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जंतर-मंतर पर 'गोली चलाने' की वकालत करने वाले RSS विचारक टीजी मोहनदास पर केस दर्ज; 'प्रदर्शनकारी महिलाओं पर दिए थे शर्मनाक बयान'

by on | 2026-07-29 15:21:14

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जंतर-मंतर पर 'गोली चलाने' की वकालत करने वाले RSS विचारक टीजी मोहनदास पर केस दर्ज; 'प्रदर्शनकारी महिलाओं पर दिए थे शर्मनाक बयान'

तिरुवनंतपुरम: दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा धांधली के विरोध में प्रदर्शन कर रहे 'जेन ज़ी' (Gen-Z) और युवाओं के खिलाफ विवादित व भड़काऊ टिप्पणी करना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के विचारक और यूट्यूबर टीजी मोहनदास  को भारी पड़ गया है।

केरल की तिरुवनंतपुरम साइबर पुलिस ने जंतर-मंतर पर छात्रों को निशाना बनाने, हिंसा भड़काने और महिलाओं पर अत्यंत आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में टीजी मोहनदास के खिलाफ आपराधिक धाराओं में FIR दर्ज कर ली है।

"कर्फ्यू लगाकर गोली चला देता, 4 घंटे में शांति हो जाती"— यूट्यूब पर दिया था भड़काऊ बयान

समाचार एजेंसी एएनआई  के अनुसार, टीजी मोहनदास अपने यूट्यूब चैनल 'पत्रिका'  पर एक वीडियो जारी कर प्रदर्शनकारी युवाओं पर भड़के थे।

वीडियो में उन्होंने हिंसक कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा था:

टीजी मोहनदास का कथित बयान:

"अगर मैं जिम्मेदारी में होता, तो जंतर-मंतर के चार वर्ग किलोमीटर के इलाके में कर्फ्यू लगा देता। लोगों से तीन बार वहां से हटने के लिए कहता और इसके बाद सीधे गोली चलवा देता। लोग भाग जाते, कुछ मर जाते, कुछ बच जाते और कुछ के हाथ-पैर चले जाते... चार घंटे के भीतर स्थिति पूरी तरह शांत हो जाती। पुलिस को प्रदर्शनकारियों को पीटना चाहिए।"

इतना ही नहीं, मोहनदास ने प्रदर्शन में शामिल युवा महिलाओं और छात्राओं को लेकर भी बेहद अश्लील व आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिसको लेकर देशभर में भारी आक्रोश फैल गया।

BNS और IT एक्ट की गंभीर धाराओं में FIR दर्ज

'बार एंड बेंच' की रिपोर्ट के मुताबिक, कई शिकायतों और जनआक्रोश के बाद तिरुवनंतपुरम साइबर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और आईटी कानून के तहत मामला दर्ज किया है:

  • भारतीय न्याय संहिता (BNS) धारा 192: दंगा भड़काने के इरादे से उकसावा देना।

  • BNS धारा 353(1)(B): सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने या हिंसा भड़काने के उद्देश्य से भ्रामक/विवादास्पद बयान प्रकाशित या प्रसारित करना।

  • IT एक्ट धारा 66 व केरल पुलिस एक्ट 120(o): डिजिटल माध्यम से अश्लीलता, धमकी और उपद्रव फैलाना।

बेबाक24 टेक

शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों की मांग कर रहे युवाओं और छात्राओं के खिलाफ हिंसा और गोलीबारी को सही ठहराना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता। पुलिस की यह त्वरित कानूनी कार्रवाई यह संदेश देती है कि डिजिटल स्पेस और सोशल मीडिया का इस्तेमाल हिंसा या नफरत फैलाने के लिए करने वालों पर कानून का शिकंजा कसना तय है।



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