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विवादों के 'वॉइस' अमिताभ ठाकुर: क्यों कफ सिरप मामले में कर रहे हैं ताबड़तोड़ जांच की मांग?

by admin@bebak24.com on | 2025-12-06 00:36:12

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विवादों के 'वॉइस' अमिताभ ठाकुर: क्यों कफ सिरप मामले में कर रहे हैं ताबड़तोड़ जांच की मांग?

वाराणसी। उत्तर प्रदेश में सम्भावित 2000 करोड़ रुपये के प्रतिबंधित कफ सिरप तस्करी रैकेट की जांच अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा रही है। इस मामले को लगातार हाईलाइट कर रहे हैं पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर, जो एक के बाद एक बाहुबलियों और प्रभावशाली व्यक्तियों की भूमिका की जांच की मांग करके विवादों के केंद्र में आ गए है।  अमिताभ ठाकुर लगातार सक्रिय हैं और उन्होंने इस मामले में शामिल कई संदिग्धों की भूमिका की जांच की मांग करके मामले को गरमा दिया है।

 अमिताभ ठाकुर: एक IPS, जो विवादों से घिरा रहा

उत्तर प्रदेश कैडर के पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को 2021 में अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई थी। अपनी सेवा के दौरान भी वह लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने और कानूनी विवादों में रहने के लिए जाने जाते रहे हैं। सेवानिवृत्ति के बाद, उन्होंने 'आजाद अधिकार सेना' नामक राजनीतिक दल का गठन किया और इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में सक्रिय हैं।


माफिया से साठगांठ का दाग

ठाकुर की छवि तब और अधिक विवादास्पद हो गई थी, जब उन पर माफिया मुख्तार अंसारी के करीबी बसपा सांसद अतुल राय को कथित दुष्कर्म के एक मामले में बचाने के लिए आपराधिक षड्यंत्र (धारा 120-बी) रचने का आरोप लगा।

 * जेल और आत्मदाह: इसी आरोप में 2021 में उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। मामला तब सबसे संवेदनशील मोड़ पर पहुंचा जब अतुल राय पर आरोप लगाने वाली रेप पीड़िता और उसके गवाह साथी ने सुप्रीम कोर्ट के बाहर आत्मदाह कर लिया। आत्मदाह से पहले बनाए गए लाइव वीडियो में, पीड़िता ने आईपीएस अमिताभ ठाकुर, सीओ अमरेश सिंह बघेल, कोतवाल तेज बहादुर सिंह (टीबी सिंह) सहित कई संलिप्त लोगों का नाम लिया था, जिससे यह साबित हुआ कि ठाकुर का नाम बड़े माफिया और संवेदनशील मामलों से गहरे तौर पर जुड़ा रहा है।


  कफ सिरप रैकेट: CM के खास अमरीश भोला पर भी वार

अपनी विवादित पृष्ठभूमि के बावजूद, अमिताभ ठाकुर अब कफ सिरप तस्करी रैकेट में शामिल हर छोटे-बड़े नाम की जांच के लिए डीजीपी को लगातार पत्र लिख रहे हैं। उनके निशाने पर अब सिर्फ अपराधी नहीं, बल्कि राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोग भी हैं।

* संदिग्ध व्यक्ति : अमिताभ ठाकुर की जांच मांग का आधार 


धनंजय सिंह : (पूर्व सांसद)  मुख्य आरोपी अमित टाटा से उनके करीबी संबंध, जिससे इस आपराधिक सिंडिकेट को आपराधिक संरक्षण मिलने की आशंका है। 


* अमित सिंह टाटा :  (गिरफ्तार सप्लायर)  वह सिर्फ एक सप्लायर नहीं, बल्कि उसके पीछे कौन से बड़े संरक्षक हैं, उनकी वित्तीय और राजनीतिक पहचान उजागर करने की मांग। 


 *आलोक सिंह : (बर्खास्त सिपाही)  अवैध कारोबार से अवैध संपत्ति बनाने और एसटीएफ जैसे पुलिस महकमे से साठगांठ की गहराई से जांच की आवश्यकता। 


 अमरीश सिंह भोला : (VDA मेंबर)  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'खास' माने जाने वाले इस सदस्य की राजनीतिक पहुँच का दुरुपयोग करके तस्करी सिंडिकेट में निभाई गई संभावित भूमिका की जांच। 


संबंधित अधिकारी : मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल के दुबई भागने में पुलिस और प्रशासन के उच्चाधिकारियों की मिलीभगत के संदेह की जांच। 


अमिताभ ठाकुर की मांगें इस ओर इशारा करती हैं कि वह अपनी पुलिस महकमे की अंदरूनी जानकारी का उपयोग करके इस मामले को सिर्फ आपराधिक नहीं, बल्कि एक गहरे राजनीतिक संरक्षण प्राप्त सिंडिकेट के रूप में उजागर करना चाहते हैं। उनके द्वारा मुख्यमंत्री के 'खास' माने जाने वाले व्यक्ति का नाम घसीटना यह दर्शाता है कि यह लड़ाई अब सीधे सत्ता के गलियारों तक पहुँच चुकी है।




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