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नालसार छात्रों के विरोध पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CJI सूर्यकांत ने BCI से पूछा- ‘उन्हें कौन रोक सकता है?’

by on | 2026-08-14 14:38:36

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नालसार छात्रों के विरोध पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CJI सूर्यकांत ने BCI से पूछा- ‘उन्हें कौन रोक सकता है?’

नई दिल्ली: नालसार विश्वविद्यालय के छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध के खिलाफ बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कड़ी नाराजगी जताई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार है और बार काउंसिल का इस मामले में दखल देना उचित नहीं था।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को नालसार विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने के विरोध में कुछ छात्रों ने अभियान चलाया। इसके बाद BCI ने विश्वविद्यालय के 2026 बैच के छात्रों के अधिवक्ता के रूप में नामांकन पर रोक लगाने का निर्देश जारी किया था। बाद में BCI ने अपना यह निर्देश वापस ले लिया।

CJI सूर्यकांत ने BCI पर क्यों जताई नाराजगी?

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि अगर छात्रों के पास विरोध करने का कोई कारण है और वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं तो उन्हें ऐसा करने का अधिकार है।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर छात्रों को कोई शिकायत थी तो वे उन्हें सीधे पत्र लिख सकते थे और यह मामला छात्रों तथा उनके बीच संवाद का विषय है। CJI ने BCI की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा कि बार काउंसिल को इस मामले में हस्तक्षेप करने की जरूरत ही क्यों पड़ी।

उन्होंने अपने छात्र जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि वह खुद छात्र गतिविधियों में शामिल रहे हैं और शांतिपूर्ण विरोध को रोका नहीं जाना चाहिए।

‘भले वे गलत हों, उन्हें विरोध का अधिकार है’

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यदि छात्र कानूनी और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं तो उनकी बात सुनी जानी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि ऐसे छात्रों को कौन रोक सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में BCI की कार्रवाई को अनुचित बताते हुए छात्रों और शिक्षकों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई से फिलहाल सुरक्षा दी है। अदालत ने BCI से इस मामले पर जवाब भी मांगा है।

BCI ने अपना फैसला वापस लिया

विवाद बढ़ने के बाद BCI ने नालसार के 2026 बैच के छात्रों के नामांकन पर रोक लगाने वाला अपना आदेश वापस ले लिया। BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने बाद में इसे जल्दबाजी में लिया गया फैसला बताया और कहा कि अब मामले को बंद कर दिया गया है।

BCI से जुड़े घटनाक्रम पर उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, परिषद ने बाद में यह भी स्पष्ट किया कि पूरे बैच को लेकर आगे दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

आखिर किस बात का विरोध कर रहे थे छात्र?

नालसार विश्वविद्यालय में कुछ छात्रों ने दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने का विरोध किया था। छात्रों की आपत्ति उनके कुछ कथित रुख और हाल की घटनाओं से जुड़ी बताई गई थी। रिपोर्टों के अनुसार, करीब 450 छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की थी।

इसके बाद विवाद केवल विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित नहीं रहा और BCI की कार्रवाई ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर बहस का विषय बना दिया।

BCI की भूमिका पर भी उठे सवाल

सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर ने BCI के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस कार्रवाई को अधिकृत करने वाली किसी परिषद बैठक का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। उन्होंने BCI के कामकाज और निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए।

BCI की ओर से अदालत में पेश वकील ने बताया कि विवादित फैसला वापस लिया जा चुका है।

मामले ने खड़े किए बड़े सवाल

नालसार प्रकरण ने छात्र विरोध, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पेशेवर नियामक संस्थाओं की सीमाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से एक बात स्पष्ट है कि शांतिपूर्ण छात्र विरोध को केवल असहमति के आधार पर दंडित नहीं किया जा सकता। वहीं, अदालत के सामने अब यह सवाल भी है कि BCI ने किस अधिकार और प्रक्रिया के तहत पूरे 2026 बैच के छात्रों के नामांकन को प्रभावित करने का निर्देश दिया था।

मामले में आगे की सुनवाई के दौरान BCI के जवाब से इस विवाद के कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।



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