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क्या एक राजनीतिक दल बनेगी सीजेपी ? सौरव दास और आशुतोष रांका के बयानों से मिले राजनीति में आने के संकेत

by admin@bebak24.com on | 2026-07-29 11:36:32

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क्या एक राजनीतिक दल बनेगी सीजेपी ? सौरव दास और आशुतोष रांका के बयानों से मिले राजनीति में आने के संकेत

नई दिल्ली: नीट परीक्षा धांधली और पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर लगातार 36 दिनों तक चले ऐतिहासिक आंदोलन की सफलता और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है— क्या कॉकरोच जनता पार्टी अब एक पूर्ण राजनीतिक दल का रूप लेगी?

मोदी सरकार के अब तक के सबसे असरदार आंदोलनों में से एक की अगुवाई करने वाली सीजेपी की कोर टीम के बयानों ने राजनीति में एंट्री की संभावनाओं को पूरी तरह से खारिज नहीं किया है।

सीजेपी के कोर लीडर्स का क्या है रुख?

आंदोलन के बाद सीजेपी के प्रमुख प्रवक्ताओं और नेताओं के आए बयानों से राजनीति में कदम रखने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं:

सौरव दास (प्रवक्ता, सीजेपी):

"मुझे लगता है कि अब टाइम आ चुका है कि युवा ज़्यादा से ज़्यादा राजनीति में आएं। क्योंकि सत्ता में जो लोग हैं उनकी उम्र 70 साल के करीब हो रही है, उन्हें नहीं पता कि 'जेन ज़ी' क्या और कैसे सोचती है। हम इस मूवमेंट को ग्रासरूट लेवल पर ले जाना चाहते हैं।"

  • आशुतोष रांका (प्रवक्ता, सीजेपी): इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "मैंने अपने छोटे से राजनीतिक करियर से एक ही चीज़ सीखी है कि किसी भी संभावना को सिरे से ख़ारिज नहीं करना चाहिए। सीजेपी युवाओं को अपने मुद्दे उठाने और समाधान पाने का एक सशक्त मंच प्रदान करती रहेगी।"

  • अभिजीत दीपके (संस्थापक, सीजेपी): मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की विवादित टिप्पणी 'कॉकरोच' को आंदोलन का रूप देने वाले अभिजीत दीपके का कहना है कि सार्वजनिक जीवन कठिन है, लेकिन युवाओं की उम्मीदें और समर्थन उन्हें आगे की राह तय करने के लिए प्रेरित कर रहा है।

बिहार-असम के प्रदर्शनकारियों की रिहाई और FIR वापसी पर जारी है लड़ाई

भले ही जंतर-मंतर से टेंट हटा लिए गए हों, लेकिन सीजेपी का नेतृत्व अभी पूरी तरह से राहत के मूड में नहीं है। सौरव दास और रत्ना सिंह ने देर रात जानकारी दी कि बिहार और असम में गिरफ्तार/हिरासत में लिए गए छात्रों की रिहाई और उन पर दर्ज सभी FIR रद्द कराने के लिए सरकार के प्रतिनिधियों के साथ 3 घंटे की मैराथन बैठक हुई है।

सीजेपी ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी एनडीए शासित राज्यों से आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं हो जाते, वे छात्रों के हक की निगरानी जारी रखेंगे।

भारत में राजनीतिक दल गठित करने की कानूनी प्रक्रिया 

यदि सीजेपी खुद को एक राजनीतिक पार्टी के रूप में रजिस्टर कराने का फैसला करती है, तो उसे भारत के निर्वाचन आयोग के नियमों का पालन करना होगा:

  1. आवेदन की समय-सीमा: संस्था गठन के 30 दिनों के भीतर चुनाव आयोग को धारा 29A के तहत आवेदन देना होता है।

  2. समाचार पत्रों में विज्ञापन (सार्वजनिक सूचना): नए नियमों के तहत पार्टी को 2 राष्ट्रीय और 2 स्थानीय दैनिक समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित कराना अनिवार्य है, ताकि यदि किसी नागरिक या संगठन को नाम/गठन पर आपत्ति हो, तो वह आयोग के सामने रख सके।

  3. आवश्यक जानकारी: पार्टी का संविधान, पदाधिकारियों के नाम, बैंक खाते का ब्योरा और आंतरिक लोकतंत्र की शपथ शामिल होती है।

बेबाक24 टेक

भारत के इतिहास में 'आम आदमी पार्टी' से लेकर कई राजनीतिक दलों का जन्म जन-आंदोलनों की कोख से ही हुआ है। 'जेन ज़ी' के मुद्दों को जिस ताकत से सीजेपी ने राष्ट्रीय पटल पर रखा है, उससे यह साफ है कि चाहे वे प्रत्यक्ष रूप से चुनाव लड़ें या फिर एक शक्तिशाली 'प्रेसर ग्रुप' के रूप में काम करें— सीजेपी आने वाले दिनों में देश की राजनीति में युवाओं की आवाज का एक बड़ा केंद्र बनी रहेगी।



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