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हमास के हथियार छोड़ने के फैसले पर आया पाकिस्तान का बयान; पीएम शहबाज शरीफ ने ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' का किया स्वागत

by admin@bebak24.com on | 2026-08-01 14:57:23

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हमास के हथियार छोड़ने के फैसले पर आया पाकिस्तान का बयान; पीएम शहबाज शरीफ ने ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' का किया स्वागत

इस्लामाबाद : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर तैयार की गई गाजा शांति योजना के तहत हमास द्वारा कुछ शर्तों पर हथियार डालने के फैसले का पाकिस्तान ने स्वागत किया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए इसे मध्य पूर्व में शांति की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।

पीएम शहबाज शरीफ का बयान और प्रमुख मांगें

  • ट्रंप के नेतृत्व की तारीफ: शहबाज शरीफ ने लिखा, "पाकिस्तान गाजा शांति योजना के तहत हथियार छोड़ने की प्रक्रिया को लागू करने की दिशा में 'बोर्ड ऑफ पीस' के तहत हुई प्रगति का स्वागत करता है। राष्ट्रपति ट्रंप के साहसिक नेतृत्व में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।"

  • मध्यस्थ देशों की सराहना: उन्होंने इस समझौते को धरातल पर लाने के लिए अमेरिका, मिस्र, कतर और तुर्की के राजनयिक प्रयासों की सराहना की।

  • 1967 की सीमाओं पर स्वतंत्र फलस्तीन की शर्त: शहबाज शरीफ ने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया के तहत 1967 से पहले की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र और संप्रभु फलस्तीन देश का गठन होना चाहिए, जिसकी राजधानी अल-कुद्स अल-शरीफ हो।

क्या है 'बोर्ड ऑफ पीस' और हमास का रुख?

  • ट्रंप का दावा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में घोषणा की थी कि उनके 'बोर्ड ऑफ पीस' ने गाजा में हमास और अन्य सशस्त्र गुटों के साथ एक ऐतिहासिक समझौता किया है, जिसके तहत वे पूरी तरह से निरस्त्रीकरण के लिए तैयार हो गए हैं।

  • हमास की पुष्टि: हमास के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी से बातचीत में पुष्टि की कि संगठन ने गाजा में 'बोर्ड ऑफ पीस' के निरस्त्रीकरण प्रस्ताव पर अपनी सहमति जताई है, बशर्ते फलस्तीनी जनता के अधिकारों की गारंटी दी जाए।

बेबाक24 टेक

हमास द्वारा हथियार डालने का फैसला गाजा युद्ध में एक बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हो सकता है। डोनाल्ड ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' के तहत इस प्रगति से मध्य पूर्व में दशकों पुराने संघर्ष के थमने की उम्मीद जगी है। हालांकि, 1967 की सीमाओं और यरुशलम के मुद्दे पर इजरायल का रुख क्या रहता है, यह देखना इस शांति प्रक्रिया की असल परीक्षा होगी।



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