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योगी आदित्यनाथ बोले- ‘1947 का बंटवारा कांग्रेस की कायरता का प्रमाण’, कहा- मोदी जैसा नेतृत्व होता तो देश नहीं बंटता

by on | 2026-08-14 14:37:34

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योगी आदित्यनाथ बोले- ‘1947 का बंटवारा कांग्रेस की कायरता का प्रमाण’, कहा- मोदी जैसा नेतृत्व होता तो देश नहीं बंटता

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के मौके पर 1947 के भारत विभाजन को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश का बंटवारा कांग्रेस की ‘कायरता’ और ‘बुजदिली’ का परिणाम था। योगी ने यह भी कहा कि अगर उस समय सरदार वल्लभभाई पटेल देश के प्रधानमंत्री होते या नरेंद्र मोदी जैसा नेतृत्व होता तो देश का विभाजन नहीं होता।

योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को लखनऊ स्थित लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने विभाजन के समय हुई हिंसा और विस्थापन की घटनाओं को याद करते हुए कहा कि लाखों हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन लोगों की जान गई और बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा।

‘बंटवारा कांग्रेस की बुजदिली का परिणाम’

मुख्यमंत्री ने कहा कि 1947 में देश के विभाजन का फैसला कांग्रेस के कमजोर नेतृत्व का परिणाम था। उनके अनुसार, अगर उस समय देश के नेतृत्व में मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति होती तो भारत का विभाजन रोका जा सकता था।

उन्होंने कहा कि सरदार पटेल जैसे नेता के प्रधानमंत्री होने पर भी स्थिति अलग हो सकती थी और नरेंद्र मोदी जैसा नेतृत्व होता तो देश का कोई भी व्यक्ति या हिस्सा कमजोर नहीं पड़ता।

देश के कमजोर होने की वजह क्या बताई?

योगी आदित्यनाथ ने भारत के गुलाम होने के पीछे 2 प्रमुख कारण बताए। उन्होंने कहा कि आपसी अंतर्विरोध और षड्यंत्रों ने देश को कमजोर किया।

उन्होंने जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर होने वाले मतभेदों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके कारण लोग सामूहिक रूप से एकजुट होकर मुकाबला नहीं कर सके। इसका परिणाम लंबे समय तक चली गुलामी के रूप में सामने आया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राचीन काल से एक माने जाने वाले भारत को धीरे-धीरे अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया गया।

विभाजन के बाद संपत्तियों के बंटवारे का आरोप

योगी आदित्यनाथ ने आजादी के बाद की सरकारों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाजन के बाद शत्रु संपत्तियों का उचित उपयोग नहीं हुआ और संपत्तियों के बंटवारे में अनियमितताएं हुईं।

मुख्यमंत्री के अनुसार, पाकिस्तान से भारत आए हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध शरणार्थियों के पुनर्वास के लिए इन संपत्तियों का उपयोग किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा पर्याप्त रूप से नहीं किया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन और संपत्तियों के बंटवारे में निजी हित हावी रहे।

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर भी निशाना

योगी ने कांग्रेस के साथ समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दलों की राजनीति आज भी समाज को बांटने वाली है।

उन्होंने कहा कि देश और समाज को विभाजित करने वाली राजनीति से किसी को लाभ नहीं होगा और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना जरूरी है।

लखनऊ में निकाला गया पैदल मार्च

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर लखनऊ में पटेल प्रतिमा से लोकभवन तक पैदल मार्च भी निकाला गया। इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और अन्य भाजपा नेता शामिल हुए।

इस कार्यक्रम के जरिए विभाजन के दौरान मारे गए और विस्थापित हुए लोगों को याद किया गया तथा राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता का संदेश देने की कोशिश की गई।

बेबाक24 न्यूज़: विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर योगी आदित्यनाथ के बयान के बाद 1947 के विभाजन को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ने इसके लिए कांग्रेस के तत्कालीन नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया, जबकि विभाजन का इतिहास कई राजनीतिक, सामाजिक और औपनिवेशिक परिस्थितियों से जुड़ा रहा है।



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