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"सरकार सुप्रीम कोर्ट का कर रही सियासी इस्तेमाल"— CJP का केंद्र पर बड़ा हमला; छात्रों पर कार्रवाई रुकी नहीं तो फिर से आंदोलन की चेतावनी

by on | 2026-07-29 14:22:12

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"सरकार सुप्रीम कोर्ट का कर रही सियासी इस्तेमाल"— CJP का केंद्र पर बड़ा हमला; छात्रों पर कार्रवाई रुकी नहीं तो फिर से आंदोलन की चेतावनी

नई दिल्ली : नीट परीक्षा धांधली के विरोध में जंतर-मंतर पर चले 36 दिनों के ऐतिहासिक प्रदर्शन के समाप्त होने के ठीक बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी ने केंद्र की मोदी सरकार पर समझौते का उल्लंघन करने और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आड़ में आंदोलनकारी छात्रों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है।

सीजेपी के संस्थापकों और प्रवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारी छात्रों को डिटेन करने और डराने-धमकाने का सिलसिला तुरंत बंद नहीं हुआ, तो वे पूरे देश में दोबारा बड़ा आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे।

'सुप्रीम कोर्ट का सियासी इस्तेमाल बंद करे सरकार'— सौरव दास

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आदेश दिया था कि प्रदर्शनकारियों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए, लेकिन यह छूट आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों पर लागू नहीं होगी। इसी शर्त का हवाला देकर पुलिस द्वारा छात्रों पर दर्ज FIR जारी रखने पर सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने कड़ी आपत्ति जताई:

सौरव दास (प्रवक्ता, CJP):

"सुप्रीम कोर्ट का राजनीतिक इस्तेमाल सरकार के फायदे के लिए नहीं किया जा सकता। देश के सामने सभी एफ़आईआर वापस लेने का वादा किया गया था। अगर कोई अपराधी खुला घूम रहा था, तो पुलिस को पुराने मामलों में जमानत रद्द करानी चाहिए थी। लेकिन सरकार इस बहाने का इस्तेमाल बेगुनाह छात्रों को फंसाने और निशाना बनाने के लिए नहीं कर सकती।"

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: नाबालिगों की रिहाई और राज्यों को नोटिस

CJI जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान अहम आदेश दिए:

  • नाबालिगों की रिहाई: विभिन्न राज्यों में पुलिस कस्टडी में लिए गए सभी नाबालिगों को तत्काल रिहा करने के निर्देश।

  • 6 राज्यों को नोटिस: पुलिस की कथित ज्यादतियों और हिंसा की निष्पक्ष जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाने से पहले सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, यूपी, बिहार, महाराष्ट्र, एमपी और केरल के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी किया है।

  • डिजिटल सबूत सुरक्षित करने के निर्देश: शीर्ष अदालत ने प्रदर्शन से जुड़े सभी CCTV फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग और वायरलेस कॉल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का आदेश दिया।

"केंद्रीय मंत्रियों के वादे की कोई वैल्यू नहीं?"— अभिजीत दीपके और आशुतोष रांका

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा, "कई राज्यों की पुलिस छात्रों को जबरन उठाकर ले जा रही है और डरा रही है। अगर छात्रों को डिटेन करना और गिरफ्तारियां बंद नहीं हुईं, तो हम फिर से सड़कों पर उतरेंगे।"

वहीं प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि 25 जुलाई को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ हुई बैठक में यह साफ वादा किया गया था कि किसी भी छात्र पर कार्रवाई नहीं होगी। "अगर केंद्रीय मंत्रियों के दिए आश्वासन की कोई वैल्यू नहीं है, तो सरकार में किसकी वैल्यू है?"

दिल्ली पुलिस पर सनसनीखेज आरोप: 'जंतर-मंतर पर जानबूझकर लाया गया पत्थरों से भरा ट्रक'

न्यूज़लॉन्ड्री  की एक जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए CJP ने दावा किया है कि 20 जुलाई को 'संसद मार्च' के दौरान जंतर-मंतर के पास जो पत्थरों से भरा रहस्यमयी ट्रक मिला था, वह असल में पिछले 4 दिनों से दिल्ली पुलिस की कस्टडी (जब्त वाहनों) में था।

सीजेपी ने 'X' पर पोस्ट कर सवाल उठाया:

"शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रदर्शन को हिंसक बनाने और निर्दोष छात्रों को फंसाने के लिए जब्त पत्थरों से भरे वाहन को भीड़ के बीच खड़ा करने का आदेश किसने दिया? दिल्ली पुलिस तुरंत इसका जवाब दे।"

बेबाक24 टेक

36 दिनों के लंबे संघर्ष, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और केंद्र के आश्वासनों के बाद यह उम्मीद जताई जा रही थी कि गतिरोध खत्म हो जाएगा। लेकिन जिस तरह से अलग-अलग राज्यों में छात्रों पर पुलिसिया कार्रवाई के मामले सामने आ रहे हैं और पत्थरों से भरे ट्रक के खुलासे ने दिल्ली पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं, उससे साफ है कि 'जेन ज़ी' और सरकार के बीच का यह संघर्ष अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है।



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