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सोनभद्र खनन हादसा: 37 खदानों पर DGMS का ताला, सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर कड़ा एक्शन

by admin@bebak24.com on | 2025-12-07 18:51:38

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सोनभद्र खनन हादसा: 37 खदानों पर DGMS का ताला, सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर कड़ा एक्शन

अजय सिंह

​सोनभद्र । बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र में हाल ही में हुए भीषण खनन हादसे के बाद प्रशासन और खनन निदेशालय (DGMS) ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए बड़ी कार्रवाई की है। इस दर्दनाक घटना में सात मजदूरों की मौत हो गई थी, जिसके बाद खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS), वाराणसी ने क्षेत्र की 37 पत्थर खदानों में खनन कार्य पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का आदेश जारी किया है। यह कदम सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी और अवैध खनन की शिकायतों के बाद उठाया गया है, जिसने एक बार फिर खनन क्षेत्र में व्याप्त अव्यवस्था को उजागर कर दिया है।

DGMS के आदेश और कार्रवाई का कारण

​खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS), वाराणसी ने जिला प्रशासन को पत्र भेजकर चिह्नित 37 खदानों में खनन कार्य और खान से बाहर खनिज के परिवहन को पूर्ण रूप से बंद करने को कहा है। यह रोक तब तक लागू रहेगी जब तक कि ये खदानें सुरक्षा के सभी अनिवार्य मानकों को सुनिश्चित नहीं कर लेतीं।

​इस कड़े कदम को उठाने का मुख्य कारण 15 नवंबर को ओबरा के बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र में कृष्णा माइनिंग वर्क्स की खदान में हुई दुर्घटना है, जहां पत्थर धंसने से सात श्रमिकों की दर्दनाक मौत हो गई थी।

​हादसे के बाद हुई जांच में यह पाया गया कि खदानों में सुरक्षा के उपायों को दरकिनार किया गया था और वर्षों से नियमों के विपरीत अवैध खनन हो रहा था। इस तरह के हादसे वास्तव में खनन क्षेत्र में होने वाले जन संहार से कम नहीं होते, जहां गरीब मजदूर अपनी जान जोखिम में डालकर काम करते हैं और मानकों की अनदेखी के चलते असमय काल के गाल में समा जाते हैं।

​मानक के विपरीत खनन करने वालों पर कार्रवाई

​इस हादसे के बाद शासन स्तर से भी त्वरित कार्रवाई की गई है। शुरुआती जांच के आधार पर, एक खनन सर्वेयर और एक इंस्पेक्टर का सोनभद्र से तबादला कर दिया गया है। इसके अलावा, हादसे के लिए जिम्मेदार पाए गए लोगों पर गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है।

​खदान के पट्टाधारक (मधुसूदन सिंह और दिलीप केसरी) और मालिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

​विवेचना के दौरान माइंस मैनेजर और तीन पेटीदारों के खिलाफ भी मामला दर्ज कर कुछ गिरफ्तारियां की गई हैं।

​यह कार्रवाई दर्शाती है कि मानक के विपरीत और लापरवाही भरा खनन करने वालों पर अब कानूनी शिकंजा कसना शुरू हो गया है। विपक्ष और मजदूर संगठनों ने भी दोषी अधिकारियों और खनन माफिया के गठजोड़ पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।

​71 में से 37 खदानें ही क्यों बंद?

​सोनभद्र के बिल्ली मारकुंडी क्षेत्र में कुल 71 खदानें हैं, लेकिन केवल 37 खदानों पर रोक लगाई गई है। यह एक बड़ा सवाल है। सूत्रों के मुताबिक, ये 37 खदानें वे हैं जहाँ सुरक्षा नियमों का उल्लंघन सबसे अधिक पाया गया है या जहां हादसे की आशंका अधिक थी। DGMS के आदेश में स्पष्ट है कि ये खदानें सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर रही थीं। बाकी 34 खदानों में हो सकता है कि सुरक्षा के कुछ मानक पूरे हों या DGMS ने फिलहाल उन्हें जांच के दायरे से बाहर रखा हो।

​हालांकि, उद्योग जगत (क्रशर मशीनों के संचालकों) ने 37 खदानों के बंद होने से बेरोजगारी और आर्थिक तंगी बढ़ने की चिंता जाहिर करते हुए प्रशासन से सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करते हुए इन्हें जल्द से जल्द चालू कराने का अनुरोध किया है।

​यह दुर्घटना सोनभद्र के खनन क्षेत्र में अवैध खनन नेटवर्क और सिस्टम की विफलता का प्रमाण है, जहां खनन माफिया और विभाग की कथित चुप्पी के चलते मजदूरों की जान खतरे में रहती है। अब देखना यह होगा कि यह कार्रवाई केवल कुछ दिन का दिखावा है या इससे वास्तव में खनन क्षेत्र में सुरक्षा और मानकों का पालन सुनिश्चित होता है।



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