ से नागपुर जाने के लिए टैक्सी बुक की थी। इस दौरान उसके मोबाइल का कनेक्शन टैक्सी चालक के फोन के इंटरनेट से जुड़ा। कुछ-कुछ अंतराल पर कनेक्शन सक्रिय होने और बंद होने की जानकारी पुलिस को मिली।

इसी सुराग के आधार पर पुलिस ने संबंधित मार्ग पर तलाश तेज की। कानपुर के बाद आरोपियों की लोकेशन फतेहपुर क्षेत्र में मिली। इसके बाद पुलिस और एसटीएफ की टीमें उनकी गतिविधियों का पता लगाते हुए नागपुर पहुंचीं।

जब टैक्सी चालक आरोपियों को छोड़कर वापस निकला, तब लखनऊ पुलिस से मिले इनपुट के आधार पर नागपुर पुलिस ने उसे पकड़ लिया। बाद में उसी चालक की मदद से पुलिस श्रद्धा के ठिकाने तक पहुंची और श्रद्धा, रश्मि तथा दानिश को गिरफ्तार कर लिया।

9 अक्टूबर को शिवा शर्मा की मौत के बाद हुई थी फरारी

मामले के अनुसार, 9 अक्टूबर को लखनऊ के हजरतगंज क्षेत्र में बालू अड्डा स्थित अवध ग्रीन अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से गिरने के बाद कारोबारी शिवा शर्मा की मौत हो गई थी।

शिवा की मां रंजना शर्मा की शिकायत पर 10 अक्टूबर को हजरतगंज थाने में श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि, चालक तनवीर अली उर्फ दानिश, आदिल और अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

शिकायत में हत्या का आरोप लगाया गया था। मामले में आरोपियों की भूमिका और घटना की परिस्थितियों की जांच पुलिस कर रही है।

लखनऊ से नेपाल तक पहुंची, फिर वापस लौटी

पुलिस की पड़ताल के अनुसार, घटना के बाद श्रद्धा अपनी बहन और चालक के साथ लखनऊ से सीतापुर और महमूदाबाद होते हुए बहराइच के रुपईडीहा पहुंची। इसके बाद उसके नेपाल जाने की जानकारी सामने आई। वह नेपाल के बुटवल में एक होटल में ठहरी थी।

पुलिस को उसके नेपाल में होने की सूचना मिली, लेकिन टीम वहां पहुंचने तक आरोपी हाथ नहीं आए। रिपोर्ट के अनुसार, 16 अक्टूबर को तीनों नेपाल से वापस भारत लौटे।

वापसी के दौरान उन्होंने महराजगंज के भगवानपुर सीमा क्षेत्र के रास्ते भारत में प्रवेश किया। पहचान छिपाने के लिए श्रद्धा ने बुर्का पहना और अपने सामान में भी बदलाव किया। इसके बाद वह किराये की गाड़ी से रायबरेली की ओर रवाना हुई।

आगरा में ठहरने के बाद लखनऊ में दिया बयान

नेपाल से लौटने के बाद आरोपियों ने रायबरेली में कुछ समय बिताया। वहां होटल में ठहरने की व्यवस्था नहीं हो पाने के बाद वे टैक्सी से आगरा पहुंचे और एक होटल में रुके। होटल के सीसीटीवी फुटेज भी सामने आए थे।

इसके बाद 18 अक्टूबर को श्रद्धा लखनऊ लौटी और विभूतिखंड क्षेत्र में एक समाचार एजेंसी को बयान दिया। जब उसका वीडियो मीडिया में आया, तब पुलिस पर उसकी गिरफ्तारी को लेकर दबाव और बढ़ गया।

श्रद्धा ने अपने बयान में शिवा की मौत को आत्महत्या बताया था और खुद को निर्दोष कहा था। हालांकि, पुलिस मामले में दर्ज आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही थी।

कानपुर में बदली टैक्सी, फिर नागपुर पहुंची

लखनऊ से नागपुर जाते समय श्रद्धा ने पहले एक टैक्सी बुक की थी। रिपोर्ट के अनुसार, वाहन की गति सीमित होने के कारण उसने कानपुर में गाड़ी बदल दी और दूसरी अर्टिगा बुक की।

इसके बाद आरोपियों ने फतेहपुर और अन्य शहरों से होते हुए नागपुर का सफर किया। उन्हें लगा कि वहां पहुंचकर वे पुलिस की पहुंच से दूर हो जाएंगे, लेकिन टैक्सी चालक के मोबाइल इंटरनेट से मिले सुराग ने उनकी योजना पर पानी फेर दिया।

गिरफ्तारी से पहले कई ठिकाने बदले

रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस कई बार आरोपियों के ठिकानों तक पहुंचने में कुछ घंटे पीछे रह गई। जिन स्थानों पर श्रद्धा और उसके साथी रुके थे, वहां से वे पुलिस के पहुंचने से पहले निकल चुके थे।

13 अक्टूबर को तीनों आरोपियों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। बाद में इनाम की राशि बढ़ाकर 50-50 हजार रुपये कर दी गई। 17 अक्टूबर को उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए।

20 अक्टूबर को लखनऊ पुलिस और उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने संयुक्त कार्रवाई में नागपुर से श्रद्धा, रश्मि और दानिश को गिरफ्तार किया। अगले दिन उन्हें नागपुर की अदालत में पेश किया गया। ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद पुलिस उन्हें लखनऊ लेकर रवाना हुई। इसी मामले में नामजद आरोपी आदिल को भी एसटीएफ ने गिरफ्तार किया।

बेबाक24 टेक

श्रद्धा दुबे की फरारी के दौरान सिम कार्ड हटाना, इंटरनेट कनेक्शन बदलना, अलग-अलग वाहनों से सफर करना और कई शहरों में ठिकाने बदलना पुलिस के लिए चुनौती बना। लेकिन नागपुर जाते समय टैक्सी चालक के मोबाइल इंटरनेट से जुड़े सुराग ने जांच को आगे बढ़ाया। शिवा शर्मा की मौत के मामले में आरोपियों की भूमिका और घटना की वास्तविक परिस्थितियां अब जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया में स्पष्ट होंगी।



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