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नए शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी पर राहुल और प्रियंका का बड़ा हमला; 'बलात्कारियों को बचाने' का आरोप, जोशी ने किया खंडन, मांगी माफी

by on | 2026-07-29 14:16:12

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नए शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी पर राहुल और प्रियंका का बड़ा हमला; 'बलात्कारियों को बचाने' का आरोप, जोशी ने किया खंडन, मांगी माफी

नई दिल्ली: नीट पेपर लीक विवाद के बाद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद नए शिक्षा मंत्री का प्रभार संभालने वाले केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को लेकर संसद से लेकर सड़क तक सियासी घमासान छिड़ गया है।

लोकसभा के अंदर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी और संसद परिसर के बाहर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रल्हाद जोशी पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए शिक्षा मंत्री को"बलात्कारियों का बचाव करने वाला मंत्री" करार दिया है। वहीं, प्रल्हाद जोशी और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इन आरोपों को चरित्र हनन और पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए प्रियंका गांधी से तुरंत माफी मांगने और संसद के नियम 353 के तहत कार्रवाई की मांग की है।

राहुल और प्रियंका गांधी ने क्या लगाए आरोप?

लोकसभा में 'पब्लिक एग्ज़ामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा के दौरान और संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस नेताओं ने प्रल्हाद जोशी पर तीखे हमले किए:

राहुल गांधी (नेता प्रतिपक्ष, लोकसभा):

"छात्रों ने लाठियां खाईं, आंदोलन किया और धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया। लेकिन इसके बाद प्रधानमंत्री ने एक ऐसे व्यक्ति को नया शिक्षा मंत्री चुना जो बलात्कारियों को संरक्षण देता है। प्रल्हाद जोशी हमारी शिक्षा व्यवस्था और देश की करोड़ों युवा छात्राओं का अपमान हैं। भारत की महिलाएं उन्हें कभी स्वीकार नहीं करेंगी।"

प्रियंका गांधी (सांसद, कांग्रेस):

"क्या जरूरत थी प्रदर्शनकारी छात्रों पर आंसू गैस के गोले छोड़ने की, उनकी लाठियां बरसाने की? देश की करोड़ों लड़कियों को प्रधानमंत्री ने नया शिक्षा मंत्री बनाकर क्या संदेश दिया है?"

विवाद की जड़: साल 2022 का 'बिलकिस बानो मामला' और प्रल्हाद जोशी का बयान

राहुल और प्रियंका गांधी के इस हमले का आधार साल 2022 में प्रल्हाद जोशी द्वारा दिया गया एक पुराना बयान है:

  • मामला क्या था? अगस्त 2022 में गुजरात सरकार ने 2002 दंगों के दौरान बिलकिस बानो से सामूहिक दुष्कर्म और परिवार के सदस्यों की हत्या के 11 उम्रकैद की सजा काट रहे दोषियों को समय से पहले रिहा कर दिया था। (हालांकि, जनवरी 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार के इस रिहाई के फैसले को रद्द कर दिया था।)

  • प्रल्हाद जोशी का बयान: उस वक्त एक टीवी चैनल (NDTV) से बात करते हुए प्रल्हाद जोशी ने कहा था कि "जब सरकार और संबंधित समिति ने कानून के तहत प्रक्रिया का पालन करते हुए फैसला लिया है, तो मुझे इसमें कुछ गलत नहीं लगता। जो दोषी पर्याप्त समय जेल में बिता चुके हैं, उनकी रिहाई का कानूनी प्रावधान है।"

  • कांग्रेस का दावा: कांग्रेस का आरोप है कि प्रल्हाद जोशी ने एक तरह से गंभीर अपराध के दोषियों की रिहाई का बचाव और समर्थन किया था।

संसद में भारी हंगामा: प्रल्हाद जोशी और सरकार का तीखा पलटवार

कांग्रेस नेताओं के बयानों पर सत्ता पक्ष ने तुरंत कड़ा ऐतराज जताया और लोकसभा स्पीकर से हस्तक्षेप की मांग की:

  • प्रल्हाद जोशी का जवाब: "प्रियंका जी को इस तरह की झूठी खबर और भ्रामक जानकारी फैलाने के लिए माफी मांगनी चाहिए। मैं सदन में मौजूद हूं, लेकिन मुझे नियम 353 के तहत ऐसा कोई पूर्व नोटिस नहीं दिया गया। इस बयान को तुरंत सदन की कार्यवाही से हटाया जाए (Expunge) और उनके खिलाफ कार्रवाई हो।"

  • किरेन रिजिजू (संसदीय कार्य मंत्री): रिजिजू ने कहा कि बिना किसी पूर्व सूचना या ठोस आधार के नए शिक्षा मंत्री का ऐसा चरित्र हनन करना संसदीय परंपराओं के खिलाफ है।

नियम 353 क्या है?

लोकसभा के नियम 353 के अनुसार, यदि कोई सदस्य किसी मंत्री या अन्य सदस्य पर कोई व्यक्तिगत या गंभीर आरोप लगाना चाहता है, तो उसे पहले लोकसभा अध्यक्ष और संबंधित मंत्री को लिखित रूप से अग्रिम नोटिस देना अनिवार्य है, ताकि मंत्री उसकी जांच कर जवाब दे सकें।

संसद में 'पेपर लीक संशोधन विधेयक 2026' पर चर्चा

हंगामे के बीच संसद के निचले सदन में 'पब्लिक एग्ज़ामिनेशन संशोधन विधेयक, 2026' पर 8 घंटे की लंबी चर्चा जारी रही। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस विधेयक को देश के लाखों युवाओं के भविष्य और परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के लिए ऐतिहासिक कदम बताया।

बेबाक24 टेक

सीजेपी के 36 दिनों के लंबे आंदोलन के बाद धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और नए शिक्षा मंत्री के रूप में प्रल्हाद जोशी की नियुक्ति से उम्मीद थी कि संसद में गतिरोध खत्म होगा। हालांकि, पुराने बयानों को लेकर शुरू हुआ यह नया सियासी संग्राम यह साफ दिखाता है कि नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा आसानी से शांत होने वाला नहीं है।



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