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नदेसर गोलीकांड मामले में बड़ा फैसला: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने धनंजय सिंह की अपील खारिज की — गैंगस्टर एक्ट में ‘पीड़ित’ की परिभाषा पर अहम टिप्पणी

by admin@bebak24.com on | 2025-12-06 23:19:12

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नदेसर गोलीकांड मामले में बड़ा फैसला: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने धनंजय सिंह की अपील खारिज की — गैंगस्टर एक्ट में ‘पीड़ित’ की परिभाषा पर अहम टिप्पणी


प्रयागराज । ​इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वाराणसी के चर्चित 2002 के नदेसर टकसाल गोलीकांड मामले में पूर्व सांसद धनंजय सिंह को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के तहत दायर चार आरोपियों के खिलाफ उनकी अपील खारिज कर दी है।

​कोर्ट ने कहा कि गैंगस्टर एक्ट के तहत अपराध को राज्य और समाज के विरुद्ध माना जाता है, इसलिए ऐसे मामलों में व्यक्तिगत शिकायतकर्ता को अपील दायर करने का अधिकार नहीं है। न्यायमूर्ति लक्ष्मीकांत शुक्ला की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि असामाजिक गतिविधियों पर रोक लगाना राज्य का अधिकार और दायित्व है, इसलिए किसी को भी इस क्षेत्र में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं मिल सकता।

​मामले की पृष्ठभूमि

​4 अक्टूबर 2002 को वाराणसी के नदेसर इलाके में तत्कालीन विधायक धनंजय सिंह के वाहन पर अंधाधुंध फायरिंग की गई थी, जिससे कई लोग घायल हो गए थे। पुलिस ने इस मामले में कई आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट लगाते हुए कार्रवाई की थी।

​ट्रायल कोर्ट का फैसला

​वाराणसी के विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) ने 29 अगस्त 2025 को गवाहों की अनुपस्थिति में चार आरोपियों को बरी कर दिया था। इसी आदेश को धनंजय सिंह ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

​हाई कोर्ट में बहस और निर्णय

​धनंजय सिंह का तर्क था कि वह शिकायतकर्ता और घायल दोनों हैं, इसलिए उन्हें "पीड़ित" मानते हुए अपील का अधिकार मिलना चाहिए। हालांकि, राज्य ने कहा कि गैंगस्टर एक्ट का अपराध राज्य के विरुद्ध है, न कि किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध।

​कोर्ट ने राज्य के तर्क को मानते हुए कहा कि अपीलकर्ता इस मामले में 'पीड़ित' की कानूनी परिभाषा के दायरे में नहीं आते हैं, और इसलिए अपील पोषणीय (Unnourished) नहीं है।

​आगे की राह

​इस फैसले के बाद धनंजय सिंह अब सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर कर सकते हैं। यह फैसला गैंगस्टर एक्ट में "पीड़ित" की परिभाषा और राज्य के क्षेत्राधिकार के संबंध में एक महत्वपूर्ण न्यायिक टिप्पणी माना जा रहा है।



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