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जौहर यूनिवर्सिटी ध्वस्तीकरण मामला: AIMPLB ने कार्रवाई को बताया 'राजनीतिक प्रतिशोध', सरकार से रोक की मांग

by on | 2026-07-17 23:37:48

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जौहर यूनिवर्सिटी ध्वस्तीकरण मामला: AIMPLB ने कार्रवाई को बताया 'राजनीतिक प्रतिशोध', सरकार से रोक की मांग

रामपुर। मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की 38 इमारतों पर मंडरा रहे ढहाए जाने के संकट के खिलाफ विरोध अब और तेज हो गया है। रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) द्वारा जारी ध्वस्तीकरण नोटिस पर अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। बोर्ड ने इस प्रशासनिक कदम को पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण और दुर्भावना से प्रेरित बताते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से इस कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है।

​'शिक्षा के खिलाफ बड़ी साजिश': मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

​AIMPLB के प्रवक्ता डॉ. एसक्यूआर इलियास ने एक आधिकारिक बयान जारी कर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा:

​"यह कार्रवाई केवल एक विश्वविद्यालय के खिलाफ नहीं, बल्कि मुस्लिम समुदाय की शैक्षिक प्रगति को रोकने का प्रयास है। एक तरफ जहां सरकारें समुदाय के शैक्षिक पिछड़ेपन को दूर करने में नाकाम रहीं, वहीं दूसरी तरफ समाज के सहयोग से खड़े किए गए संस्थानों को कानूनी पेचीदगियों में उलझाकर निशाना बनाया जा रहा है।"


​बोर्ड ने सीधे तौर पर इस पूरी कवायद को राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा बताया है। डॉ. इलियास के अनुसार, यह कार्रवाई पूर्व मंत्री आजम खान को राजनीतिक रूप से निशाना बनाने की भावना से की जा रही है, जिसका खामियाजा छात्रों और शिक्षा व्यवस्था को भुगतना पड़ रहा है।

​RDA के दावों को दी चुनौती

​रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) का दावा है कि विश्वविद्यालय परिसर की 40 में से 38 इमारतों का निर्माण बिना किसी वैध स्वीकृति या नक्शा पास कराए किया गया है।

​इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने विश्वविद्यालय प्रशासन के हवाले से तर्क दिया कि जब इन इमारतों का निर्माण हुआ था, तब यह पूरा क्षेत्र रामपुर विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) में आता ही नहीं था। ऐसे में आरडीए से किसी भी प्रकार की भवन निर्माण स्वीकृति लेने का कोई कानूनी औचित्य नहीं बनता था।

​संवाद और कानूनी रास्ते की वकालत

​बोर्ड का कहना है कि अगर निर्माण को लेकर कोई तकनीकी या कागजी विसंगतियां हैं भी, तो उसका समाधान 'बुलडोजर कार्रवाई' के बजाय संवाद और कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए किया जाना चाहिए।

  • अपूरणीय क्षति: वर्षों की मेहनत और जनसहयोग से बनी करोड़ों की शैक्षिक संपत्ति को ध्वस्त करना देश के हित में नहीं है।
  • नकारात्मक संदेश: इस तरह की कठोर कार्रवाई से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक गलत और नकारात्मक संदेश जाएगा।

​सरकार से पुनर्विचार की अपील

​अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने उत्तर प्रदेश सरकार और रामपुर प्रशासन से अपील की है कि वे इस संवेदनशील मामले में अपने फैसले पर पुनर्विचार करें। बोर्ड ने मांग की है कि ध्वस्तीकरण के नोटिस को तत्काल वापस लिया जाए और विश्वविद्यालय के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए बीच का रास्ता निकाला जाए।

​फिलहाल, इस नोटिस के बाद से विश्वविद्यालय प्रशासन, छात्रों और क्षेत्र के लोगों में भारी असमंजस और आक्रोश का माहौल बना हुआ है।



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