by admin@bebak24.com on | 2026-07-17 18:31:31
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नई दिल्ली (बेबाक24): ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण दुनिया का सबसे संवेदनशील समुद्री व्यापारिक मार्ग, स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ (होर्मुज़ जलडमरूमध्य), एक बार फिर वैश्विक संकट के केंद्र में है। दोनों देशों के बीच हुए समझौते के टूटने और हमलों के नए सिलसिले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। ऐसे में यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि यदि होर्मुज़ का यह रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध हो जाए, तो क्या दुनिया के पास इसका कोई व्यावहारिक विकल्प मौजूद है?
'बेबाक24' के अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा डेस्क की यह विशेष विश्लेषणात्मक रिपोर्ट:
ईरान और ओमान के बीच स्थित यह संकरा समुद्री रास्ता दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की जीवन रेखा माना जाता है:
विशाल क्षमता: इस जलमार्ग से प्रतिदिन लगभग दो करोड़ बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद गुजरते हैं, जो वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग एक-चौहाई हिस्सा है।
गैस आपूर्ति: कतर जैसे बड़े निर्यातक इसी मार्ग से दुनिया की कुल तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की खपत का लगभग पांचवां हिस्सा भेजते हैं।
एशियाई निर्भरता: इस मार्ग से होने वाले कुल निर्यात का लगभग अस्सी प्रतिशत हिस्सा सीधे एशियाई बाजारों में जाता है।
होर्मुज़ पर निर्भरता को कम करने के लिए खाड़ी के देशों ने पिछले कुछ दशकों में अरबों डॉलर का निवेश कर पाइपलाइनों का जाल बिछाया है, लेकिन इनकी अपनी सीमाएं हैं:
यह लगभग बारह सौ किलोमीटर लंबा नेटवर्क है, जो देश के पूर्वी तेल क्षेत्रों को लाल सागर के तट पर स्थित यनबू टर्मिनल से जोड़ता है। इसकी आपातकालीन क्षमता प्रतिदिन सत्तर लाख बैरल तक बढ़ाई जा सकती है, लेकिन इस मार्ग के पंपिंग स्टेशनों पर पूर्व में ड्रोन हमले हो चुके हैं, जिससे इसकी सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंता बनी रहती है।
लगभग चार सौ छह किलोमीटर लंबी यह पाइपलाइन अबू धाबी के तेल क्षेत्रों को सीधे ओमान की खाड़ी में स्थित फुजैरह बंदरगाह से जोड़ती है। इसके जरिए होर्मुज़ से गुजरे बिना तेल निर्यात संभव है, लेकिन इस क्षेत्र के भंडारण टैंकों पर भी पूर्व में हमले दर्ज किए गए हैं।
स्वयं ईरान ने होर्मुज़ को बायपास करने के लिए लगभग एक हजार किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बनाई है, जिसकी क्षमता प्रतिदिन दस लाख बैरल है। हालांकि, कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और अधूरे बुनियादी ढांचे के कारण इसका पूर्ण उपयोग नहीं हो पाया है।
वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने के लिए कुछ अन्य पुराने और नए प्रस्तावों पर काम चल रहा है:
किरकुक-जेहान पाइपलाइन: यह इराक के किरकुक से तुर्की के जेहान बंदरगाह तक तेल पहुंचाती है। ढाई साल बंद रहने के बाद यह पुनः सक्रिय हुई है, लेकिन इसकी वर्तमान क्षमता प्रतिदिन केवल ढाई लाख बैरल ही है।
फोर सीज परियोजना: इसके तहत सीरिया और तुर्की के रास्ते भूमध्यसागर, काला सागर, कैस्पियन सागर और अरब की खाड़ी को जोड़ने की योजना है।
बसरा-अकाबा परियोजना: इराक के तेल को जॉर्डन के लाल सागर तट पर स्थित अकाबा बंदरगाह तक पहुंचाने का यह प्रस्ताव वित्तीय और राजनीतिक मतभेदों के कारण दशकों से लंबित है।
| मार्ग का नाम | वर्तमान/अधिकतम क्षमता (प्रतिदिन बैरल में) | मुख्य गंतव्य/जोड़ने वाला क्षेत्र |
| स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ | लगभग दो करोड़ (वास्तविक प्रवाह) | वैश्विक बाजार (मुख्यतः एशिया) |
| पेट्रोलाइन (सऊदी अरब) | सत्तर लाख | लाल सागर (यनबू टर्मिनल) |
| अबू धाबी पाइपलाइन | पंद्रह लाख | ओमान की खाड़ी (फुजैरह) |
| सुमेद पाइपलाइन (मिस्र) | महासूत्र क्षमता सत्ताईस लाख | भूमध्यसागर (यूरोप का रास्ता) |
खाड़ी देशों के तमाम प्रयासों के बावजूद सत्य यही है कि वर्तमान में उपलब्ध सभी वैकल्पिक मार्गों की कुल मिलाकर अधिकतम क्षमता भी प्रतिदिन पैंतीस लाख से पपन लाख बैरल के बीच ही सिमट कर रह जाती है। यह आंकड़ा होर्मुज़ से गुजरने वाले दो करोड़ बैरल की तुलना में बेहद मामूली है। कतर जैसे देशों के पास अपनी गैस को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए इस जलमार्ग के अलावा दूसरा कोई बड़ा विकल्प है ही नहीं।
बेबाक24 का मानना है कि यदि होर्मुज़ का मार्ग पूरी तरह बंद होता है, तो वैकल्पिक रास्ते दुनिया की कुछ हद तक मदद जरूर कर सकते हैं, लेकिन वे इसकी पूरी भरपाई करने में पूरी तरह असमर्थ रहेंगे। इसके अलावा, इराक या सीरिया जैसे अशांत क्षेत्रों से गुजरने वाले नए पाइपलाइन मार्ग हमेशा क्षेत्रीय अस्थिरता और आतंकवादी हमलों के साए में रहेंगे। ऐसे में होर्मुज़ जलमार्ग का महत्व कभी कम नहीं हो सकता, क्योंकि भूगोल को बदला नहीं जा सकता।
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