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विशेष रिपोर्ट: 'रील' की दुनिया से 'रियल' क्राइम तक: पूर्वांचल में स्टंटबाजी और 'डिजिटल गैंग' का नया रक्तचरित्र
by on | 2025-11-25 00:27:22
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वाराणसी/गाजीपुर: पूर्वांचल की फिजा बदल रही है। कभी यहां बाहुबल और बंदूकों की गूंज से दहशत फैलाई जाती थी, लेकिन अब अपराध का तरीका 'हाइटेक' हो गया है। बनारस की सड़कों पर जानलेवा स्टंट से लेकर गाजीपुर के गांवों में पनपते 'डिजिटल गैंग' तक, युवाओं का एक बड़ा वर्ग 'लाइक' और 'शेयर' की भूख में जुर्म के दलदल में धंस रहा है।
सड़क पर स्टंट: अपराध की पहली सीढ़ी
वाराणसी के कैंट थाना क्षेत्र में हाल ही में जो हुआ, वह महज ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि एक खतरनाक मानसिकता का परिचय है। पुलिस ने मयंक और आकाश नामक दो युवकों को गिरफ्तार किया। बिना नंबर की पल्सर और बिना ड्राइविंग लाइसेंस के ये युवा हाईवे पर मौत का खेल खेल रहे थे—सिर्फ इसलिए ताकि सोशल मीडिया पर उनकी 'रील' वायरल हो सके।
कैंट इंस्पेक्टर शिवकांत मिश्र की तत्परता से ये सलाखों के पीछे हैं, लेकिन उनके हाथों पर बने टैटू इस बात का संकेत हैं कि ये किसी बड़े 'गैंग कल्चर' से प्रभावित हो रहे थे। पुलिस का मानना है कि स्टंटबाजी अब शौक नहीं, बल्कि खुद को 'निडर' साबित करने का एक जरिया बन गई है, जो अंततः बड़े अपराध की ओर ले जाती है।
'7272' से शुरू हुआ डिजिटल गैंग का सफर
पूर्वांचल में 'डिजिटल गैंग' का उदय अचानक नहीं हुआ। इसकी जड़ें '7272 गैंग' (अतुल राय की विंग) से जुड़ी मानी जाती हैं, जिसका नेटवर्क कभी कुशीनगर से लेकर वाराणसी तक फैला था। अब यह मॉडल गांवों तक पहुंच चुका है।
गाजीपुर जैसे जिलों में अब ऐसे छोटे-छोटे गिरोह तैयार हो रहे हैं जो जमीन पर कम और सोशल मीडिया पर अपना 'टेरर' ज्यादा दिखाते हैं। इनका मकसद होता है—इलाके में दहशत फैलाना ताकि रंगदारी और वर्चस्व कायम किया जा सके।
गाजीपुर का सेमरा कांड: डिजिटल वार का खूनी अंजाम
गाजीपुर के मुहम्मदाबाद थाना क्षेत्र के सेमरा गांव में हुआ हालिया गोलीकांड इसी 'डिजिटल गैंगवार' का नतीजा बताया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि वर्चस्व की यह लड़ाई सोशल मीडिया पर दी गई धमकियों से शुरू होकर अब गोलियों तक आ पहुंची है।
हालांकि, पुलिस अब इस नए पैटर्न को समझ चुकी है। सूत्रों के अनुसार, सेमरा कांड में शामिल दोनों गैंगों की पूरी 'कुंडली' पुलिस के हाथ लग चुकी है। पुलिस केवल हत्यारों को नहीं, बल्कि इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की तैयारी में है।
योगी सरकार की सख्ती और भविष्य की चुनौती
योगी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत पुलिस को स्पष्ट निर्देश हैं कि सोशल मीडिया पर हथियार लहराने वालों या स्टंट करने वालों को बख्शा न जाए। वाराणसी में पुलिस की हालिया कार्रवाई इसी सख्ती का हिस्सा है। लेकिन गाजीपुर में गैंगों पर कार्यवाही होगी यह रेंज के अधिकारीयों की गतिविधी से प्राप्त हो रही है जैसा सुत्रों का कहना है।
यह वक्त समाज के लिए भी चिंतन का है। जब युवाओं के हाथों में किताबों की जगह बिना नंबर की बाइक और कट्टे होंगे, और उनका रोल मॉडल कोई वैज्ञानिक नहीं बल्कि कोई 'डिजिटल डॉन' होगा, तो परिणाम सेमरा गोलीकांड जैसे ही सामने आएंगे। पुलिस अपना काम कर रही है, लेकिन 'रील' के नशे में बर्बाद होती इस पीढ़ी को बचाने की जिम्मेदारी समाज की भी है।
निष्कर्ष:
यह रिपोर्ट बताती है कि कैसे एक साधारण स्टंट वीडियो और एक संगठित गिरोह के बीच की दूरी अब खत्म हो रही है। प्रशासन की सख्ती जरूरी है, ताकि 'डिजिटल टेरर' का यह नया अध्याय शुरू होने से पहले ही खत्म किया जा सके।