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आदिवासियों की जमीन पर गिद्ध दृष्टि डालने वालों की खैर नहीं! कोर्ट ने दिया FIR का आदेश

by on | 2026-03-10 21:26:51

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आदिवासियों की जमीन पर गिद्ध दृष्टि डालने वालों की खैर नहीं! कोर्ट ने दिया FIR का आदेश

सोनभद्र। जिले में भू-माफियाओं और आदिवासियों की जमीन हड़पने वालों के खिलाफ न्याय का डंडा चला है। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट आबिद शमीम की अदालत ने एक कड़ा रुख अपनाते हुए चोपन इंस्पेक्टर को आदेश दिया है कि आदिवासियों की जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले पिता-पुत्रों के विरुद्ध तत्काल FIR दर्ज की जाए। कोर्ट ने न सिर्फ मुकदमा दर्ज करने को कहा है, बल्कि इस पूरे मामले की विवेचना क्षेत्राधिकारी (CO) स्तर के अधिकारी से कराकर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

क्या है पूरा मामला?

​मामला चोपन थाना क्षेत्र के कोटा गांव का है। पीड़िता मनतोरा देवी (पत्नी राम सिंह) ने अधिवक्ता सीपी द्विवेदी और आनंद ओझा के माध्यम से कोर्ट में 173(4) BNSS के तहत गुहार लगाई थी। पीड़िता का आरोप बेहद गंभीर है:

  • साजिश और जालसाजी: आरोपी कामेश्वर जायसवाल और उनके दो बेटों (अनिल व सुनील जायसवाल) ने पीड़िता की मां फुलेसरी के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए।
  • फर्जी अंगूठा: आरोप है कि महज 5-5 रुपये के स्टाम्प पेपर पर कूटरचित दस्तावेज बनाकर, अनुसूचित जनजाति (गोड़ जाति) की महिला का फर्जी अंगूठा लगवाकर जमीन हड़पने की साजिश रची गई। यह घटना 3 जुलाई 2008 की बताई जा रही है।

जातिसूचक गालियां और जान से मारने की धमकी

​पीड़िता का कहना है कि जब उसने 11 जनवरी 2026 को आरोपियों से इस जालसाजी की शिकायत की, तो न्याय मिलने के बजाय उसे अपमानित किया गया। आरोप है कि तीनों पिता-पुत्रों ने पीड़िता को जातिसूचक गालियां दीं और जान से मारने की धमकी देते हुए जमीन पर कब्जा कर लिया।

पुलिस की सुस्ती पर कोर्ट का कड़ा रुख

​हैरानी की बात यह है कि पीड़िता ने पहले थाने और फिर रजिस्टर्ड डाक के जरिए एसपी सोनभद्र तक गुहार लगाई, लेकिन 'खाकी' ने चुप्पी साधे रखी। जब कहीं सुनवाई नहीं हुई, तब मजबूर होकर पीड़िता ने न्याय के मंदिर का दरवाजा खटखटाया।

बेबाक टिप्पणी: जब रक्षक ही मौन हो जाएं, तब अदालत को ही हस्तक्षेप करना पड़ता है। कोर्ट ने इसे 'गंभीर अपराध' मानते हुए पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है और मामले की गहराई से जांच के आदेश दिए हैं।



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