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गोडावण की घर वापसी: रामदेवरा में प्राकृतिक आवास में बसाने की शुरुआत

by on | 2026-10-04 13:44:03

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गोडावण की घर वापसी: रामदेवरा में प्राकृतिक आवास में बसाने की शुरुआत

जैसलमेर | बेबाक24 न्यूज़

राजस्थान के राज्य पक्षी और गंभीर रूप से संकटग्रस्त गोडावण को उसके प्राकृतिक आवास में दोबारा बसाने की पहल शुरू हो गई है। रामदेवरा में तैयार किए गए गोडावण पक्षीघर और प्राकृतिक वातावरण में छोड़ने के केंद्र का केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने जोधपुर से वर्चुअल उद्घाटन किया। इसके साथ ही कृत्रिम संवर्धन और प्रजनन तकनीक से तैयार गोडावणों को प्राकृतिक वातावरण में छोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई।

8 साल में संरक्षण अभियान को मिली गति

भूपेंद्र यादव ने बताया कि गोडावण संरक्षण की परियोजना ने करीब 8 साल में महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है। वर्ष 2018 में भारतीय वन्यजीव संस्थान और अंतरराष्ट्रीय हुबारा संरक्षण केंद्र के बीच समझौते के बाद कृत्रिम संवर्धन और प्रजनन के साथ संरक्षण कार्य को गति मिली।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि वर्ष 2021 में रामदेवरा पहुंचने के दौरान परियोजना की स्थिति गंभीर थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प, वैज्ञानिकों की मेहनत और अधिकारियों के समन्वय से यह काम आगे बढ़ सका। वन मंत्री संजय शर्मा ने कहा कि गोडावण को प्राकृतिक आवास में दोबारा बसाने से राजस्थान के राज्य पक्षी को उसका खोया गौरव वापस मिलने की दिशा में कदम बढ़ा है।

3,600 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र संरक्षित

गोडावण के अंडों और चूजों की सुरक्षा के लिए वन विभाग ने 3,600 वर्ग किलोमीटर के मरुस्थलीय क्षेत्र को एकीकृत संरक्षित क्षेत्र के रूप में विकसित किया है। पूरे क्षेत्र को कुत्ता-मुक्त क्षेत्र बनाया गया है, ताकि अंडों और चूजों पर खतरा कम किया जा सके।

वैज्ञानिकों ने यहां घास के मैदानों और जल स्रोतों का भी प्रबंधन किया है। विभाग के अनुसार, इस क्षेत्र के विकसित होने के बाद चिंकारा की संख्या भी 10 गुना बढ़ी है। भूपेंद्र यादव ने गोडावण को थार की जैव विविधता के लिए ऐसी प्रमुख प्रजाति बताया, जिसके संरक्षण से पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को लाभ मिलता है।

पर्यटन की भी बढ़ सकती है संभावना

रामदेवरा क्षेत्र मध्य एशियाई पक्षी प्रवास मार्ग पर स्थित है। ऐसे में इसे भरतपुर के केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान की तर्ज पर बड़े प्रकृति पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावना भी जताई गई है। गोडावण संरक्षण के साथ घास के मैदान, जल स्रोत और अन्य वन्यजीवों के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

सरिस्का की तर्ज पर नई पहल

राजस्थान में वन्यजीवों को दोबारा उनके प्राकृतिक आवास में बसाने का प्रयोग पहले भी किया जा चुका है। वर्ष 2008 में सरिस्का में बाघों को दोबारा बसाने की शुरुआत हुई थी। अब रामदेवरा में गोडावणों को प्राकृतिक वातावरण में दोबारा स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

बेबाक24 टेक

गोडावण संरक्षण की यह पहल थार के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कृत्रिम संवर्धन और प्रजनन से तैयार गोडावणों को प्राकृतिक आवास में बसाने से इस संकटग्रस्त पक्षी की संख्या और उसके प्राकृतिक पर्यावरण को सुरक्षित करने की दिशा में नई उम्मीद बनी है।



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