by on | 2026-10-22 12:19:20
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दोहा/पेरिस | बेबाक24 न्यूज़
फ्रांस में हिंसा और लूटपाट की घटनाओं के बाद राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की टिप्पणियों पर नाराजगी जताई है। मैक्रों ने आरोप लगाया कि कुछ विदेशी नेता फ्रांस के हालात का इस्तेमाल अपने राजनीतिक अभियान को आगे बढ़ाने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से बनाई गई भ्रामक तस्वीरों और गलत सूचनाओं के प्रसार पर भी चिंता जताई।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब फ्रांस के कई इलाकों में प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और लूटपाट की घटनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है।
कतर की राजधानी दोहा में बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान मैक्रों ने कहा कि कुछ नेता फ्रांस की कीमत पर अपना राजनीतिक अभियान चला रहे हैं। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कहा कि अटलांटिक के दोनों ओर के नेता फ्रांस की घटनाओं को अपने राजनीतिक उद्देश्यों से जोड़ रहे हैं।
जब एक पत्रकार ने पूछा कि क्या उनकी टिप्पणी ट्रंप के लिए थी, तो मैक्रों ने हां में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि फ्रांस में हुई घटनाओं के पीछे विदेशी हस्तक्षेप के स्पष्ट संकेत नहीं हैं, लेकिन घटनाओं के बाद गलत सूचना फैलाने के लिए विदेशी स्तर पर हेरफेर किए जाने के आरोप हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को फ्रांस में जारी प्रदर्शनों और हिंसा को आव्रजन से जोड़ते हुए मैक्रों की आलोचना की थी। उन्होंने दावा किया कि फ्रांस की सीमाओं को बंद नहीं करने के कारण वहां हालात बिगड़ रहे हैं।
ट्रंप ने यह भी कहा कि फ्रांस में हो रही घटनाएं स्कूलों या अन्य समस्याओं से नहीं, बल्कि आव्रजन से जुड़ी हैं। उन्होंने फ्रांस की स्थिति का उल्लेख करते हुए अमेरिकी मतदाताओं को भी राजनीतिक संदेश दिया और इसे अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी की संभावित जीत से जोड़ने की कोशिश की।
हालांकि, आव्रजन को हिंसा का मुख्य कारण बताने वाले उनके दावे के समर्थन में इस रिपोर्ट में स्वतंत्र प्रमाण नहीं दिए गए हैं।
मैक्रों ने आरोप लगाया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार की गई कुछ तस्वीरों में फ्रांस में ऐसी घटनाएं दिखाई गईं, जो वास्तव में हुई ही नहीं थीं। उनके मुताबिक, इन तस्वीरों और भ्रामक दावों के जरिए फ्रांस में प्रवासियों तथा इस्लामवादियों की कथित भारी भीड़ को लेकर गलत धारणा बनाने की कोशिश की गई।
मैक्रों ने ऐसी सामग्री और उसके आधार पर की गई टिप्पणियों को गैर-जिम्मेदाराना बताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा विवाद यह भी दिखाता है कि फ्रांस के बारे में टिप्पणी करने वाले कुछ लोग देश के प्रति किस तरह का रुख रखते हैं।
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मंगलवार को फ्रांस की स्थिति को ‘चरमपंथी इस्लाम का आक्रमण’ बताया। फ्रेंच भाषा के समाचार चैनल आई24न्यूज को दिए साक्षात्कार में उन्होंने फ्रांसीसी अधिकारियों पर हालात का समय रहते आकलन नहीं करने का आरोप लगाया।
नेतन्याहू ने फ्रांस को चरमपंथ के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और तुष्टीकरण से बचने की सलाह दी। उनके बयान के बाद फ्रांस में हिंसा को लेकर आव्रजन, धार्मिक चरमपंथ और सरकारी नीतियों पर अंतरराष्ट्रीय बहस तेज हो गई है।
सप्ताहांत में फ्रांस के कई इलाकों में प्रदर्शन हुए। अधिकांश मार्च शांतिपूर्ण रहे, लेकिन शनिवार को कुछ स्थानों पर लूटपाट और सुरक्षा बलों के साथ झड़पों की घटनाएं सामने आईं। इसके बाद प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ाई और कुछ क्षेत्रों में कर्फ्यू लागू किया।
बोर्दो शहर में अकेले बाहर निकलने वाले नाबालिगों के लिए एक सप्ताह का रात का कर्फ्यू घोषित किया गया। गिरोंद और नोवेल-अकितेन की प्रीफेक्ट सोफी ब्रोका के आदेश के अनुसार, 18 वर्ष से कम उम्र के नाबालिग 26 अक्टूबर की सुबह तक रात 10 बजे से सुबह 7 बजे के बीच माता-पिता या कानूनी अभिभावक के बिना सार्वजनिक स्थानों पर नहीं रह सकेंगे।
फ्रांस की हिंसा को लेकर मैक्रों, ट्रंप और नेतन्याहू के बयानों ने सुरक्षा, आव्रजन और राजनीतिक बयानबाजी पर अंतरराष्ट्रीय विवाद खड़ा कर दिया है। जहां ट्रंप ने आव्रजन और नेतन्याहू ने धार्मिक चरमपंथ को केंद्र में रखा, वहीं मैक्रों ने विदेशी नेताओं पर फ्रांस की स्थिति का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। इन दावों और घटनाओं के बीच अंतर समझना जरूरी है; हिंसा के कारणों का आकलन पुष्ट तथ्यों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
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