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दिव्य गाथा: श्रीराम जन्मभूमि के शिखर पर लहराया 'धर्म ध्वज', PM मोदी ने किया नवयुग का शंखनाद!

by admin@gmail.com on | 2025-11-25 21:53:21

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दिव्य गाथा: श्रीराम जन्मभूमि के शिखर पर लहराया 'धर्म ध्वज', PM मोदी ने किया नवयुग का शंखनाद!

अयोध्या, मंगलवार, 25 नवंबर 2025 | आज का दिन रामनगरी अयोध्या के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को एक अत्यंत शुभ और दिव्य मुहूर्त में श्री राम जन्मभूमि मंदिर के भव्य शिखर पर भगवा 'धर्म ध्वज' फहराकर, मंदिर निर्माण के प्रथम चरण की पूर्णता का आधिकारिक ऐलान कर दिया। इस 'ध्वजारोहण' के साथ ही सदियों का इंतजार खत्म हुआ और अयोध्या में नवयुग का शंखनाद हुआ।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस ऐतिहासिक अवसर को "भारत की सांस्कृतिक चेतना के एक और उत्कर्ष बिंदु की साक्षी" करार देते हुए कहा: "सदियों के घाव भर रहे हैंसदियों की वेदना विराम पा रही है। सदियों का संकल्प आज सिद्धि को प्राप्त हो रहा है।" उन्होंने इसे "उस यज्ञ की पूर्णाहुति" बताया, "जिसकी अग्नि 500 वर्ष तक प्रज्वलित रही और जो एक पल भी आस्था से डिगा नहीं।"


रोड शो: जनता का अभिवादन और आस्था का सैलाब

प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को सुबह अयोध्या पहुँचते ही अपने आधिकारिक कार्यक्रम की शुरुआत एक भव्य रोड शो से की। एयरपोर्ट से राम मंदिर तक के रास्ते में सड़कों के दोनों ओर लाखों की संख्या में रामभक्त और नागरिक खड़े थे। प्रधानमंत्री ने खुली गाड़ी में यात्रा करते हुए सभी का हाथ जोड़कर अभिवादन स्वीकार किया।

- उद्देश्य: इस रोड शो का उद्देश्य राम मंदिर के निर्माण की पूर्णता का उत्सव मनाना और जनता के साथ इस ऐतिहासिक पल को साझा करना था।

- उत्साह: इस दौरान भक्तों ने 'जय श्री राम' और 'मोदी-मोदी' के नारों से पूरा वातावरण गुंजायमान कर दिया, जिससे अयोध्या में एक उत्सव का माहौल बन गया।


शुभ संयोग और रामभक्ति का चरम

यह महापर्व मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की शुभ पंचमी तिथि को संपन्न हुआ, जो कि भगवान श्री राम और माता सीता के विवाह पंचमी के अत्यंत पवित्र अभिजीत मुहूर्त के साथ मेल खाती है। इस दुर्लभ संयोग पर पीएम मोदी ने कहा: "आज संपूर्ण भारत, संपूर्ण विश्व राममय हैहर राम भक्त के हृदय में अद्वितीय संतोष है, असीम कृतज्ञता है, अपार, अलौकिक आनंद है।"

दर्शन और पूजन: प्रधानमंत्री मोदी ने अयोध्या पहुँचते ही सप्तमंदिर, शेषावतार मंदिर और माता अन्नपूर्णा मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इसके बाद, उन्होंने राम दरबार और रामलला के गर्भगृह में विशेष पूजा-अर्चना की।


रिमोट से हुआ ऐतिहासिक 'ध्वजारोहण' और ध्वज का संदेश

दोपहर करीब 12 बजे, वैदिक मंत्रोच्चार और जय श्री राम के उद्घोष के बीच, प्रधानमंत्री ने रिमोट सिस्टम के माध्यम से 10 फुट ऊंचे और 20 फुट लंबे समकोण त्रिभुजाकार भगवा ध्वज को शिखर पर फहराया।

इस विशेष 'धर्म ध्वज' पर टिप्पणी करते हुए पीएम मोदी ने कहा:

- "ये धर्मध्वज केवल एक ध्वज नहीं, ये भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का ध्वज है।"

- "इसका भगवा रंग, इस पर रचित सूर्यवंश की ख्याति और अंकित 'ॐ' और 'कोविदार' वृक्ष राम राज्य की कृति को प्रतिरूपित करता है।"

- "यह ध्वज संकल्प है, यह ध्वज सफलता है, यह ध्वज संघर्ष से सृजन की गाथा है। यह सदियों से चले आ रहे स्वप्नों का साकार स्वरूप है।"

उन्होंने आगे कहा कि यह ध्वज "आने वाली सदियों तक प्रभु राम के आदर्शों का उद्घोष करेगा" और "आह्वान करेगा कि 'सत्यमेव जयते' यानी जीत सत्य की ही होती है।"


 राम, विकसित भारत और गुलामी की मानसिकता से मुक्ति

- पीएम मोदी ने राम को केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि "एक मूल्य" बताया और विकसित भारत (2047) के लिए राम के आदर्शों को अपनाने पर जोर दिया।

- "अगर हमें 2047 तक भारत को विकसित बनाना है, तो हमें अपने भीतर के राम को जगाना होगा। राम यानि जीवन का सर्वोच्च चरित्र।"

- उन्होंने भविष्य की पीढ़ियों के लिए सोचने की आवश्यकता पर बल दिया, जिसे "हमें राम से सीखना होगा।"

प्रधानमंत्री ने 'गुलामी की मानसिकता' से मुक्ति के लिए 2035 तक देश को पूरी तरह से मुक्त करने का संकल्प लेने का आह्वान किया, क्योंकि 1835 में मैकाले ने भारत में इसी मानसिकता की नींव रखी थी।


 अयोध्या: आधुनिकता और आध्यात्मिकता का संगम

अयोध्या के भविष्य पर प्रकाश डालते हुए पीएम मोदी ने कहा: "आज अयोध्या एक बार फिर वह नगरी बन रही है जो दुनिया के लिए एक उदाहरण बनेगी।"

"भविष्य की अयोध्या में 'पौराणिक कथा और आधुनिकता' का संगम दिखेगा, जहां सरयू नदी का अमृतमय प्रवाह और विकास की धारा एक साथ बहेगी, और जहां आध्यात्मिकता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बीच सामंजस्य स्पष्ट होगा।"

7,000 गणमान्य अतिथि रहे साक्षी: इस गौरवशाली पल के साक्षी बनने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, संघ प्रमुख मोहन भागवत, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल सहित वंचित, दलित, किन्नर और अघोरी समुदाय के प्रतिनिधियों समेत लगभग 7,000 गणमान्य अतिथि अयोध्या पहुँचे, जो राष्ट्रीय एकता और समावेशिता का एक मजबूत संदेश है।

इस महाउत्सव के लिए पूरी अयोध्या नगरी को दुल्हन की तरह सजाया गया है और सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं।



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