by on | 2026-10-13 13:55:40
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वॉशिंगटन | बेबाक24 न्यूज़
अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के सामने चुनौतियां बढ़ती दिखाई दे रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप की नीतियों, ईरान युद्ध और महंगाई को लेकर मतदाताओं में नाराजगी के बीच रिपब्लिकन पार्टी की पारंपरिक रूप से सुरक्षित मानी जाने वाली सीटों पर भी मुकाबला कड़ा हो गया है। स्थिति ऐसी है कि पार्टी को डेमोक्रेटिक पार्टी की सीटों पर बढ़त बनाने के बजाय अपनी मौजूदा सीटें बचाने पर अधिक संसाधन खर्च करने पड़ रहे हैं।
कड़े मुकाबले वाली सीटों की संख्या बढ़ने से रिपब्लिकन पार्टी की चुनावी रणनीति प्रभावित हुई है। ट्रंप समर्थक राजनीतिक संगठनों से भारी आर्थिक मदद मिलने के बावजूद पार्टी को उन सीटों पर भी प्रचार के लिए बड़ी रकम खर्च करनी पड़ रही है, जिन्हें पहले सुरक्षित माना जा रहा था।
रिपोर्ट के अनुसार, रिपब्लिकन समर्थक सीनेट लीडरशिप फंड ने नॉर्थ कैरोलिना में विज्ञापन रोककर कंसास में कम से कम 10 मिलियन डॉलर, यानी करीब 83 करोड़ रुपये, खर्च करने का फैसला किया है। कंसास में 1932 के बाद से किसी डेमोक्रेट उम्मीदवार ने सीनेट चुनाव नहीं जीता है।
दक्षिण कैरोलिना में रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम को डेमोक्रेट उम्मीदवार एनी एंड्रयूज से कड़ी चुनौती मिलने की आशंका के बीच 5 मिलियन डॉलर अतिरिक्त खर्च किए जाने का उल्लेख है। वहीं, टेक्सास में रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्सटन के चुनाव अभियान पर 100 मिलियन डॉलर से अधिक खर्च किए जाने की जानकारी दी गई है। उनका मुकाबला डेमोक्रेट उम्मीदवार जेम्स टालारिको से बताया गया है।
रिपोर्ट में एक अमेरिकी अदालत के उस आदेश का भी उल्लेख है, जिसमें ट्रंप प्रशासन को करदाताओं के पैसे से तैयार राजनीतिक संदेशों वाले टेलीविजन विज्ञापन रद्द करने का निर्देश दिया गया। न्यूयॉर्क की अमेरिकी जिला अदालत की न्यायाधीश जेनिफर एल. रोचोन ने इस संबंध में अस्थायी रोक लगाई।
इस घटनाक्रम के बीच रिपब्लिकन नेताओं के सामने यह चुनौती भी है कि चुनाव प्रचार में ट्रंप की भागीदारी पार्टी के उम्मीदवारों को कितना फायदा पहुंचाएगी। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ नेता राष्ट्रपति की गिरती लोकप्रियता को लेकर चिंतित हैं।
अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के लगभग 2 साल बाद होने वाले कांग्रेस चुनावों को मध्यावधि चुनाव कहा जाता है। इनके जरिए मतदाता यह तय करते हैं कि कांग्रेस के दोनों सदनों में किस पार्टी का कितना प्रतिनिधित्व होगा।
प्रतिनिधि सभा: निचले सदन के सभी 435 सदस्यों का चुनाव हर 2 साल में होता है।
सीनेट: ऊपरी सदन में कुल 100 सदस्य होते हैं। सीनेटरों का कार्यकाल 6 साल का होता है और सामान्य चुनाव चक्र में लगभग एक-तिहाई सीटों पर हर 2 साल में मतदान होता है।
राज्यपाल: इस चुनाव चक्र में कई राज्यों के राज्यपालों के पदों के लिए भी मतदान होना है।
रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी के 219 और डेमोक्रेटिक पार्टी के 214 सदस्य थे, जबकि 2 सीटें खाली थीं। ऐसे में चुनाव के नतीजे सदन में दोनों दलों की ताकत का संतुलन बदल सकते हैं।
बेबाक24 टेक: अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के सामने अपनी सीटें बचाने और डेमोक्रेटिक चुनौती का सामना करने की दोहरी चुनौती है। चुनावी विज्ञापनों पर बढ़ता खर्च और सुरक्षित मानी जाने वाली सीटों पर कड़ा मुकाबला इस चुनाव की अहम विशेषताएं बनकर सामने आ रहे हैं। हालांकि, अंतिम तस्वीर मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगी।
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