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यूएन में भारत की मांग, आतंकवादी अपराधों को संधि में मिले जगह

by on | 2026-10-13 13:55:57

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यूएन में भारत की मांग, आतंकवादी अपराधों को संधि में मिले जगह

संयुक्त राष्ट्र | बेबाक24 न्यूज़

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में मांग उठाई है कि गंभीरता के निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले आतंकवादी अपराधों को मानवता के खिलाफ अपराधों से संबंधित प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय संधि में शामिल किया जाए। भारत ने इसके साथ देशों की जिम्मेदारी, उनके अधिकार क्षेत्र, आरोपियों के अधिकारों और पीड़ितों के हितों को सुरक्षित रखने पर जोर दिया है। इस संधि को 2028 में होने वाले सम्मेलन में अपनाने का लक्ष्य है।

आतंकवाद को संधि में शामिल करने की पैरवी

संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति की बैठक में भारत के मिशन की काउंसलर आर. मैथिली ने यह मुद्दा उठाया। यह समिति कानूनी मामलों पर विचार करती है। बैठक में मानवता के खिलाफ अपराधों की रोकथाम और दोषियों को सजा देने के लिए प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय संधि पर चर्चा हुई।

मैथिली ने कहा कि आतंकवादी हमले गंभीर होते हैं और लोगों पर उनका गहरा असर पड़ता है। इसलिए ऐसे आतंकवादी अपराधों को संधि में शामिल किया जाना चाहिए, जो मानवता के खिलाफ अपराधों की निर्धारित शर्तों को पूरा करते हों। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया में संधि के मूल ढांचे का ध्यान रखना जरूरी है और मौजूदा कानूनी व्यवस्थाओं को बिना बदलाव के इसमें शामिल करना उचित नहीं होगा।

देशों की जिम्मेदारी पर जोर

भारत ने कहा कि गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों और बड़े पैमाने पर होने वाले अत्याचारों के मामलों में न्याय और जवाबदेही सुनिश्चित करना देशों की जिम्मेदारी होनी चाहिए। प्रस्तावित संधि में इस सिद्धांत को मजबूत करने की जरूरत है कि लोगों को मानवता के खिलाफ अपराधों से बचाने की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित देश की होगी।

भारत ने इस संबंध में 3 प्रमुख पहलुओं पर जोर दिया:

  • राष्ट्रीय कानून के तहत न्याय: देशों को अपने कानूनों के अनुसार गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों और बड़े पैमाने पर होने वाले अत्याचारों के मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए।

  • अधिकार क्षेत्र और निष्पक्षता: संबंधित देशों के अधिकार क्षेत्र को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। साथ ही आरोपियों के अधिकारों और पीड़ितों के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

  • संप्रभुता का सम्मान: अपराधों की रोकथाम और दोषियों को सजा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों में देशों की संप्रभुता और उनके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने के सिद्धांत का सम्मान होना चाहिए।

2028 में प्रस्तावित है अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2004 में एक प्रस्ताव पारित कर 2028 में मानवता के खिलाफ अपराधों की रोकथाम और सजा से संबंधित सम्मेलन आयोजित करने का आह्वान किया था। इस दिशा में संधि का मसौदा तैयार करने और उस पर बातचीत के लिए 2 तैयारी सम्मेलन आयोजित किए जाने हैं। इनमें पहला सम्मेलन जनवरी में हुआ था।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इस प्रक्रिया का उद्देश्य कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधि तैयार करना है। इसके जरिए मानवता के खिलाफ अपराधों को रोकने और उनके दोषियों को सजा दिलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक कानूनी ढांचा बनाया जाएगा।

बेबाक24 टेक

भारत की मांग है कि गंभीरता के तय मानकों को पूरा करने वाले आतंकवादी अपराधों को प्रस्तावित संधि में जगह मिले। साथ ही, न्याय और जवाबदेही सुनिश्चित करते समय देशों के अधिकार क्षेत्र, संप्रभुता, आरोपियों के अधिकारों और पीड़ितों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखा जाए। 2028 के प्रस्तावित सम्मेलन में संधि को अपनाने की दिशा में होने वाली बातचीत इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण होगी।



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