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काशी में अमर हुई मोदी-आबे की आत्मीयता, रुद्राक्ष में सजा स्वर्गीय शिंजो आबे की यादों का कारवां!

by on | 2026-10-07 21:37:51

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काशी में अमर हुई मोदी-आबे की आत्मीयता, रुद्राक्ष में सजा स्वर्गीय शिंजो आबे की यादों का कारवां!

​वाराणसी। भारत और जापान के बीच दशकों पुरानी दोस्ती और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व जापान के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय शिंजो आबे की अटूट आत्मीयता को काशी की पावन धरा पर एक अमर स्वरूप मिल गया है। सिगरा स्थित 'रुद्राक्ष' अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एवं सम्मेलन केंद्र में भव्य ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का लोकार्पण हुआ। जापान के पूर्व पीएम शिंजो आबे की पत्नी आकिए आबे और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संयुक्त रूप से फीता काटकर इस स्मृति गलियारे का उद्घाटन किया।

​लोकार्पण के दौरान जब आकिए आबे ने अपने स्वर्गीय पति की काशी यात्रा की यादें साझा कीं, तो पूरा हॉल भावुक हो उठा। उन्होंने बेहद भावनुक मन से कहा— "अगर मेरे पति आज जीवित होते, तो इस खूबसूरत कॉरिडोर को देखकर फूले न समाते और काशी आने की जिद जरूर करते।"

​'गंगा आरती और क्योटो पैक्ट': पन्नों में दर्ज हुई 2015 की ऐतिहासिक यात्रा

​वर्ष 2015 में जब शिंजो आबे काशी आए थे, तब उन्होंने पीएम मोदी के साथ दशाश्वमेध घाट पर मां गंगा का पूजन और आरती देखी थी। आकिए आबे ने उस पल को याद करते हुए बताया कि उनके पति ने गंगा मैया को बेहद श्रद्धा और ध्यान से देखा था।

​मेमोरियल कॉरिडोर में उस ऐतिहासिक 2015 की यात्रा, पीएम मोदी के साथ साझा किए गए आत्मीय पलों, और 2014 के 'काशी-क्योटो पार्टनर सिटी समझौते' से जुड़ी दुर्लभ तस्वीरों व स्मृतियों को बेहद करीने से सहेजा गया है। इसी क्योटो समझौते की देन है कि आज काशी के पास 'रुद्राक्ष' जैसा आधुनिक कन्वेंशन सेंटर मौजूद है।

​108 का अद्भुत संयोग: भारत और जापान की आध्यात्मिक सांझ

​रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर की वास्तुकला पर बात करते हुए आकिए आबे ने एक बेहद दिलचस्प और आध्यात्मिक पहलू उजागर किया। उन्होंने बताया कि इस सेंटर की बाहरी दीवारों पर 108 रुद्राक्ष लगाए गए हैं।

​108 का अंक केवल भारत में ही नहीं, बल्कि जापान में भी उतना ही पवित्र माना जाता है। जापान में नववर्ष की पूर्व संध्या पर बौद्ध मंदिरों में 108 बार घंटी बजाने की प्राचीन परंपरा है, जो दोनों देशों के गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक तार जोड़ती है।

​योगी का बड़ा बयान: सेमीकंडक्टर से लेकर ग्रीन हाइड्रोजन तक मजबूत हो रही साझीदारी

​कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत-जापान मैत्री को आर्थिक और तकनीकी मोर्चे पर नई ऊंचाई देने की बात कही।

​तकनीक और युवा का संगम: सीएम योगी ने कहा कि आज दोनों देशों का सहयोग सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ग्रीन हाइड्रोजन और क्रिटिकल मिनरल्स तक फैल चुका है। जापान के पास प्रिसिजन टेक्नोलॉजी है तो भारत के पास युवा ऊर्जा और विशाल बाजार।


​यूपी में 'जापानी सिटी': मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास 500 एकड़ में विशेष ‘जापानी सिटी’ विकसित की जा रही है। साथ ही इन्वेस्ट यूपी में 'यामानाशी डेस्क' स्थापित किया गया है ताकि जापानी निवेशकों को कोई परेशानी न हो। वर्तमान में भारत में 1400 से अधिक जापानी कंपनियां काम कर रही हैं।


​चौपाई से दी श्रद्धांजलि: "मित्र का दुख मेरु समाना..."

​मित्रता की मिसाल पेश करते हुए सीएम योगी ने रामचरितमानस की प्रसिद्ध चौपाई उद्धृत की—

​"निज दुख गिरि सम रज करि जाना। मित्रक दुख रज मेरु समाना॥"

​उन्होंने कहा कि आबे मेमोरियल कॉरिडोर उत्तर प्रदेश और पूरे देश की ओर से स्वर्गीय शिंजो आबे को एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि है। जापान ने काशी को 'रुद्राक्ष' जैसा तोहफा दिया, और अब काशी उसी रुद्राक्ष के भीतर शिंजो आबे की स्मृतियों को हमेशा के लिए सहेज रही है।

​2027: राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष का मील का पत्थर

​सीएम योगी ने याद दिलाया कि वर्ष 2027 में भारत और जापान के राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं। ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर यह कॉरिडोर दोनों देशों के अटूट रिश्तों का एक नया केंद्र बिंदु बनेगा।

​इस ऐतिहासिक मौके पर राज्यमंत्री रवीन्द्र जायसवाल, महापौर अशोक कुमार तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव सहित जापान से आया विशेष प्रतिनिधिमंडल, काशी के गणमान्य नागरिक और स्कूली बच्चे बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।



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