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अंसारी का 'कुबेर' - गार्ड की नौकरी से अरबों के साम्राज्य तक अखंड प्रताप राय का संदिग्ध सफर

by admin@bebak24.com on | 2025-11-25 01:26:51

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 अंसारी का 'कुबेर' - गार्ड की नौकरी से अरबों के साम्राज्य तक अखंड प्रताप राय का संदिग्ध सफर



गाजीपुर: पूर्वांचल में माफिया राज और अपराध की दुनिया में कई नाम सामने आए और मिट गए, लेकिन कुछ चेहरे ऐसे हैं जो पर्दे के पीछे रहकर सिंडिकेट की आर्थिक रीढ़ बन गए। ऐसा ही एक नाम इन दिनों सुर्खियों में है—अखंड प्रताप राय। कभी चंद रुपयों की नौकरी करने वाला यह शख्स आज मुख्तार अंसारी गिरोह का सबसे बड़ा राजदार और फाइनेंसर माना जा रहा है।

अखंड प्रताप राय की कहानी फर्श से अर्श तक पहुंचने की नहीं, बल्कि अपराध और रसूख के कॉकटेल से बनी एक काली दास्तान है।


वोडाफोन टावर के गार्ड से मुख्तार के खास तक का सफर


सूत्रों के मुताबिक, अखंड प्रताप राय की शुरुआत बेहद साधारण थी। सैदपुर के देवचंदपुर में वोडाफोन की साइट पर वह बतौर सिक्योरिटी गार्ड तैनात था। यहीं से उसकी नजर टेलीकॉम टावरों में होने वाली डीजल सप्लाई के खेल पर पड़ी।

कहा जाता है कि अखंड राय ही वह शख्स था, जिसने सबसे पहले मुख्तार गैंग की एंट्री टावरों के डीजल सप्लाई कारोबार में कराई थी। इस सिंडिकेट ने देखते ही देखते करोड़ों का वारा-न्यारा किया। आज भी दावा किया जा रहा है कि जियो (Jio) टावरों में डीजल सप्लाई का काम परोक्ष रूप से इसी के पास है।


अपराधियों का 'फाइनेंसर' और शूटरों का मददगार


पुलिस रिकॉर्ड और खुफिया जानकारी की मानें तो अखंड राय का नेटवर्क केवल कारोबार तक सीमित नहीं है। वह 25,000 के इनामी बदमाश उमेश राय (गोरा) और अंगद राय का बेहद करीबी बताया जाता है।

आरोप है कि गैंग के शूटरों और अपराधियों के लिए 'फाइली' (रसद और पैसे का इंतजाम) का काम अखंड राय ही देखता है। चर्चा है कि अंसारी बंधुओं के अरबों रुपये इसके पास निवेशित हैं, जिसे वह विभिन्न व्यवसायों के जरिए व्हाइट मनी में बदल रहा है।


बेनामी संपत्तियों का जाल: स्कूल से लेकर पेट्रोल पंप तक


अखंड प्रताप राय की संपत्ति में आया अकूत उछाल जांच का विषय है।

 * पेट्रोल पंप और गैस एजेंसी: खबरों के अनुसार, कई बेनामी पेट्रोल पंप और पत्नी के नाम पर गैस एजेंसी का संचालन हो रहा है।

 * शिक्षण संस्थान: गाजीपुर में प्रतिष्ठित डालिम्स सनबीम स्कूल (DALIMSS Sunbeam) की फ्रेंचाइजी अखंड राय के पास है। शिक्षा के मंदिर की आड़ में काले धन को खपाने का यह खेल बेखौफ चल रहा है।


 'गायब' सरकारी अध्यापक और अधिकारियों से सांठगांठ


सिस्टम में भ्रष्टाचार की बानगी देखिये कि अखंड प्रताप राय खुद मछटी इंटर कॉलेज में अध्यापक के पद पर नियुक्त है। लेकिन सूत्रों का दावा है कि वह कभी क्लास लेने नहीं जाता। विद्यालय और विभाग के अधिकारी 'सेट' हैं, जिसके चलते बिना पढ़ाए ही वेतन और पद दोनों सुरक्षित हैं। एक तरफ सरकारी खजाने से वेतन और दूसरी तरफ माफिया के खजाने का प्रबंधन—यह दोहरा चरित्र आज तक जांच की आंच से बचा हुआ है।


 जांच एजेंसियों की खामोशी पर सवाल


इतने संगीन आरोपों, इनामी अपराधियों से नजदीकी और अकूत बेनामी संपत्ति के बावजूद अखंड प्रताप राय पर अब तक कोई बड़ी कार्रवाई न होना सवाल खड़े करता है। क्या प्रशासन को इस 'कुबेर' की जानकारी नहीं है, या फिर रसूख के आगे सिस्टम नतमस्तक है?

जनता और जागरूक नागरिक अब यह मांग कर रहे हैं कि मुख्तार अंसारी के आर्थिक साम्राज्य की कमर तोड़ने के लिए अखंड प्रताप राय की संपत्तियों और संबंधों की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।

निष्कर्ष

यह खबर प्रशासन के लिए एक 'वेक-अप कॉल' है। यदि टावरों के डीजल सिंडिकेट और बेनामी संपत्तियों की कड़ियां जोड़ी जाएं, तो पूर्वांचल में अपराध के एक बड़े आर्थिक नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता है।



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