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23 नवम्बर को नक्सली मनाएंगे 'प्रतिरोध दिवस', कमांडर हिडमा की मौत के विरोध में जारी किया प्रेसनोट; सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर

by admin@gmail.com on | 2025-11-22 10:50:05

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23 नवम्बर को नक्सली मनाएंगे 'प्रतिरोध दिवस', कमांडर हिडमा की मौत के विरोध में जारी किया प्रेसनोट; सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर

रायपुर/जगदलपुर: छत्तीसगढ़ और उससे सटे नक्सल प्रभावित राज्यों में एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। माओवादियों के शीर्ष संगठन ने एक प्रेस नोट जारी कर आगामी 23 नवम्बर को 'प्रतिरोध दिवस' (Resistance Day) के रूप में मनाने का आह्वान किया है। यह आह्वान विशेष रूप से सुरक्षा बलों के साथ हुई हालिया मुठभेड़ों में उनके कथित शीर्ष कमांडर हिडमा के मारे जाने के विरोध में किया गया है।

प्रेसनोट में क्या है आह्वान?

माओवादी संगठन (सीपीआई-माओवादी) द्वारा जारी इस प्रेस नोट में अपने कैडर, स्थानीय समर्थकों और जनता से 23 नवम्बर को सड़कों पर उतरने, व्यापक विरोध प्रदर्शन करने और सुरक्षा बलों की कार्रवाई की निंदा करने की अपील की गई है।

- श्रद्धांजलि: माओवादियों ने इस दिन को 'शहीद' किए गए अपने साथियों, विशेषकर कमांडर हिडमा, को श्रद्धांजलि देने के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।

- प्रदर्शन का उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे 'ऑपरेशन' और हिडमा की मौत के विरोध में अपनी ताकत का प्रदर्शन करना है।

 * सामान्य जनजीवन पर असर: नक्सली अक्सर ऐसे आयोजनों के दौरान स्थानीय क्षेत्र में बंद (Bandh) का आह्वान करते हैं, जिससे परिवहन और सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होता है।


 कौन था हिडमा?

हिडमा दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) का एक प्रमुख चेहरा और माओवादियों की पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) की बटालियन नंबर-1 का प्रमुख कमांडर माना जाता रहा है। कई बड़े और घातक हमलों में उसकी संलिप्तता रही है। हालांकि सुरक्षा बल कई बार उसकी मौत का दावा कर चुके हैं, लेकिन माओवादियों ने हमेशा इन दावों का खंडन किया है।

हाल ही में हुई एक बड़ी मुठभेड़ के बाद उसकी मौत की खबरें फिर से आई थीं, जिसके बाद अब माओवादियों ने खुद ही 'प्रतिरोध दिवस' का आह्वान कर एक तरह से अपने बड़े कमांडर के नुकसान की पुष्टि की है। सुरक्षा एजेंसियां इसे नक्सली नेतृत्व के लिए एक बड़ा झटका मान रही हैं।


 सुरक्षा बलों ने बढ़ाई चौकसी

नक्सलियों के इस ऐलान के तुरंत बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग, महाराष्ट्र के गढ़चिरौली और तेलंगाना के कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।

- सघन जाँच: संवेदनशील मार्गों पर गश्त (पेट्रोलिंग) बढ़ा दी गई है और संदिग्ध वाहनों की सघन जाँच शुरू कर दी गई है।

- एंटी-नक्सल ऑपरेशन: खुफिया सूचनाओं के आधार पर नक्सल विरोधी अभियान (Anti-Naxal Operations) तेज कर दिए गए हैं ताकि नक्सलियों के किसी भी बड़े जमावड़े या हिंसक कार्रवाई को रोका जा सके।

- रेलवे और परिवहन पर ध्यान: रेलवे लाइनों और प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि नक्सली अक्सर विरोध प्रदर्शन के दौरान इन्हें निशाना बनाते हैं।

माओवादियों का यह कदम स्पष्ट रूप से सरकार और सुरक्षा बलों पर दबाव बनाने की कोशिश है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत दें और 23 नवम्बर को अनावश्यक यात्रा से बचें।



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