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खाद की कालाबाजारी: लाचार किसान, बेबस सिस्टम!

by admin@bebak24.com on | 2025-11-12 13:26:23

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खाद की कालाबाजारी: लाचार किसान, बेबस सिस्टम!

गाजीपुर ही नहीं, पूरे उत्तर प्रदेश में खाद का गोरखधंधा जारी; करोड़ों का सिंडिकेट सक्रिय


लखनऊ: उत्तर प्रदेश में खाद की कालाबाजारी और ओवर-रेटिंग का सिंडिकेट गाजीपुर समेत पूरे प्रदेश के किसानों को बेबस कर रहा है। हर वर्ष करोड़ों रुपये का अवैध कारोबार हो रहा है, जिसकी जानकारी प्रशासनिक अधिकारियों को होने के बावजूद इस पर नकेल कसना मुश्किल साबित हो रहा है। किसान इसे अपनी नियति मान चुके हैं और जानते हैं कि उनके विरोध से कुछ नहीं होगा, क्योंकि "सब सेट है"।


 प्रदेश भर से कालाबाजारी की खबरें

 * ओवर-रेटिंग और मिलावट: उन्नाव जिले में हाल ही में खाद की कमी के बीच DAP/IFFCO की खाद में मिलावट कर उसे ऊंचे दामों पर बेचने वाले एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। नकली और मिलावटी खाद किसानों की परेशानी और बढ़ा रही है।

 * शिकायतें और कार्रवाई: प्रदेश के अन्य जिलों में भी खाद निर्धारित दर से अधिक कीमत पर बेची जा रही है। किसानों की शिकायत पर सरकार ने कार्रवाई भी की है, जिसके तहत कई खाद विक्रेताओं पर एफआईआर दर्ज की गई हैं, और लाइसेंस रद्द किए गए हैं।

 * किसानों की कतारें: सरकारी समितियों और वितरण केंद्रों के बाहर किसान खाद के लिए लंबी कतारों में खड़े होने को मजबूर हैं।

 * कठोर चेतावनी: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कालाबाजारी के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाने की चेतावनी दी है।


 गाजीपुर में 'जिम्मेदारी' से बचते अधिकारी


जब खाद की कालाबाजारी के संबंध में गाजीपुर डीएम अविनाश कुमार से बेबाक 24 ने बात की, तो उनका जवाब चौंकाने वाला था।

बोले डीएम: "मेरे संज्ञान में नहीं है। कोआपरेटिव एआर बताएंगे।"

डीएम द्वारा मामले को संज्ञान में न होना बताकर गेंद को सहकारी विभाग के पाले में डाल दिया गया।

बचते रहे अधिकारी: जब एआर कोआपरेटिव से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा, "यह मामला जिला कृषि अधिकारी का है।"


इसके बाद, जिला कृषि अधिकारी (DAO) गाजीपुर से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन नहीं लगा।

यह टालमटोल साफ दर्शाता है कि जहां किसान कालाबाजारी से त्रस्त हैं, वहीं जिम्मेदार अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर जवाबदेही से बचने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे कालाबाजारी के सिंडिकेट को फलने-फूलने का मौका मिल रहा है।

 

सरकार का दावा बनाम ज़मीनी हकीकत

एक ओर, कृषि मंत्री यह दावा करते हैं कि प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध है और किसानों से अनावश्यक भंडारण न करने की अपील की जा रही है। सरकार ने शिकायत के लिए एक हेल्पलाइन नंबर (0522-2209650) भी जारी किया है।

वहीं, दूसरी ओर, निरीक्षण के दौरान कृषि अधिकारियों ने पाया कि कई दुकानों पर रेट बोर्ड और स्टॉक बोर्ड नहीं लगे थे, और किसानों को निर्धारित मूल्य से अधिक पर खाद बेची जा रही थी। यह विरोधाभास साफ दर्शाता है कि सख्त निर्देशों के बावजूद, निचले स्तर पर सिंडिकेट की जड़ें मजबूत हैं।


 समाधान: पारदर्शिता और नजीर बनने वाली कार्रवाई

गाजीपुर की तरह, पूरे प्रदेश का किसान खुद को लाचार महसूस कर रहा है। जब तक ओवर-रेटिंग और नकली खाद के इस सिंडिकेट को जड़ से खत्म नहीं किया जाता और दोषियों पर ऐसी कार्रवाई नहीं होती जो नजीर बने, तब तक किसानों की यह परेशानी जारी रहेगी। कालाबाजारी को रोकने के लिए प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ, खाद वितरण प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता लाना ही एकमात्र स्थायी समाधान हो सकता है।



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