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यूएन की रिपोर्ट पर भारत की कड़ी आपत्ति, बोला- दाऊद 2003 से पहले ही छोड़ चुका था देश

by on | 2026-10-22 12:19:25

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यूएन की रिपोर्ट पर भारत की कड़ी आपत्ति, बोला- दाऊद 2003 से पहले ही छोड़ चुका था देश

न्यूयॉर्क | बेबाक24 न्यूज़

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने आतंकवाद-विरोधी रिपोर्ट में कथित तथ्यात्मक गलतियों और पक्षपात को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। भारतीय राजनयिक रघु पुरी ने कहा कि रिपोर्ट में दाऊद इब्राहिम से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों का उल्लेख नहीं किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि दाऊद 2003 में संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में शामिल किए जाने से काफी पहले भारत छोड़ चुका था और वह आज भी भारत में वांछित अपराधी है।

भारत ने यह भी कहा कि मानवाधिकारों के ढांचे का इस्तेमाल आतंकवाद और कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वालों के बचाव के लिए नहीं किया जा सकता। इस दौरान भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान की ओर से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर की गई टिप्पणियों को भी खारिज किया।

दाऊद इब्राहिम पर भारत ने क्या कहा?

संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक बेन सॉल की रिपोर्ट में दाऊद इब्राहिम को भारत केंद्रित डी-कंपनी आपराधिक गिरोह का प्रमुख बताया गया था, जिसके आतंकवादी संगठनों से संबंध होने का उल्लेख किया गया।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए रघु पुरी ने कहा कि रिपोर्ट में 2003 में दाऊद को संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में शामिल किए जाने का जिक्र तो किया गया, लेकिन उसके भारत में वांछित होने और देश छोड़ने से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को पर्याप्त रूप से सामने नहीं रखा गया।

पुरी के अनुसार, दाऊद इब्राहिम 1993 के मुंबई बम धमाकों समेत भारत में हुए आतंकवादी हमलों के मामलों में वांछित है। उन्होंने कहा कि दाऊद को 2003 में सूचीबद्ध किए जाने से पहले ही भारत छोड़ना पड़ा था। भारत ने उसकी पाकिस्तान में मौजूदगी को लेकर भी संयुक्त राष्ट्र के रिकॉर्ड का हवाला दिया।

रिपोर्ट में तथ्यात्मक गलतियों का आरोप

भारतीय राजनयिक ने रिपोर्ट की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदकों से उच्च स्तर की तथ्यात्मक सटीकता और जिम्मेदारी की अपेक्षा की जाती है।

उन्होंने चिंता जताई कि गलत या अधूरी जानकारी वाली रिपोर्ट से सदस्य देशों के सामने किसी मामले की भ्रामक तस्वीर बन सकती है। उनके अनुसार, ऐसी चूक संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकती है।

भारत ने रिपोर्ट तैयार करने वाले अधिकारियों से आतंकवाद से जुड़े मामलों में तथ्यों को पूर्ण संदर्भ के साथ प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

मानवाधिकारों के नाम पर आतंकवाद का बचाव नहीं

भारत ने अपने वक्तव्य में कहा कि मानवाधिकारों का ढांचा आतंकवाद फैलाने वालों, कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वालों या चरमपंथी गतिविधियों में शामिल लोगों के लिए बचाव का माध्यम नहीं बनना चाहिए।

पुरी ने कहा कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। भारत का तर्क था कि आतंकवाद-विरोधी प्रयासों में मानवाधिकारों का सम्मान महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका अर्थ आतंकवादी गतिविधियों को संरक्षण देना नहीं होना चाहिए।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर पाकिस्तान को जवाब

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के प्रतिनिधि की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए पुरी ने उन्हें भारत के खिलाफ दुष्प्रचार बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी टिप्पणियों का उद्देश्य संकीर्ण राजनीतिक लाभ हासिल करना है।

भारतीय राजनयिक ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग हैं और रहेंगे। उन्होंने पाकिस्तान की टिप्पणियों को अधिक महत्व देने से भी इनकार किया।

बेबाक24 टेक

संयुक्त राष्ट्र में भारत की आपत्ति के दो प्रमुख पहलू रहे—दाऊद इब्राहिम से जुड़े तथ्यों को पर्याप्त संदर्भ में प्रस्तुत करने की मांग और आतंकवाद के मामलों में मानवाधिकारों के दुरुपयोग का विरोध। भारत ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर अपने रुख को भी दोहराया। रिपोर्ट को लेकर उठे सवालों पर संयुक्त राष्ट्र की संबंधित प्रक्रिया और उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेज आगे महत्वपूर्ण रहेंगे।



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