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सेबी का बड़ा एक्शन! सुभाष चंद्रा और पुनीत गोयनका पर 1 साल का बैन; ज़ी एंटरटेनमेंट पर भी पेनल्टी

by admin@bebak24.com on | 2026-08-01 15:07:57

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सेबी का बड़ा एक्शन! सुभाष चंद्रा और पुनीत गोयनका पर 1 साल का बैन; ज़ी एंटरटेनमेंट पर भी पेनल्टी

मुंबई : भारतीय बाजार नियामक सेबी ने एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा और ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइज लिमिटेड के सीईओ पुनीत गोयनका पर शेयर बाजार से जुड़ी गतिविधियों में भाग लेने पर एक साल का प्रतिबंध लगा दिया है।

इसके साथ ही सेबी ने ज़ी एंटरटेनमेंट पर भी दो महीने की पाबंदी लगाई है और तीनों पर कुल 1.48 करोड़ रुपये का जुर्माना ठोका है।

जुर्माने का विवरण और समय-सीमा

सेबी ने तीनों पक्षों पर अलग-अलग जुर्माना तय करते हुए 45 दिनों के भीतर राशि जमा करने का सख्त निर्देश दिया है:

  • सुभाष चंद्रा: ₹60 लाख का जुर्माना

  • पुनीत गोयनका: ₹58 लाख का जुर्माना

  • ज़ी एंटरटेनमेंट : ₹30 लाख का जुर्माना

क्या है पूरा मामला?

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, यह कार्रवाई 27 दिसंबर 2018 को हुए एक 'डिपॉजिट एंड डिक्लेरेशन एग्रीमेंट' से जुड़ी हुई है:

  • हैदराबाद संपत्ति का दुरुपयोग: ज़ी एंटरटेनमेंट की हैदराबाद स्थित कीमती संपत्ति के ओरिजिनल कागजात इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के पास गिरवी रखे गए थे। इस संपत्ति का इस्तेमाल एस्सेल ग्रुप और एस्सेल होम की अन्य कंपनियों के कर्ज़ की गारंटी के रूप में किया गया था।

  • ऑडिट समिति की अनदेखी: इस समझौते के लिए कंपनी की ऑडिट समिति से पूर्व मंजूरी नहीं ली गई थी, जो सेबी के LODR नियमों का सीधा उल्लंघन है।

  • वित्तीय रिपोर्ट में छुपाया: सेबी ने पाया कि ज़ी एंटरटेनमेंट ने अपनी वित्तीय रिपोर्ट और डिस्क्लोजर में इस लेन-देन की जानकारी शेयरधारकों और निवेशकों से छिपाई।

सेबी की जांच में हुए खुलासे

  • पद का गलत इस्तेमाल: सेबी ने अपने आदेश में कहा कि सुभाष चंद्रा ने ज़ी एंटरटेनमेंट के चेयरमैन पद का दुरुपयोग किया। उन्होंने बोर्ड और प्रबंधन की मंजूरी के बिना ही संपत्ति के कागजात इंडियाबुल्स को सौंपे थे।

  • जून 2020 तक बंधक रहे कागजात: जांच में स्पष्ट हुआ कि पुनीत गोयनका और सुभाष चंद्रा को भली-भांति पता था कि कंपनी की संपत्ति को निजी कर्ज़ों की गारंटी के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है और मूल दस्तावेज जून 2020 तक लेंडर के पास पड़े रहे।

बेबाक24 टेक

कॉर्पोरेट गवर्नेंस में पारदर्शिता की अनदेखी का खामियाजा एस्सेल ग्रुप को भुगतना पड़ रहा है। सेबी का यह कड़ा फैसला भारतीय पूंजी बाजार में छोटे शेयरधारकों के हितों की रक्षा और प्रमोटरों द्वारा कंपनी परिसंपत्तियों के निजी इस्तेमाल पर एक कड़ा संदेश है।



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