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आसमान में एक साथ गरजे कई देशों के विमान, तरंग शक्ति में दिखा जबरदस्त तालमेल

by on | 2026-10-07 14:30:03

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आसमान में एक साथ गरजे कई देशों के विमान, तरंग शक्ति में दिखा जबरदस्त तालमेल

जोधपुर | बेबाक24 न्यूज़

भारतीय वायुसेना ने बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास तरंग शक्ति 2026 का नया वीडियो साझा किया है। इसमें भारत समेत कई देशों के लड़ाकू और सैन्य विमान एक साथ निर्धारित संरचना में उड़ते नजर आ रहे हैं। भारतीय वायुसेना ने इसे विश्वास, सटीकता और आपसी तालमेल का प्रभावशाली प्रदर्शन बताया है।

राजस्थान के जोधपुर वायुसेना स्टेशन पर चल रहा यह अभ्यास 26 सितंबर से 12 अक्तूबर तक चलेगा। इसमें भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, जर्मनी, श्रीलंका और बांग्लादेश की वायुसेनाएं हिस्सा ले रही हैं। कई मित्र देश पर्यवेक्षक के रूप में भी जुड़े हैं।

एक साथ उड़ान, एक जैसी तैयारी

तरंग शक्ति का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग देशों की वायुसेनाओं के बीच संयुक्त प्रशिक्षण और संचालन में तालमेल बढ़ाना है। हर देश के विमानों, वायु दल और संचालन की अपनी प्रक्रियाएं होती हैं। ऐसे में एक ही हवाई क्षेत्र में साथ उड़ान भरने के लिए व्यापक तैयारी और आपसी समन्वय जरूरी होता है।

अभ्यास में केवल वायु दल ही नहीं, बल्कि अभियान की योजना बनाने वाले अधिकारी और संचालन से जुड़े कर्मचारी भी एक-दूसरे के साथ काम कर रहे हैं। इससे उन्हें विभिन्न देशों की कार्यप्रणाली समझने और अपने अनुभव साझा करने का अवसर मिल रहा है।

एफ-35 से ए400एम तक शामिल

तरंग शक्ति में लड़ाकू विमानों के अलावा सैन्य परिवहन और हवा में ईंधन भरने वाले विमान भी शामिल हैं। इसमें एफ-35 लाइटनिंग II, राफेल, एफ-16, ए400एम, एमआरटीटी, सी-130, सी-130जे और केसी-30ए जैसे विमान हिस्सा ले रहे हैं।

अमेरिका के एफ-35ए लाइटनिंग II की भागीदारी इस अभ्यास की प्रमुख विशेषताओं में है। यह भारत में किसी हवाई अभ्यास में एफ-35 की पहली भागीदारी बताई गई है।

जर्मनी का ए400एम भी खास

जर्मनी का ए400एम सैन्य परिवहन विमान भी इस अभ्यास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जर्मन वायुसेना के कैप्टन मॉरिस बर्न्स के मुताबिक, इस बार ए400एम को बड़े लड़ाकू विमान अभियानों का हिस्सा बनाया गया है।

इसका अर्थ है कि विमान केवल सैनिकों या सामान के परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े स्तर के लड़ाकू अभियानों में भी भाग ले रहा है। बर्न्स ने ए400एम को जर्मन वायुसेना के बेड़े की रीढ़ बताते हुए कहा कि यह सामरिक और रसद दोनों तरह के अभियानों में उपयोगी है।

भारत से सीख रहा जर्मनी

कैप्टन बर्न्स के अनुसार, भारत में उड़ान भरना जर्मन वायुसेना के लिए सीखने का महत्वपूर्ण अनुभव है। जर्मन दल को भारतीय वायुसेना की अभियान योजना और बड़े हवाई अभ्यासों की कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिला है।

अभ्यास से भारतीय और जर्मन लड़ाकू तथा परिवहन विमानों के बीच तालमेल भी बेहतर हुआ है। यही तरंग शक्ति का प्रमुख उद्देश्य है कि अलग-अलग वायुसेनाएं साथ काम करें, एक-दूसरे की क्षमताओं को समझें और भविष्य में संयुक्त अभियानों के दौरान बेहतर समन्वय स्थापित कर सकें।

सिर्फ उड़ान तक सीमित नहीं अभ्यास

तरंग शक्ति में विमानों की उड़ान के अलावा हवाई सुरक्षा और संचालन प्रक्रियाओं का संयुक्त प्रशिक्षण भी हो रहा है। इसके साथ संगोष्ठियां, औद्योगिक दौरे, सेखों मैराथन, विरासत स्थलों का भ्रमण और योग सत्र जैसी गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं।

तरंग शक्ति का पहला संस्करण 2024 में आयोजित हुआ था। वर्ष 2026 का यह संस्करण उसी श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए विभिन्न देशों की वायुसेनाओं के बीच सहयोग और आपसी समझ को मजबूत करने पर केंद्रित है।

बेबाक24 टेक

तरंग शक्ति 2026 में आसमान में एक साथ उड़ते विभिन्न देशों के विमान केवल शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि संयुक्त प्रशिक्षण और आपसी तालमेल की तस्वीर भी पेश कर रहे हैं। एफ-35, राफेल, एफ-16 और ए400एम जैसे विमानों की भागीदारी ने इस अभ्यास को खास बना दिया है।



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