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हरीश साल्वे का विपक्ष पर निशाना, बोले- अदालत को राजनीतिक हथियार बनाना गलत

by on | 2026-10-12 12:43:22

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हरीश साल्वे का विपक्ष पर निशाना, बोले- अदालत को राजनीतिक हथियार बनाना गलत

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल और वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात की कोशिश को लेकर इंडिया ब्लॉक के नेताओं की आलोचना की है। आईएएनएस को दिए साक्षात्कार में उन्होंने इस कदम को ‘सरासर मूर्खता’ बताते हुए आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के रूप में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल कानून और निर्धारित प्रक्रियाओं के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए।

सीजेआई से मुलाकात की कोशिश पर सवाल

साल्वे ने कहा कि इंडिया ब्लॉक में कई वरिष्ठ वकील हैं और उन्हें समझना चाहिए कि मुख्य न्यायाधीश हर मामले की व्यक्तिगत रूप से सुनवाई नहीं करते। सीजेआई जिस पीठ को मामला सौंपते हैं, वही सुनवाई कर निर्णय देती है।

उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष को चुनाव आयोग से जुड़े किसी मुद्दे पर शिकायत है, तो उसे राजनीतिक मांगें रखने के बजाय निर्धारित कानूनी प्रक्रिया अपनानी चाहिए।

फैसले से असहमति और न्यायपालिका पर सवाल अलग

साल्वे ने कहा कि अदालत के किसी फैसले से असहमत होना और पूरी न्यायपालिका पर अविश्वास जताना अलग-अलग बातें हैं। फैसले की आलोचना की जा सकती है और उसके खिलाफ कानूनी तर्क रखे जा सकते हैं, लेकिन इससे न्यायिक व्यवस्था पर सवाल उठाना उचित नहीं है।

उनके अनुसार, अदालत में लंबित मामलों पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से बचने की परंपरा कमजोर पड़ती दिख रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संस्थागत गरिमा का सम्मान जरूरी है।

विरोध का अधिकार, लेकिन कानून के दायरे में

विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर साल्वे ने संविधान के अनुच्छेद 19 का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अधिकार का इस्तेमाल कानून के दायरे में रहकर किया जाना चाहिए। यदि पुलिस किसी प्रदर्शन की अनुमति नहीं देती है, तो उसके फैसले को उचित कानूनी प्रक्रिया के जरिए चुनौती दी जा सकती है।

उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति स्वयं किसी प्रतिबंध को गलत मानकर उसका उल्लंघन नहीं कर सकता और फिर कार्रवाई को अधिकारों का हनन बता सकता है। उनके मुताबिक, विरोध का अधिकार किसी को कानून से ऊपर नहीं बनाता।

मुख्य चुनाव आयुक्त के मामले में प्रक्रिया जरूरी

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवाद पर साल्वे ने कहा कि जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने के बजाय सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और फैसले का इंतजार करना चाहिए। उन्होंने बताया कि अदालत ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा है और संबंधित रिकॉर्ड की जांच के बाद मामले पर निर्णय होगा।

साल्वे के अनुसार, यदि कोई अनियमितता सामने आती है, तो संवैधानिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से नहीं हटा सकता।

विदेशी हस्तक्षेप के आरोप भी लगाए

साल्वे ने आरोप लगाया कि मौजूदा विरोध प्रदर्शनों के पीछे विदेशी वित्तपोषण और बाहरी हस्तक्षेप की भूमिका हो सकती है। इस संदर्भ में उन्होंने नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश की घटनाओं का उल्लेख किया। हालांकि, उपलब्ध साक्षात्कार सामग्री में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं दी गई है।

उन्होंने कहा कि सरकारों के बदलने के बावजूद न्यायपालिका, विधायिका, कार्यपालिका और चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं की मजबूती और उनके अधिकारों का सम्मान बना रहना चाहिए।

बेबाक24 टेक

हरीश साल्वे ने इंडिया ब्लॉक के नेताओं की सीजेआई से मुलाकात की कोशिश, विरोध प्रदर्शन और चुनाव आयोग से जुड़े विवाद पर कानूनी प्रक्रिया अपनाने की वकालत की है। वहीं, मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष की मांगों और आरोपों पर अंतिम स्थिति संबंधित कानूनी कार्यवाही तथा उपलब्ध साक्ष्यों से स्पष्ट होगी।



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