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‘महिला को मज़ाक का विषय बनाना गलत’, संदीप दीक्षित की टिप्पणी पर मनोज झा ने जताई आपत्ति

by on | 2026-08-14 14:59:42

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‘महिला को मज़ाक का विषय बनाना गलत’, संदीप दीक्षित की टिप्पणी पर मनोज झा ने जताई आपत्ति

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित की इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर की गई टिप्पणी पर राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि किसी महिला को सार्वजनिक मंच पर मज़ाक का विषय बनाना उचित नहीं है, चाहे वह किसी देश की राष्ट्राध्यक्ष ही क्यों न हो।

मनोज झा ने कहा कि यह मामला केवल किसी विदेशी नेता के सम्मान से जुड़ा नहीं है, बल्कि सार्वजनिक जीवन में भाषा और संवाद की गरिमा से भी जुड़ा है।

मनोज झा ने क्या कहा?

मनोज झा ने कहा कि किसी भी महिला को ऐसी टिप्पणी के जरिए मज़ाक का विषय बनाना गलत है। उनके मुताबिक, राजनीतिक असहमति अपनी जगह है, लेकिन सार्वजनिक संवाद में भाषा की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि विपक्ष की लड़ाई केवल भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ राजनीतिक मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक संवाद की गरिमा बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

संदीप दीक्षित की टिप्पणी पर आपत्ति

‘रचनात्मक कांग्रेस’ के राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर टिप्पणी कर रहे थे। इसी दौरान मंच पर मौजूद संदीप दीक्षित ने जॉर्जिया मेलोनी का जिक्र किया था।

इस टिप्पणी के बाद भारतीय जनता पार्टी के कई नेताओं ने कांग्रेस पर निशाना साधा और इसे महिला विरोधी तथा राजनीतिक शालीनता के खिलाफ बताया।

अब मनोज झा ने भी इस टिप्पणी को अनुचित बताते हुए विपक्ष के नेताओं को भाषा की मर्यादा बनाए रखने की सलाह दी है।

‘50 करोड़ की गर्लफ्रेंड’ जैसे बयान भी गलत

मनोज झा ने कहा कि ‘50 करोड़ की गर्लफ्रेंड’ जैसे बयान भी सार्वजनिक संवाद के स्तर को नीचे गिराते हैं। उनका कहना था कि यदि विपक्षी दलों की ओर से भी इसी तरह की भाषा का इस्तेमाल होने लगे तो यह लोकतांत्रिक राजनीति में स्वीकार्य मानकों के खिलाफ होगा।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को अपने विरोधियों पर हमला करते समय ऐसी भाषा से बचना चाहिए जिससे व्यक्तिगत या लैंगिक अपमान का संदेश जाए।

शीतकालीन सत्र में भाषा पर चर्चा का सुझाव

मनोज झा ने सुझाव दिया कि सत्ता पक्ष और विपक्ष को संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में कम से कम 48 घंटे इस विषय पर चर्चा के लिए रखने चाहिए कि राजनीतिक दल एक-दूसरे से किस तरह की भाषा में संवाद करें।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति स्वाभाविक है और राजनीतिक दलों को एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव भी लड़ना है, लेकिन इसके बावजूद सार्वजनिक संवाद की गरिमा बनाए रखना जरूरी है।

राजनीतिक मर्यादा पर फिर बहस

संदीप दीक्षित की टिप्पणी को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच चल रहे विवाद के बीच मनोज झा की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उन्होंने किसी एक दल के बजाय राजनीतिक संवाद के व्यापक स्तर पर सवाल उठाया है।

उनका कहना है कि लोकतंत्र में तीखी असहमति हो सकती है, लेकिन भाषा की मर्यादा ऐसी होनी चाहिए जिससे राजनीतिक बहस व्यक्तिगत और अपमानजनक टिप्पणी में न बदल जाए।



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