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यूपी: 22 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर का आदेश रद्द, हाईकोर्ट ने दिए निर्देश

by on | 2026-10-11 13:58:15

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यूपी: 22 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर का आदेश रद्द, हाईकोर्ट ने दिए निर्देश

प्रयागराज | बेबाक24 न्यूज़

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महाराजगंज में उप निरीक्षक समेत 22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एससी-एसटी अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज करने के विशेष अदालत के आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति संतोष राय की एकल पीठ ने कहा कि सरकारी ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों पर लगे आरोपों में एफआईआर का आदेश देने से पहले मामले की सावधानीपूर्वक जांच जरूरी है। हालांकि, इस प्रक्रिया को मुकदमे के छोटे रूप यानी मिनी ट्रायल में नहीं बदला जा सकता।

न्यायिक अधिकारियों को निर्देश

हाईकोर्ट ने प्रदेश के न्यायिक अधिकारियों को निर्देश दिया कि एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने से पहले पुलिस का पक्ष, उपलब्ध रिपोर्ट और वैधानिक प्रक्रिया पर विचार करें। जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को मासिक बैठकों में इन निर्देशों के पालन की निगरानी करने को भी कहा गया है।

2 महिलाओं ने लगाए थे आरोप

महाराजगंज के बसंतपुर गांव की 2 महिलाओं ने आरोप लगाया था कि 6 जून की रात उप निरीक्षक राकेश कुमार यादव समेत पुलिसकर्मी बिना महिला पुलिसकर्मियों और तलाशी वारंट के उनके घर में घुसे थे। महिलाओं ने अभद्रता करने, शौचालय जाने से रोकने और जातिसूचक टिप्पणियां करने के आरोप लगाए थे।

महिलाओं के अनुसार, पुलिस अधीक्षक से शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने एससी-एसटी अधिनियम की विशेष अदालत का रुख किया। अदालत ने 11 अगस्त को पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था। पुलिसकर्मियों ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।

विशेष अदालत के आदेश में क्या कमी मिली?

हाईकोर्ट ने पाया कि विशेष अदालत ने यह स्पष्ट नहीं किया था कि मामले में जांच कराना क्यों जरूरी नहीं था। अदालत ने पुलिस की ओर से पेश रिपोर्ट पर भी विचार नहीं किया था। कोर्ट ने गिरफ्तारी और सामान्य डायरी में दर्ज प्रविष्टि को पुलिसकर्मियों की मौजूदगी तथा ड्यूटी के बीच प्रथम दृष्टया संबंध का संकेत माना। उसने पुराने मुकदमों से जुड़े पहलुओं पर भी विचार करने की जरूरत बताई।

जांच के आदेश और प्राथमिकी में अंतर

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 173(4) के तहत पुलिस अधीक्षक के समक्ष शिकायत का उपाय उपलब्ध है, लेकिन केवल इस प्रावधान के तहत आवेदन करने से विशेष अदालत को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश देने का अधिकार नहीं मिल जाता। अदालत के अनुसार, जांच का न्यायिक निर्देश देने की शक्ति धारा 175(3) में निहित है।

बेबाक24 टेक

हाईकोर्ट के इस फैसले में सरकारी ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने से जुड़ी न्यायिक प्रक्रिया पर जोर दिया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि शिकायत पर आदेश देने से पहले संबंधित पक्षों और वैधानिक पहलुओं पर विचार जरूरी है, लेकिन जांच की प्रक्रिया को मिनी ट्रायल में नहीं बदला जाना चाहिए।



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