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किम जोंग उन से मिलने को उत्सुक ट्रंप, हूतियों पर सैन्य कार्रवाई के संकेत

by on | 2026-10-13 13:56:04

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किम जोंग उन से मिलने को उत्सुक ट्रंप, हूतियों पर सैन्य कार्रवाई के संकेत

वॉशिंगटन | बेबाक24 न्यूज़

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नवंबर में चीन के शेनझेन में होने वाली एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) बैठक के दौरान उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन से मुलाकात की संभावना जताई है। ट्रंप ने कहा कि दोनों के बीच अच्छे संबंध हैं और मुलाकात दिलचस्प होगी। दूसरी ओर, सऊदी अरब के हवाई अड्डों पर हूती विद्रोहियों के हमलों को लेकर उन्होंने नाराजगी जताई और सऊदी अरब के साथ मिलकर संभावित सैन्य कार्रवाई पर विचार करने की बात कही।

नवंबर में हो सकती है मुलाकात

ट्रंप ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि नवंबर के मध्य में एशिया दौरे के दौरान उनकी किम जोंग उन से मुलाकात हो सकती है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उत्तर कोरिया के साथ इस संबंध में कोई औपचारिक बातचीत हुई है या नहीं।

ट्रंप 18 और 19 नवंबर को शेनझेन में होने वाली एपेक नेताओं की बैठक में शामिल होने चीन जाएंगे। अपने पहले कार्यकाल में वह किम जोंग उन से 3 बार मुलाकात कर चुके हैं।

दक्षिण कोरिया के साथ सैन्य अभ्यास में कटौती

ट्रंप ने अगस्त में अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों की अवधि घटाने का निर्देश दिया था। उन्होंने इसकी वजह अभ्यासों पर होने वाले खर्च और किम जोंग उन के साथ अपने अच्छे संबंधों को बताया था।

इसके बाद वार्षिक ‘उलची फ्रीडम शील्ड’ सैन्य अभ्यास की अवधि 11 दिन से घटाकर 5 दिन कर दी गई। इस अभ्यास में संभावित सैन्य परिस्थितियों से निपटने के लिए कमान केंद्रों पर सिमुलेशन और मैदानी प्रशिक्षण शामिल होते हैं। इस कदम को उत्तर कोरिया के साथ तनाव कम करने की कोशिश के रूप में देखा गया।

सऊदी अरब पर हमलों से नाराज ट्रंप

ट्रंप ने यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब पर किए जा रहे हमलों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि हूती गलत कदम उठा रहे हैं। उनसे जब पूछा गया कि क्या इन घटनाओं का अमेरिकी मध्यावधि चुनावों पर असर पड़ सकता है, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसका अंदाजा नहीं है और वह अपने फैसलों में चुनावी गणित को प्राथमिकता नहीं देते।

ईरान पर भी सख्त रुख दोहराते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होगा। इससे पहले उन्होंने संकेत दिया था कि अमेरिका हूती विद्रोहियों के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई में सऊदी अरब का साथ देने पर विचार कर सकता है।

मिसाइलें रोकने का सऊदी गठबंधन का दावा

सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने दावा किया कि हूती विद्रोहियों की ओर से खामिस मुशैत एयरबेस की दिशा में दागी गईं 2 बैलिस्टिक मिसाइलों को बीच रास्ते में रोककर नष्ट कर दिया गया। गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मालिकी ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया मंच एक्स पर दी।

दूसरी ओर, हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने दावा किया कि उनके लड़ाकों ने रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया और खामिस मुशैत एयरबेस को ड्रोन से निशाना बनाया। हूतियों ने अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों और यात्रियों को सऊदी अरब के हवाई अड्डों के लिए उड़ानें संचालित करने से बचने की चेतावनी भी दी। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं दी गई है।

हवाई अड्डों पर हमलों में भारतीय नागरिक की मौत

स्रोत के अनुसार, 10 अक्टूबर को रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमले में पहले 12 लोगों की मौत और 309 लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई थी। बाद में भारतीय दूतावास ने पुष्टि की कि घायलों में शामिल एक भारतीय नागरिक की भी मौत हो गई, जिससे मृतकों की संख्या 13 हो गई।

इससे पहले 6 और 7 अक्टूबर को किंग खालिद और अबहा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों को निशाना बनाकर हमले किए गए थे। इन घटनाओं में 3 लोगों की मौत और 36 लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई थी। सुरक्षा जांच के लिए प्रभावित हवाई अड्डों का संचालन कुछ समय के लिए रोका गया था।

ईरान और इराक के विदेश मंत्रियों में बातचीत

क्षेत्रीय तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और इराक के विदेश मंत्री फुआद हुसैन ने सोमवार को फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के हालात और यमन में बिगड़ती स्थिति पर चर्चा की। बातचीत में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच जारी हमलों से जुड़े घटनाक्रम पर भी विचार किया गया।

बेबाक24 टेक

ट्रंप के बयानों में एक ओर उत्तर कोरिया के साथ संभावित बातचीत की गुंजाइश दिखती है, तो दूसरी ओर सऊदी अरब पर हूती हमलों को लेकर सैन्य विकल्पों पर विचार करने का संकेत मिलता है। किम जोंग उन के साथ मुलाकात अभी तय नहीं है और हूतियों के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई पर भी अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। क्षेत्रीय तनाव के बीच आने वाले दिनों में कूटनीतिक और सैन्य घटनाक्रम महत्वपूर्ण रहेंगे।



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